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राष्ट्रमंडल खेलों के लिए और धन

तैयारियों में देरी और उम्मीदों से ज़्यादा ख़र्च बढ़ने के आरोपों का सामना कर रहे वर्ष 2010 के राष्ट्रमंडल खेलों की आयोजन समिति को और भारी भरकम रक़म देने की घोषणा की गई है.

केंद्र सरकार ने नई दिल्ली में होने वाले इन खेलों की आयोजन समिति को 1620 करोड़ रुपए क़र्ज़ के रूप में दिए हैं.

सूचना और प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने गुरूवार को हुई कैबिनेट की बैठक के बाद पत्रकारों के बताया, "केंद्रीय मंत्रिमंडल ने युवा मामलों और खेल मंत्रालय के इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है जिसमें राष्ट्रमंडल खेलों की आयोजन समिति को 1620 करोड़ रुपए का क़र्ज़ देने की माँग की गई थी. ये क़र्ज़ मौजूदा सरकारी ब्याज दर पर दिया जा रहा है. ये खेल तीन से 14 अक्तूबर 2010 तक नई दिल्ली में आयोजित किए जाएंगे. इससे पहले जो बजट स्वीकृत किया गया था वो 767 करोड़ रुपए का था."

अंबिका सोनी ने राष्ट्रमंडल खेलों का बजट बढ़ाने की कारणों के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि उदघाटन और समापन समारोहों के आयोजन का ख़र्च बढ़ गया है. इसके अलावा महारानी के बैटन रिले के अंतरराष्ट्रीय चरण के दिनों की संख्या 136 दिनों से बढ़कर 240 दिन हो गई है और भारतीय चरण में दिनों की संख्या 60 से 100 हो गई है. उन्होंने कहा कि ऐसे ही कुछ कारणों की वजह से ख़र्च बढ़ा है इसलिए बजट भी बढ़ाया गया है.

अंबिका सोनी ने कहा, "खेलों का सफल आयोजन सुनिश्चित करने के लिए कुछ नए मद जोड़ गए हैं जो शुरूआती बजट में नहीं रखे गए थे, मसलन खिलाड़ियों और पत्रकारों को मान्यता देना, विज्ञापन, टेलीविज़न के अधिकार, सुरक्षा, पर्यावरण संबंधी मुद्दे और टिकट व्यवस्था का ख़र्च वग़ैरा."

ठहरने की व्यवस्था, भोजन, मेज़बानी, महारानी के बैटन रिले, आयोजन समिति के दफ़्तरों का ख़र्च, संचार, मीडिया, विभिन्न मदों में प्रोद्योगिकी का इस्तेमाल, आपात स्थिति से निपटने के लिए व्यवस्थाएँ करना, बीमा और खेलों के तकनीकी आयोजन कुछ ऐसे मद हैं जिन पर ख़र्च बढ़ा बताया गया है.

सूचना और प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने कहा, "इन खेलों के आयोजन में सक्रिय योगदान करने वाले स्वयंसेवकों की संख्या बढ़ककर 30 हज़ार हो गई है जिसकी वजह से उन्हें मान्यता देना, खान-पान, वर्दी वग़ैरा पर ख़र्च भी बढ़ गया है."

"आयोजन समिति ने अपने दफ़्तर बनाने के लिए जो परिसर किराए पर लिए हैं उनका ख़र्च बढ़ा है जिसके लिए 175 करोड़ रुपए आबंटित किए गए हैं. शुरुआती बजट में तकनीक पर लगभग कोई बजट नहीं रखा गया था और अब उसके लिए लगभग 200 करोड़ रुपए निर्धारित किए गए हैं."

अंबिका सोनी ने कहा कि ऐसी उम्मीद है कि आयोजन समिति इन खेलों के आयोजन से लगभग 1708 करोड़ रुपए का राजस्व भी जुटाएगी यानी उसे इस रक़म की आमदनी होगी.

विवाद

राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारियाँ हाल के समय में विवादों में घिर गई हैं क्योंकि राष्ट्रमंडल खेल महासंघ ने तैयारियों पर यह कहते हुए अप्रसन्नता व्यक्त की थी कि तैयारियों की रफ़्तार अपेक्षित रूप से नहीं चल रही है.

इस विवाद ने तब और कड़वा रूप ले लिया जब आयोजन समिति के अध्यक्ष सुरेश कलमाड़ी ने राष्ट्रमंडल खेल महासंघ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी माइक हूपर को दिल्ली से स्थानांतरित करने तक की माँग यह कहते हुए कर डाली थी कि हूपर खेलों की तैयारियों में रोड़े अटका रहे हैं.

इस विवाद को अक्तूबर में लंदन में आयोजित महारानी बैटन रिले के दौरान हल किया गया जब सुरेश सलमाड़ी और माइक हूपर ने एक साथ बैठकर तमाम विवादास्पद मुद्दों पर बातचीत की और अतीत के विवादों को ठंडे बस्ते में डालने पर राज़ी हुए.

Story first published: Tuesday, November 14, 2017, 12:26 [IST]
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