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विश्व कप में कुछ खास करना चाहता हूं : गम्भीर

नई दिल्ली, 31 जनवरी (आईएएनएस)। सलामी बल्लेबाज गौतम गम्भीर को जब वर्ष 2007 विश्व कप टीम से बाहर किया गया था, तब उन्होंने क्रिकेट छोड़ने का मन बना लिया था, लेकिन अब गम्भीर भारतीय उपमहाद्वीप में अपना पहला विश्व कप खेलने के लिए तैयार हैं। गम्भीर का कहना है कि वह घरेलू दर्शकों के सामने विश्व कप में कुछ 'खास' करना चाहते हैं।

गम्भीर ने इस 'खास' को वर्ष 2009 में ईडन गार्डन्स में श्रीलंका के खिलाफ खेली गई 150 रनों की शानदार पारी से तौला। गम्भीर ने हालांकि यह भी कहा कि वह आगामी विश्व कप को किसी अन्य आयोजन की तरह लेना चाहते हैं और यही कारण है कि उन्होंने चुप रहकर अपनी रणनीति को अमली जामा पहनाने का फैसला किया है।

गम्भीर ने आईएएनएस से खास बातचीत में कहा, "विश्व कप अपेक्षाओं का दबाव लेकर आता है। मैं इस तरह के दबाव में नहीं आना चाहता। स्वाभाविक तौर पर मैं इस बात से इंकार नहीं कर सकता कि यह विश्व कप है लेकिन मैं इसे अपने दिलो-दिमाग पर हावी नहीं होने देना चाहता। मैं उसी रणनीति पर बने रहना चाहता हूं, जिस पर वर्षो से चलता आया हूं।"

"मैं इस बात को लेकर रोमांचित हूं कि मुझे घरेलू दर्शकों के सामने खेलने का मौका मिलेगा। मैं आगामी विश्व कप में वर्ष 2009 में ईडन गार्डन्स में श्रीलंका के खिलाफ खेली गई 150 रनों की पारी जैसी बल्लेबाजी करना चाहता हूं। वह पारी मेरे लिए बेहद खास है।"

बाएं हाथ के बल्लेबाज गम्भीर मानते हैं कि विश्व कप जैसे आयोजन में किसी खिलाड़ी को सफलता दिलाने में 'मानसिक दृढ़ता' का काफी अहम योगदान होता है। इसी कारण उन्होंने भी मुश्किल पलों में कई बार अच्छी पारियां खेली हैं।

बकौल गम्भीर, "एक महीने या 15 दिनों में आप अपनी तकनीक में बदलाव नहीं ला सकते। इस कारण आपकी सफलता आपकी मानसिक दृढ़ता पर निर्भर करती है। आपकी सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि आप दबाव को किस तरह लेते हैं।"

"विश्व कप में मैं अपना 100 फीसदी प्रदर्शन करने का प्रयास करुं गा। मैं मैच के बाद यह महसूस करना चाहता हूं कि मैंने अपनी टीम के लिए सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है। मेरा प्रदर्शन इस स्तर का होना चाहिए कि मेरे मन में यह भावना आए कि मैं इससे बेहतर नहीं खेल सकता था।"

वर्ष 2007 विश्व कप के लिए टीम से बाहर किए जाने के बाद गम्भीर बिल्कुल बदले हुए खिलाड़ी के तौर पर सामने आए थे। गम्भीर ने घरेलू मैचों में अच्छा प्रदर्शन करने के बाद भारत को पहला ट्वेंटी-20 खिताब दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी। उस सफलता ने गम्भीर को विश्वस्तरीय बल्लेबाज के तौर पर स्थापित किया था।

गम्भीर ने कहा, "विश्व कप टीम से बाहर रखे जाने के बाद मैंने कई दिनों तक बल्ला नहीं छुआ था। मैंने सोचा था कि अब मैं कभी भी विश्व कप नहीं खेल सकूंगा लेकिन कभी-कभी सामने कोई रास्ता नहीं दिखना भी एक रास्ता दिखाता है। क्रिकेट छोड़ने के बाद मैंने अपने पिता का व्यवसाय सम्भाल लिया होता लेकिन मैंने सोचा कि मैं सिर्फ इसलिए क्रिकेट नहीं छोड़ सकता क्योंकि मेरा चयन विश्व कप के लिए टीम में नहीं हुआ।"

"इसके बाद मैंने टीम में वापसी का फैसला किया और जोरदार मेहनत की। मैंने रन बनाने का महत्व समझा। मैंने रणजी की चुनौती को स्वीकार किया और ढेरों रन बटोरे। इससे मुझे काफी खुशी मिली। ट्वेंटी-20 विश्व कप के बाद मेरे लिए हालात पूरी तरह बदल गए। क्या किसी ने सोचा था कि मैं सर्वाधिक रनों की दौड़ में दूसरे स्थान पर रहूंगा?"

ट्वेंटी-20 विश्व कप के बाद गम्भीर ने अपने खाते में नौ एकदिवसीय और इतनी ही टेस्ट शतक डाले। वर्ष 2009 में आईसीसी ने उन्हें सर्वश्रेष्ठ टेस्ट खिलाड़ी चुना। वह न्यूजीलैंड के खिलाफ हुई श्रृंखला में टीम के कप्तान नियुक्त किए गए। वरिष्ठ खिलाड़ियों की गैरमौजूदगी में गम्भीर ने यह श्रृंखला जीत कर टीम का नाम रोशन किया।

आधुनिक क्रिकेट में गम्भीर को अपने दोस्त और गुरु वीरेंद्र सहवाग के साथ एक विस्फोटक सलामी जोड़ीदार के रूप में जाना जाता है। गम्भीर कहते हैं कि दूसरे छोर पर सहवाग को पाकर वह काफी सहज महसूस करते हैं।

गम्भीर ने कहा, "दूसरे छोर पर सहवाग को पाकर मैं काफी सहज महसूस करता हूं। वह मेरा खेल जानते हैं, वह मुझे मानसिक तौर पर जानते हैं। हम साथ-साथ खेलते हुए एक दूसरे से बातचीत करते रहते हैं। मैं सहवाग के साथ जितनी सहजता से बल्लेबाजी करता हूं और रणनीति पर चर्चा करता हूं, वह किसी अन्य बल्लेबाज के साथ नहीं कर सकता। हमारे बीच जबरदस्त तालमेल है।"

गम्भीर मानते हैं कि विश्व कप जैसे आयोजन में शुरुआत के पांच ओवर का खेल मैच की तस्वीर बदल सकता है। गम्भीर ने कहा, "शीर्ष वरीयता प्राप्त टीमें कभी भी अपनी प्रतिद्वंद्वी टीमों को कमजोर नहीं आंकतीं। विश्व कप में पांच ओवर के खेल के दौरान मैच की तस्वीर बदल जाती है।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

Story first published: Monday, January 31, 2011, 17:00 [IST]
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