थाईलैंड के चियांग माई में रहने वाले एक एथलीट ने भारोत्तोलन की दुनिया में महत्वपूर्ण प्रगति की है। उन्होंने अपनी यात्रा की शुरुआत 13 साल की उम्र में थाईलैंड के नखोन राचासिमा स्पोर्ट्स स्कूल में की थी। उनकी शुरुआती रुचि एक शिक्षक के द्वारा उन्हें खेल को आजमाने के लिए दिए गए निमंत्रण से पैदा हुई थी।

| Season | Event | Rank |
|---|---|---|
| 2016 | Men's 56kg | B कांस्य |
भारोत्तोलन के अलावा, उन्हें फ़िल्में देखना, गेम खेलना, संगीत सुनना और कॉफी पीना पसंद है। ये शौक उनके कठोर प्रशिक्षण कार्यक्रम में संतुलन प्रदान करते हैं और उन्हें आराम करने में मदद करते हैं।
उनकी सबसे यादगार खेल उपलब्धियों में से एक 2016 के रियो डी जनेरियो में ओलंपिक खेलों में भाग लेना है। यह अनुभव उनके करियर में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर के रूप में सामने आया।
उनका परिवार उनके करियर में सबसे प्रभावशाली शक्ति रहा है। उनकी यात्रा में उनका समर्थन महत्वपूर्ण रहा है। इसके अतिरिक्त, वे थाई भारोत्तोलक पावीना थोंगसुख को अपने नायक और आदर्श के रूप में देखते हैं।
आगे देखते हुए, उनकी योजना प्रतिस्पर्धा जारी रखने की है और उनका लक्ष्य अधिक अंतर्राष्ट्रीय आयोजनों में भाग लेना है। खेल के प्रति उनकी समर्पण और निरंतर सुधार उनकी महत्वाकांक्षाओं में स्पष्ट है।
यह एथलीट की यात्रा, एक युवा लड़के से जो भारोत्तोलन में संघर्ष कर रहा था, ओलंपिक मंच पर प्रतिस्पर्धा करने तक, उनकी कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प का प्रमाण है। अपने परिवार के निरंतर समर्थन और अपने आदर्शों से प्रेरणा के साथ, वह भविष्य में और अधिक सफलता के लिए तैयार हैं।