घरेलू मैदान पर खेलना मेरा उत्साह बढ़ाता है : सहवाग
नई दिल्ली, 1 फरवरी (आईएएनएस)। भारतीय क्रिकेट टीम के सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग का कहना है कि 'उत्साह से भरे' घरेलू दर्शकों के सामने खचाखच स्टेडियमों में खेलना उन्हें बेहतर करने की 'प्रेरणा' देता है।
सहवाग ने कहा कि वह अपने दिमाग में ऐसे ही दर्शकों और अपने प्रतिद्वंद्वी गेंदबाजों से भरे एक स्टेडियम का खाका तैयार करते हुए आगामी विश्व कप की तैयारी शुरू कर चुके हैं। विश्व कप का आयोजन भारतीय उपमहाद्वीप में 19 फरवरी से होना है।
सहवाग ने आईएएनएस से बातचीत के दौरान कहा, "देश में खचाखच भरे स्टेडियमों में खेलने पर दबाव नहीं होता। घरेलू दर्शक हमेशा अच्छा खेलने के लिए प्रेरित करते हैं। भारतीय दर्शक हमेशा उत्साह से भरे होते हैं। मैदान से हर एक कोने से आ रही 'वीरू-वीरू और सचिन-सचिन' की आवाज उत्साहवर्धक होती है।"
सहवाग इस बात को लेकर जरा भी नहीं सोचना चाहते कि भारतीय टीम के साथ 1987 और 1996 विश्व कप में क्या हुआ था। विश्व कप के इन दो संस्करणों में घरेलू दर्शकों के सामने खेलते हुए भारतीय टीम अपेक्षाओं के दबाव में सेमीफाइनल में हार गई थी।
सहवाग ने कहा, "1987 और 1996 में जो हुआ वह इतिहास बन चुका है। यह मानना होगा कि भारतीय क्रिकेट के साथ भावनात्मक रूप से जुड़े हैं लेकिन इससे खिलाड़ियों पर किसी प्रकार का दबाव हावी नहीं होता। क्या हमें अपने परिवार के साथ वक्त बिताते वक्त किसी प्रकार का दबाव रहता है? इस कारण मैं अपने घरेलू दर्शकों के सामने खेलने के लिए उत्सुक हूं।"
32 वर्षीय सहवाग कंधे की चोट के कारण दक्षिण अफ्रीका के साथ खेली गई एकदिवसीय श्रृंखला में हिस्सा नहीं ले सके थे। सहवाग अब पूरी तरह फिट हो चुके हैं और अपने बल्ले का कमाल दिखाने का इंतजार कर रहे हैं।
सहवाग ने कहा कि उनकी, गौतम गम्भीर और सचिन तेंदुलकर की चोट टीम के लिए चिंता का कारण नहीं है। वह कहते हैं कि भारतीय टीम अपने पूरे दमखम के साथ विश्व कप में अपनी चुनौती पेश करने के लिए तैयार है।
सहवाग ने कहा, "मैं नहीं मानता कि खिलाड़ियों के चोटिल होने के कारण हमारे खिताब जीतने की संभावनाओं पर कोई असर पड़ेगा। हम भाग्यशाली हैं कि हमारे सभी चोटिल खिलाड़ी विश्व कप से एक महीने पहले पूरी तरह फिट हो गए हैं। इस कारण हम विश्व कप में अपनी पूरी ताकत के साथ उतरेंगे। मेरे कंधे की चोट अब ठीक है और मैं जोरदार मेहनत कर रहा हूं। मेरी छुट्टियां खत्म हो चुकी हैं।"
सहवाग मानते हैं कि एक बल्लेबाज और इंसान के तौर पर वह पहले से अधिक परिपक्व हो गए हैं। एक समय था जब सहवाग को अपनी स्वच्छंद शैली के कारण भरोसेमंद बल्लेबाज नहीं माना जाता था लेकिन अब ऐसा नहीं है। अपनी बचपन की दोस्त आरती से शादी और बेटे के जन्म ने सहवाग को एक खिलाड़ी और व्यक्ति के तौर पर पूरी तरह बदल दिया है।
वर्ष 2007 में खेले गए विश्व कप से पहले सहवाग अच्छे फार्म में नहीं थे लेकिन इसके बावजूद जानकारों का मानना था कि वह टीम के लिए काफी उपयोगी साबित होंगे और एक अच्छी पारी उन्हें अपने सर्वश्रेष्ठ फार्म में वापस ला सकती है।
सहवाग का इस सम्बंध में कहना है, "मैं एक दशक से खेल रहा हूं। एक खिलाड़ी के तौर पर मेरे अंदर काफी बदलाव आया है। अब मैं अपने शॉट को लेकर चुनिंदा हो गया हूं। मैं खराब गेंद का इंतजार करता हूं। अच्छी गेंद को सम्मान देने का मतलब अब मुझे समझ में आ गया है।"
"पांच-छह साल खेलने के बाद आप अच्छी तरह समझ जाते हैं कि टीम में आपकी क्या भूमिका है। मैं भाग्यशाली हूं कि मुझ पर कोच और कप्तान का भरोसा बना रहता है। इस कारण मैं अपने अंदाज में बल्लेबाजी करता रहता हूं।"
सहवाग ने कहा कि उनकी विस्फोटक शैली उनके करियर के शुरुआती दिनों की देन है। सहवाग ने कहा, "पहले मैं मध्य क्रम में बल्लेबाजी करता था। उस वक्त मुझे दो या तीन ओवरों तक ही बल्लेबाजी का मौका मिल पाता था। उसी दौैरान मैंने खुलकर शॉट खेलने की कला सीखी थी क्योंकि मेरे पास वक्त नहीं होता था।"
"अब मैं शीर्ष क्रम पर उतरता हूं। मेरे नीचे 10 और बल्लेबाज होते हैं। इस कारण मेरे पास अपने अंदाज में खेलने का मौका होता है। ऐसा नहीं है कि मैं टीम की जरूरत को ध्यान में रखकर कभी बल्लेबाजी नहीं करता। दाम्बुला में श्रीलंका के खिलाफ मैंने ही शतक लगाने के बाद 99 रन बनाए थे जबकि बाकी के बल्लेबाज बुरी तरह नाकाम रहे थे।"
सहवाग ने टेस्ट मैचों में 22 और एकदिवसीय मैचों में 13 शतक लगाए हैं। वह आगामी विश्व कप की तैयारी विपक्षी गेंदबाजों की वीडियो फुटेज देखकर कर रहे हैं।
सहवाग ने कहा, "मैं अपने दिमाग में एक स्टेडियम का खाका तैयार करता हूं। मेरे दिमाग में कई गेंदबाज होते हैं। इस दौरान मैं अपने विपक्षी गेंदबाजों को बहुत बारीकी से खेलता हूं। जहां जरूरत होती है, मैं उनके खिलाफ सावधानी भी बरतता हूं और जब मौका मिलता है तब खुलकर शॉट खेलता हूं।"
यह पूछे जाने पर कि विस्फोटक बल्लेबाज यूसुफ पठान उन्हें अपना प्रेरणास्रोत बताते हैं तो कैसा लगता है? सहवाग ने कहा, "जब मैं युवा था, तब सचिन मेरे प्रेरणास्रोत थे। यह सुनकर अच्छा लगता है, जब कोई यह कहता है कि वह मेरे खेल से प्रेरित हुआ है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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