..जब तेंदुलकर की छींटाकशी की बदौलत जीता था भारत
तेंदुलकर ने गौतम भट्टाचार्य द्वारा लिखित पुस्तक 'एसएसीएच' (सच) में इस बात का जिक्र किया है कि मैक्ग्राथ के खिलाफ स्लेजिंग का उनका पहला और अंतिम प्रयास सफल रहा था। भारत वह मैच जीत गया था।
तेंदुलकर ने कहा, "मैंने बिना किसी मकसद के कभी छींटाकशी नहीं की। यह काम मैंने एक ही बार किया है। केन्या में आयोजित चैम्पियंस ट्रॉफी के दौरान मैंने आस्ट्रेलिया के खिलाफ खेलते हुए मैक्ग्राथ के खिलाफ छींटाकशी की थी।"
"मैच के दौरान बादल छाए हुए थे। विकेट भी गीला था। मैंने सौरव गांगुली से पहले ही कह दिया था कि मैंने मैक्ग्राथ का मूड खराब करने की तैयारी कर ली है। मैं ऐसा कहने वाला हूं, जिससे वह अपने गेंदों की दिशा और लम्बाई से भटक जाएंगे। मैंने मैक्ग्राथ से कहा कि आज मैं तुम्हारी गेंद पर छक्का मारूंगा।"
"इसके बाद तो मैक्ग्राथ का गुस्सा देखने लायक था। वह लगातार गुस्से में रहे और इधर-उधर गेंद फेंकते रहे। हम तो यही चाहते थे क्योंकि हम जानते थे कि बादलों के बीच गीले विकेट पर मैक्ग्राथ हमें किस तरह का नुकसान पहुंचा सकते हैं।"
"हम वह मैच जीत गए थे। मुझे इसकी काफी खुशी थी। मेरी छींटाकशी टीम के काम आई थी। वैसे इस शब्द से मेरा परिचय करियर के शुरुआत में ही हो गया था। हम आस्ट्रेलिया दौरे पर थे और मैं बल्लेबाजी कर रहा था। एक गेंद मेरे पैरों पर आकर लगी। मैं उसे उठाकर गेंदबाज को देने का प्रयास करने लगा, तभी आस्ट्रेलियाई कप्तान एलन बार्डर ने मुझसे कहा कि गेंद को हाथ मत लगाना। इसके बाद मैं रुक गया था।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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