गरीबी के जंग से लड़ रही अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी
रांची। बैंकाक ग्रां प्री की पदकधारी निशा रानी दत्ता को गरीबी दूर करने के लिये अपने विश्व स्तरीय तीरंदाजी उपकरण बेचने पड़े। उप संभागीय अधिकारी राजेश राय ने कहा कि मैं रांची जिले में बुंडु में उसके घर गया था और उससे बात की। उसने कहा कि उसने गरीबी के कारण अपना धनुष बेच दिया है।
उन्होंने कहा कि वह टाटा तीरंदाजी अकादमी में ट्रेनिंग ले चुकी है और अंतरराष्ट्रीय तीरंदाजी चैम्पियनशिप में उसने स्वर्ण पदक जीता था लेकिन गरीबी के कारण वह इस खेल को जारी नहीं रख सकी। राय ने कहा कि निशा ने बताया कि विश्व स्तरीय धनुष की कीमत एक लाख से अधिक होती है और 20 तीरों के एक तरकश का मूल्य 20,000 रूपये होता है।
उन्होंने बताया कि उसने सरकार से मदद की मांग की थी कि उसे पटियाला के एनआईएस में तीरंदाजी की कोचिंग में सहायता की जाये क्योंकि इससे उससे नौकरी मिल सकती है और वह वित्तीय रूप से सुरक्षित हो जायेगी। सरकार से गुहार लगाने पर कोई फायदा न मिलने बाद भी वह गरीबी से लड़की रहीं लेकिन बाद में मजबूर होकर उसको अपना तीरंदाजी उपकरण ही बेचना पड़ा।
उन्होंने कहा कि वह टाटा तीरंदाजी अकादमी में ट्रेनिंग ले चुकी है और अंतरराष्ट्रीय तीरंदाजी चैम्पियनशिप में उसने स्वर्ण पदक जीता था लेकिन गरीबी के कारण वह इस खेल को जारी नहीं रख सकी। राय ने कहा कि निशा ने बताया कि विश्व स्तरीय धनुष की कीमत एक लाख से अधिक होती है और 20 तीरों के एक तरकश का मूल्य 20,000 रूपये होता है।
उन्होंने बताया कि उसने सरकार से मदद की मांग की थी कि उसे पटियाला के एनआईएस में तीरंदाजी की कोचिंग में सहायता की जाये क्योंकि इससे उससे नौकरी मिल सकती है और वह वित्तीय रूप से सुरक्षित हो जायेगी। सरकार से गुहार लगाने पर कोई फायदा न मिलने बाद भी वह गरीबी से लड़की रहीं लेकिन बाद में मजबूर होकर उसको अपना तीरंदाजी उपकरण ही बेचना पड़ा।
Story first published: Tuesday, November 14, 2017, 13:00 [IST]
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