राष्ट्रमंडल खेल : मतभेद खत्म, तैयारी पर ध्यान देंगे कलमाडी और फेनेल (लीड-1)
लंदन, 30 अक्टूबर (आईएएनएस)। वर्ष 2010 में नई दिल्ली में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों की आयोजन समिति के अध्यक्ष सुरेश कलमाडी ने शुक्रवार को कहा कि अब वह तमाम मतभेदों को भुलाकर खेलों के सफल आयोजन पर अपना ध्यान केंद्रित करेंगे।
कलमाडी ने राष्ट्रमंडल खेल महासंघ (सीजीएफ) के अध्यक्ष माइकल फेनेल से कई दौर की मुलाकात के बाद यह बात कही। बाद में दोनों अधिकारियों ने एक संयुक्त बयान जारी किया, जिसमें कहा गया कि वे अपने बीच के मतभेद को किनारे रखकर खेलों के सफल आयोजन के लिए साथ-साथ काम करेंगे।
इस संबंध में कलमाडी को सीजीएफ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी माइक हूपर ने भी सहयोग का वचन दिया है। कलमाडी और फेनेल द्वारा संयुक्त बयान जारी करने से कुछ समय पहले हूपर ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि वह भी तमाम मतभेदों को रफा-दफा करने पर यकीन करते हैं।
कलमाडी और फेनेल के संयुक्त बयान में कहा गया है, "हमारे लिए यह जरूरी है कि हम अब अपना ध्यान राष्ट्रमंडल खेलों के सफल आयोजन कराने पर केंद्रित करें। ऐसे मुद्दों पर चर्चा के लिए अब वक्त नहीं बचा है, जिनका कोई नतीजा नहीं निकलने वाला है। ऐसे में हमें तमाम मुद्दों को भुलाकर आयोजन की तैयारियों पर गौर करना चाहिए।"
29 अक्टूबर को आयोजित क्वींस बैटन रिले समारोह के बाद कलमाडी और फेनेल के बीच मुलाकात हुई थी जिसमें दोनों ने अपने विवादों को सुलझाना बेहतर समझा। दोनों ने यह भी तय किया वे एक दूसरे के खिलाफ बयानबाजी नहीं करेंगे।
संयुक्त बयान में आगे लिखा है, "खेलों के आयोजन के अगले चरण के तहत 14 दिसम्बर को सीजीएफ समन्वय आयोग खेलों की तैयारियों की प्रगति का जायजा लेगा। इसकी समीक्षा रिपोर्ट सीजीएफ और आयोजन समिति मिलकर तैयार करेंगे।"
इससे पहले, भारतीय खेल मंत्री मनोहर सिंह गिल ने भी फेनेल से मुलाकात के बाद तमाम मुद्दों को भुलाकर आयोजन संबंधी तैयारियों पर ध्यान केंद्रित करने की बात कही थी।
गिल ने कहा था कि उन्होंने फेनेल को इस बात को लेकर आश्वस्त किया है कि भारत 2010 राष्ट्रमंडल खेलों के सफल आयोजन को लेकर कृतसंकल्प है और इस अभियान में समूचा राष्ट्र एक साथ है।
उल्लेखनीय है कि कलमाडी ने सीजीएफ अध्यक्ष के हूपर को निगरानी के लिए भारत भेजने के फैसले का विरोध किया था। कलमाडी ने हूपर को वापस बुलाने को कहा था लेकिन फेनेल ने इससे इंकार कर दिया था।
कलमाडी चाहते थे कि हूपर के स्थान पर सीजीएफ किसी अन्य अधिकारी को भारत भेजे लेकिन फेनेल इसके लिए तैयार नहीं थे। इसे लेकर फेनेल और कलमाडी के बीच वाक्युद्ध छिड़ गया था। गिल ने मध्यस्थ की भूमिका निभाते हुए दोनों अधिकारियों के बीच सुलह कराने की बात कही थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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