इस बार आये राजा और कलमाड़ी बम
पटना। दुर्गापूजा की तरह इस बार भी दीवाली पर राजनेताओं की धूम देखने को मिल रही है। अररेरे धूम का मतलब यह नहीं कि राजनेता जमकर दीवाली मना रहे हैं, बल्कि उनके नाम पर पटाखे और बम बाजार में आ चुके हैं। ये बम अमावस्या की रात महालक्ष्मी के पूजन के बाद गली-मुहल्लों में जलाये जायेंगे।
बिहार की राजधानी पटना राजनेताओं के नाम से बम व पटाखे के लिए हमेशा से फेमस रही है। इस बार यहां एक से बढ़कर एक पटाखे आये हैं। एक तरफ आप को जहां 2जी स्पेक्ट्रम के मुख्य आरोपी ए राजा और राष्ट्रमंडल घोटाले के आरोपी सुरेश कलमाड़ी के नाम पर बम आ गये हैं।
अब अगर हम पिछले वर्षों की बात करें तो बिहार में इससे पहले धोनी बम, लालू बम, राबड़ी बम आये। यही नहीं पिछले साल यहां कसाब और लादेन बम काफी मशहूर रहे और उनके नाम पर पटाखों की खूब बिक्री हुई।
वहीं बच्चों को आकर्षित करने के लिए कार्टून कैरेक्टर छोटा भीम, डोरेमोन, टॉम एंड जैरी, मिक्की माउस, सिंग चैन, ऐलिस, कृष्णा बलराम के नामप पर फुलझडि़यां, मेहताब, चक्कर घिन्नी व अनार देखने को मिले।
पटना के पटाखा विक्रेता विक्रम सिन्हा का कहना है कि ऐसे नामों से लोग काफी तेजी से आकर्षित तो होते ही हैं, बल्कि लोगों को बताने में भी आसानी होती है। पिछले वर्षों में बच्चों के लिए 'कसाब बंदूक', 'मंगल पांडेय बंदूक', 'सरफरोश गन', 'लादेन बंदूक' ने भी धमाल मचाया था। विक्रम के मुताबिक आम तौर पर इन पटाखों की बिक्री ज्यादा होने की वजह से इनके दाम भी ज्यादा होते हैं।
बिहार की राजधानी पटना राजनेताओं के नाम से बम व पटाखे के लिए हमेशा से फेमस रही है। इस बार यहां एक से बढ़कर एक पटाखे आये हैं। एक तरफ आप को जहां 2जी स्पेक्ट्रम के मुख्य आरोपी ए राजा और राष्ट्रमंडल घोटाले के आरोपी सुरेश कलमाड़ी के नाम पर बम आ गये हैं।
अब अगर हम पिछले वर्षों की बात करें तो बिहार में इससे पहले धोनी बम, लालू बम, राबड़ी बम आये। यही नहीं पिछले साल यहां कसाब और लादेन बम काफी मशहूर रहे और उनके नाम पर पटाखों की खूब बिक्री हुई।
वहीं बच्चों को आकर्षित करने के लिए कार्टून कैरेक्टर छोटा भीम, डोरेमोन, टॉम एंड जैरी, मिक्की माउस, सिंग चैन, ऐलिस, कृष्णा बलराम के नामप पर फुलझडि़यां, मेहताब, चक्कर घिन्नी व अनार देखने को मिले।
पटना के पटाखा विक्रेता विक्रम सिन्हा का कहना है कि ऐसे नामों से लोग काफी तेजी से आकर्षित तो होते ही हैं, बल्कि लोगों को बताने में भी आसानी होती है। पिछले वर्षों में बच्चों के लिए 'कसाब बंदूक', 'मंगल पांडेय बंदूक', 'सरफरोश गन', 'लादेन बंदूक' ने भी धमाल मचाया था। विक्रम के मुताबिक आम तौर पर इन पटाखों की बिक्री ज्यादा होने की वजह से इनके दाम भी ज्यादा होते हैं।
Story first published: Tuesday, November 14, 2017, 12:59 [IST]
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