हरियाणा के रोहतक की रहने वाली भारतीय पहलवान साक्षी मलिक कुश्ती की दुनिया में एक प्रमुख हस्ती रही हैं। उन्होंने 12 साल की उम्र में रोहतक के छोटूराम स्टेडियम से खेल में अपना सफ़र शुरू किया था। अपने दादा और एक वरिष्ठ पहलवान की तस्वीर से प्रेरित होकर उन्होंने कुश्ती में उतरने का फ़ैसला किया।

| Season | Event | Rank |
|---|---|---|
| 2016 | Women's 58kg | B कांस्य |
हरियाणा में अपर्याप्त सुविधाओं और महिला स्पैरिंग पार्टनर की कमी के कारण चुनौतियों का सामना करने के बावजूद, मलिक ने दृढ़ता से काम किया। वह अक्सर लड़कों के साथ प्रशिक्षण लेती थी और रियो डी जेनेरियो में 2016 ओलंपिक खेलों के लिए अर्हता प्राप्त करने के लिए इन बाधाओं को पार कर गई।
मलिक की सबसे यादगार खेल उपलब्धि 2016 ओलंपिक में आई, जहाँ उन्होंने 58 किग्रा वर्ग में कांस्य पदक जीता। इस जीत ने उन्हें ओलंपिक पदक जीतने वाली भारत की पहली महिला पहलवान बना दिया। उन्होंने जापानी फ्रीस्टाइल पहलवान काओरी इचो के साथ पोडियम साझा किया, जो उनके लिए गर्व का क्षण था।
अपनी उपलब्धियों के लिए मलिक को कई प्रतिष्ठित पुरस्कार मिले। अगस्त 2016 में उन्हें भारत के सर्वोच्च खेल सम्मान राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया। अप्रैल 2017 में उन्हें भारत सरकार की ओर से पद्म श्री पुरस्कार मिला।
मलिक को मैट पर अपनी आक्रामक खेल शैली के लिए जाना जाता है। वह सिर्फ़ बचाव करने के बजाय अपने प्रतिद्वंद्वी की कमज़ोरियों का फ़ायदा उठाना पसंद करती हैं। उनका पसंदीदा मूव डबल लेग अटैक है, जिसने उन्हें रियो ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने में मदद की।
मलिक की शादी सत्यव्रत कादियान से हुई है, जिन्होंने 2016 में सिंगापुर में आयोजित राष्ट्रमंडल चैंपियनशिप में 97 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीता था। उन्होंने रोहतक में महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय से शारीरिक शिक्षा में डिग्री हासिल की है।
2014 में मलिक को घुटने की सर्जरी करानी पड़ी, लेकिन इस बाधा के बावजूद उन्होंने अपने खेल में उत्कृष्टता हासिल करना जारी रखा। उनके पूरे करियर में उनका दृढ़ संकल्प और लचीलापन स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
मलिक ने हरियाणा में लड़कियों के कल्याण को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार द्वारा शुरू किए गए अभियान 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' के लिए एक राजदूत के रूप में भी काम किया है। वह सार्वजनिक कार्यक्रमों में इस अभियान को सक्रिय रूप से बढ़ावा देती हैं और इसका चेहरा बनना सम्मान की बात मानती हैं।
मलिक का लक्ष्य आगे एक और ओलंपिक पदक जीतना है। कुश्ती के प्रति उनका समर्पण और उनकी अब तक की उपलब्धियाँ उन्हें भारतीय खेलों में एक महत्वपूर्ण व्यक्ति बनाती हैं।
रोहतक से ओलंपिक पदक विजेता बनने तक साक्षी मलिक का सफ़र उनकी कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प का प्रमाण है। उनकी कहानी भारत भर के कई युवा एथलीटों को प्रेरित करती है।