..जब इमरान खान की कप्तानी में खेले तेंदुलकर
क्रिकेट लेखक गौतम भट्टाचार्य ने अपनी नई पुस्तक 'एसएसीएच' (सच) में इस बात का उल्लेख किया है कि 1989 में पाकिस्तान के खिलाफ अपने करियर की शुरुआत करने वाले तेंदुलकर 1988 में मुम्बई के क्रिकेट क्लब ऑफ इंडिया (सीसीसीई) मैदान पर एक स्थानापन्न खिलाड़ी के तौर पर खेले थे।
इमरान ने तेंदुलकर को मैदान में सचेत रहने को कहा था लेकिन इसके बावजूद वह एक कैच नहीं पकड़ सके थे। वह लोकल रेलगाड़ी से घर लौटने वाले थे। उन्हें इस बात की शिकायत थी कि कप्तान के तौर पर इमरान मैदान में कुछ ज्यादा ही बदलाव कर रहे थे।
तेंदुलकर ने इस घटना का जिक्र इस पुस्तक में कुछ इस तरह किया है, "यह बिल्कुल सच है। मैं उस मैच में स्थानापन्न क्षेत्ररक्षक के तौर पर खेला था। इमरान पाकिस्तान के कप्तान थे। मेरी उनसे कोई बात नहीं हुई थी। इमरान ने मुझे मैदान के एक छोर पर खड़ा होने के लिए कहा था लेकिन मेरा मानना था कि अगर मैं थोड़ा आगे खड़ा होता तो वह कैच पकड़ा जा सकता था।"
इस पुस्तक में इस बात का भी जिक्र है कि इमरान के नेतृत्व में खेलने से एक वर्ष पहले 1987 में तेंदुलकर को आस्ट्रेलिया के महान तेज गेंदबाज डेनिस लिली की देखरेख में एमआरएफ पेस अकादमी में तेज गेंदबाज के तौर पर प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए चुना गया था।
तेंदुलकर ने कहा, "अकादमी के लिए चुने जाने पर मुझे कोई परेशानी नहीं थी लेकिन मैं किसी भी हालत में तेज गेंदबाज नहीं बनना चाहता था। मैंने खुद को एक ऐसे हरफनमौला खिलाड़ी के तौर पर देखा था, जो तेज गेंदबाजी करता हो। यही कारण है कि मैं अपना बल्लेबाजी किट लेकर चेन्नई गया था। यह अलग बात है कि मुझे बल्लेबाजी का मौका नहीं मिला। मैंने एक या दो सत्रों में गेंदबाजी जरूर की थी।"
1987 के एमआरएफ के उस कैम्प में भारतीय टीम के पूर्व कप्तान और तेंदुलकर के लम्बे समय के जोड़ीदार सौरव गांगुली भी शामिल थे लेकिन तेंदुलकर को सौरव से मुलाकात की बात याद नहीं। तेंदुलकर ने कहा, "वहां मेरी सौरव से मुलाकात हुई थी या नहीं, यह मुझे याद नहीं लेकिन बाद में राष्ट्रीय शिविर में उनसे मुलाकात हुई थी।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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