टॉस हारने के बाद पहले बल्लेबाजी करते हुए भारतीय टीम ने श्रीलंका के सामने 415 रनों का पहाड़ सरीखा लक्ष्य रखा था। जवाब में खेलने उतरी श्रीलंकाई टीम रोमांच के तमाम उतार-चढ़ाव से गुजरते हुए 50 ओवरों की समाप्ति तक आठ विकेट खोकर 411 रन ही बना सकी।
श्रीलंका की ओर से तिलकरत्ने दिलशान ने सर्वाधिक 160 रन बनाए जबकि कप्तान कुमार संगकारा ने 90 और उपुल थरंगा ने 67 रनों का योगदान दिया। थिलिना कन्डम्बी ने महत्वपूर्ण 24 रन बनाए जबकि एंजेलो मैथ्यूज ने 38 रनों का योगदान दिया।
एकदिवसीय मैचों के इतिहास में सिर्फ एक टीम 400 रनों से अधिक के लक्ष्य का पीछा कर पाई है। वह वाकया 26 मार्च, 2006 को जोहांसबर्ग में हुआ था, जब दक्षिण अफ्रीका ने आस्टेलिया द्वारा दिए गए 434 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए एक गेंद शेष रहते जीत हासिल की थी।
इस लिहाज से श्रीलंकाई टीम इतिहास रचने से चूक गई। एकदिवसीय मैचों में सबसे बड़ा स्कोर खड़ा करने का रिकार्ड श्रीलंकाई टीम के नाम ही दर्ज है। इस टीम ने चार जुलाई 2006 को एम्सटेलवीन में हॉलैंड के खिलाफ नौ विकेट पर 443 रन बनाए थे।
इससे पहले, टॉस हारने के बाद पहले बल्लेबाजी के लिए उतरी भारतीय टीम ने निर्धारित 50 ओवरों में सात विकेट के नुकसान पर 414 रन बनाए थे। एकदिवसीय मैचों में भारतीय टीम अपना अब तक का सबसे बड़ा योग हासिल किया।
भारत की ओर से सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग ने 102 गेंदों पर 17 चौकों और छह नायाब छक्कों की मदद से सर्वाधिक 146 रन बनाए। सहवाग ने अपना 12वां एकदिवसीय शतक लगाया।
इसके अलावा सचिन तेंदुलकर ने 63 गेंदों पर 10 झन्नाटेदार चौकों और एक छक्के की मदद से 69 और कप्तान महेंद्र सिंह धौनी ने 53 गेंदों पर सात चौकों और तीन छक्कों की मदद से 72 रन बनाए।
युवराज सिंह के स्थान पर टीम में जगह पाने वाले विराट कोहली ने 27 रनों का योगदान दिया जबकि रवींद्र जडेजा 17 गेंदों पर एक चौके और दो छक्कों की मदद से 30 रन बनाकर नाबाद लौटे।
सहवाग और तेंदुलकर ने पहले विकेट के लिए 19.3 ओवरों में 153 रन जोड़े जबकि कप्तान धौनी और सहवाग ने तीसरे विकेट के लिए मात्र 16 ओवरों में 156 रन जोड़ डाले।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।