कॉमनवेल्थ खेल: विवाद गहराया
मुकेश शर्मा
खेल संपादक, बीबीसी हिंदी
भारतीय ओलंपिक संघ और कॉमनवेल्थ गेम्स फ़ेडरेशन या सीडब्ल्यूजी के बीच विवाद बढ़ गया है.
संघ ने गुरुवार को एक संवाददाता सम्मेलन बुलाकर सीडब्ल्यूजी के मुख्य कार्यकारी माइकल हूपर को दिल्ली से वापस बुलाए जाने की माँग की थी.
हूपर पिछले दो साल से दिल्ली में बतौर सलाहकार काम कर रहे हैं.
मगर पहले फ़ेडरेशन के अध्यक्ष माइकल फ़ेनेल ने हूपर को वापस बुलाए जाने की माँग ठुकराई और अब संघ का कहना है कि वह हूपर को कोई तवज्जो नहीं देंगे.
बीबीसी हिंदी से विशेष बातचीत में संघ के उपाध्यक्ष विजय कुमार मल्होत्रा ने कहा, “हमने माँग की थी कि हूपर की जगह किसी और को भेजा जाए अगर नहीं करेंगे तो हम उनके बिना भी फ़ैसले करते चले जाएँगे.”
मल्होत्रा का कहना था कि अगर हूपर रहते भी हैं तो संघ अपने फ़ैसले करता रहेगा क्योंकि फ़ैसले कार्यकारी बोर्ड करता है जिसमें से हूपर और फ़ैनेल को छोड़कर बाक़ी 13 सदस्य भारतीय हैं और वे अपने हिसाब से फ़ैसले करेंगे.
इससे पहले बीबीसी से बातचीत में हूपर कह चुके थे कि वह भारत से नहीं जाएँगे.
उसके बाद कॉमनवेल्थ गेम्स फ़ेडरेशन के अध्यक्ष माइकल फ़ेनेल ने बयान जारी करके कहा कि हूपर को पूरे फ़ेडरेशन का समर्थन हासिल है और वह खेलों के सफल आयोजन के लिए काम करते रहेंगे.
इस पर मल्होत्रा ने कहा, “हूपर साहब इस तरह बर्ताव कर रहे हैं जैसे खेल वही आयोजित करा रहे हैं और बाक़ी सब उनके कर्मचारी हैं. ये अस्वीकार्य है.”
वहीं खेलों की निगरानी के लिए सीडब्ल्यूजी की समन्वय समिति के अलावा एक और तकनीकी समिति के गठन पर भी भारतीय ओलंपिक संघ ने आपत्ति जताई थी.
इसे भी फ़ेनेल ने ख़ारिज कर दिया और कहा कि उस तकनीकी समिति का गठन नहीं रुकेगा.
इस पर विजय कुमार मल्होत्रा का कहना था कि वह समिति चाहे तो आए और घूम-घामकर चली जाए मगर उसे भारतीय ओलंपिक संघ की ओर से कोई समर्थन नहीं दिया जाएगा.
उन्होंने कहा, “हमने कहा था कि समन्वय समिति में कुछ और सदस्य बढ़ा लें मगर ये तो नहीं हो सकता कि एक के बाद एक समितियों का ही गठन होता रहे.”
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