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रणजी ट्रॉफी : राजस्थान ने रचा इतिहास (लीड-1)

मोतीबाग स्टेडियम में खेले गए फाइनल मुकाबले में राजस्थान ने पहली पारी में मिली 33 रनों की बढ़त के आधार पर बड़ौदा को पछाड़ा। राजस्थान 37 वर्ष बाद प्लेट लीग से सुपरलीग का सफर तय कर फाइनल में पहुंचने में कामयाब रहा था।

राजस्थान द्वारा जीत के लिए रखे गए 375 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी बड़ौदा की टीम मैच के अंतिम और पांचवें दिन शनिवार को चार विकेट के नुकसान पर 28 रन बना सकी।

इसके बाद मैच को ड्रॉ घोषित कर दिया गया लेकिन पहली पारी में मिली बढ़त के आधार पर राजस्थान को विजेता का ताज मिला।

राजस्थान ने पहली पारी में 394 रन बनाए थे जबकि उसकी दूसरी पारी 341 रनों पर सिमट गई थी। बड़ौदा ने अपनी पहली पारी में 361 रन बनाए थे।

बड़ौदा की दूसरी पारी की शुरुआत बेहद खराब रही और उसके सलामी बल्लेबाज केदार देवधर पांच रन के निजी योग पर चाहर की गेंद पर विनीत सक्सेना को कैच थमाकर चलते बने।

जयकिशन कोसवाला ने 13 रनों का योगदान दिया। कोसवाला को पंकज सिंह ने रोहित झलानी के हाथों लपकवाया। आदित्य वाघमोडे ने चार रन बनाए वहीं स्वप्निल सिंह दो रन बनाकर चाहर के शिकार हो गए। अभिजीत कारामबेल्कर (2) और अम्बाती रायडू (2) नाबाद लौटे।

इससे पहले, राजस्थान की ओर से पांचवें दिन की शुरुआत बल्लेबाज रश्मि परिदा (78) और अशोक मेनारिया (83) ने की। राजस्थान ने चौथे दिन का खेल खत्म होने तक चार विकेट पर 201 रन बनाए थे।

मेनारिया अपने कल के स्कोर में 18 रन जोड़कर 101 के निजी योग पर आदित्य वाघमोडे की गेंद पर उन्हीं को कैच थमा बैठे। मेनारिया ने 149 गेंदों पर13 चौके और तीन छक्के लगाए।

परिदा 89 के निजी योग पर भार्गव भट्ट की गेंद पर पगबाधा करार दिए गए। परिदा ने 229 गेंदों पर 10 चौके और एक छक्का लगाया। परिदा ने पहली पारी में 56 रनों की पारी खेली थी। मेनारिया और परिदा ने पांचवें विकेट के लिए 165 रनों की साझेदारी की।

पंकज सिंह ने 95 गेंदों पर दो चौकों और एक छक्के की मदद से 24 रन बनाए जबकि रोहित झलानी ने नाबाद 43 रनों का योगदान दिया। झलानी ने 80 गेंदों पर सात चौके लगाए। पंकज और झलानी के बीच अंतिम विकेट लिए 59 रनों की साझेदारी हुई।

इसके बाद मधुर खत्री (18), विवेक यादव (13) और दीपक चाहर ने (11 ) रनों का योगदान दिया।

बड़ौदा की ओर से मुर्तजा वाहोरा ने सर्वाधिक चार विकेट झटके जबकि भट्ट के खाते में दो विकेट गये। संकल्प वोहरा, स्वप्निल सिंह, अभिजीत कारामबेल्कर और वाघमोडे के खाते में एक-एक विकेट गया।

जीत के बाद राजस्थान के कप्तान ऋषिकेश कानितकर ने कहा, " मैं इस खिताबी जीत को शब्दों में बयां नहीं कर सकता। वास्तव में यह बड़ी जीत है। यह टीम की जीत है और इसमें सभी खिलाड़ियों का अहम योगदान रहा।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

Story first published: Saturday, January 15, 2011, 19:25 [IST]
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