पूरी तैयारी के साथ हॉकी की लोकप्रियता भुनाने उतरा है निम्बस
नई दिल्ली, 29 दिसम्बर (आईएएनएस)। इस वर्ष मार्च में आयोजित एफआईएच विश्व कप के साथ-साथ अक्टूबर में आयोजित राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान हॉकी मुकाबलों ने मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में भारी भीड़ की आकर्षित किया था। राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान तो ज्यादातर मुकाबलों में स्टेडियम खचाखच भरे हुए थे।
राष्ट्रीय खेल के प्रति देशवासियों के इसी प्यार और लगाव के बूते निम्बस कम्युनिकेशंस लिमिटेड की सहयोगी कम्पनी-निम्बस स्पोर्ट्स पूरी तैयारी के साथ हॉकी की लोकप्रियता को भुनाने के लिए मैदान में उतर गई है।
निम्बस स्पोर्ट्स को इस बात की परवाह नहीं कि भारतीय हॉकी की कमान किसके हाथ में है। बेशक अदालत के फैसले ने हॉकी इंडिया (एचआई) को फिलहाल देश में हॉकी के संरक्षण का अधिकार दे दिया है लेकिन आने वाले दिनों में यह अधिकार किसके हाथ में होगा, इसका अंतिम फैसला होना बाकी है। इसी को देखते हुए निम्बस स्पोर्ट्स ने भारतीय हॉकी महासंघ (आईएचएफ) के साथ हाथ मिलाया और मंगलवार को इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) की तर्ज पर वर्ल्ड सीरीज हॉकी (डब्ल्यूएसएच) शुरू करने की घोषणा की।
वर्ल्ड सीरीज हॉकी की घोषणा पूरे धूम-धड़ाके साथ साथ हुई। इस अवसर पर आईएचएफ के पूर्व अध्यक्ष के.पी.एस. गिल और मौजूदा अध्यक्ष आर. के. शेट्टी के साथ-साथ भारतीय हॉकी के पांच सितारे-ड्रैग फ्लिकर संदीप सिंह, फुल बैक सरदारा सिंह, गोलकीपर एड्रियन डिसूजा, डिफेंडर धनंजय महाडिक और चण्डीगढ़ के उभरते खिलाड़ी गुरजिंदर सिंह मौजूद थे।
निम्बस कम्युनिकेशंस लिमिटेड के कार्यकारी अध्यक्ष हरीश थावानी ने कहा कि वर्ल्ड सीरीज हॉकी के लिए उनका आईएचएफ के साथ 15 साल का करार हुआ है और यह लीग देश के चुनिंदा 10 शहरों में खेली जाएगी। निम्बस ने इस सीरीज के लिए बकायदे होमवर्क किया है। उसे अच्छी तरह पता है कि हॉकी के मूलभूत सुविधाओं के नाम पर एचआई के पास कुछ भी नहीं, ऐसे में आईएचएफ से हाथ मिलाना अच्छा रहेगा क्योंकि देश के ज्यादातर एट्रो टर्फ मैदानों पर उसी का मालिकाना हक है और फिर खेल मंत्रालय से उसी को मान्यता प्राप्त है।
वर्ल्ड सीरीज हॉकी का स्वरूप काफी हद तक आईपीएल जैसा होगा। इसमें खेलने वाली फ्रेंचाइजी टीमों का मालिकाना हक कारपोरेट कम्पनियों के पास होगा और टीमों के लिए बोली लगाने के लिए एक निश्चित रकम निर्धारित की जाएगी। इसमें खेलने वाले खिलाड़ियों को मैच फीस, विज्ञापन के साथ-साथ अच्छे प्रदर्शन के लिए खास उपहार भी दिए जाएंगे। हरीश ने कहा कि वर्ल्ड सीरीज हॉकी के माध्यम से भारतीय हॉकी खिलाड़ी 40 से 50 लाख रुपये हर वर्ष कमा सकते हैं।
हॉकी खिलाड़ियों के लिहाज से यह रकम काफी मायने रखती है क्योंकि जिस तरह उन्हें अपने वेतन और अन्य भत्तों के लिए हाल के दिनों में भूख हड़ताल के साथ-साथ शिविर का बहिष्कार करने पर मजबूर होना पड़ा था, उस लिहाज से आईएचएफ और निम्बस स्पोर्ट्स के इस पहल से निश्चित तौर पर भारतीय हॉकी को फायदा होगा। खिलाड़ी तंगहाली से निकलेंगे और बिना किसी चिंता के देश के लिए अच्छा प्रदर्शन करेंगे।
इस बीच, खिलाड़ियों के लिए चिंता की एक बात सामने आई है। एचआई के महासचिव नरेंद्र बत्रा ने कहा है कि जो खिलाड़ी इस लीग से जुड़ेंगे, उनका चयन राष्ट्रीय टीम में नहीं किया जाएगा लेकिन ऐसे में जबकि इस सीरीज के लिए देश के 37 चुनिंदा खिलाड़ियों के साथ करार किया जा चुका है और आने वाले दिनों में बाकियों के साथ करार कर लिया जाएगा, यह देखने वाली बात होगी कि बत्रा की इस 'धमकी' का खिलाड़ियों पर क्या असर होगा। वैसे भी इस सीरीज के लिए करार कर चुके खिलाड़ियों के बगैर भारतीय राष्ट्रीय टीम का स्तर काफी गिर सकता है।
बहरहाल, वर्ल्ड सीरीज हॉकी का पहला संस्करण नवंबर/दिसम्बर 2011 में खेला जाएगा। इसका आयोजन भारत में होने वाली चैम्पियंस ट्राफी के बाद होगा और इसमें 60 विदेशी खिलाड़ियों को जगह दी जा सकती है। यह भी बिल्कुल आईपीएल की तर्ज पर होगा। वर्ल्ड सीरीज हॉकी के अंतर्गत 10 सप्ताह में कुल 100 मैच खेले जाएंगे, जिनमें 250 से अधिक खिलाड़ी अपना फन दिखाएंगे।
निम्बस ने हालांकि यह साफ किया है कि फ्रेंचाइजी का मालिकाना हक हासिल करने वालों की वित्तीय हैसियत के साथ-साथ यह प्रमुख रूप से देखा जाएगा कि देश में हॉकी के विकास को लेकर उनकी क्या राय और तैयारी है। ऐसा हो तो अच्छा है लेकिन कमाई करने मैदान में उतरी एक निजी कम्पनी किस हद तक अपनी प्राथमिकता पर टिकी रह पाएगी, यह आने वाला वक्त ही बताएगा लेकिन कुल मिलाकर इससे भारतीय हॉकी को ठीक उसे प्रकार फायदा होगा, जैसे आईपीएल से क्रिकेट को हो रहा है। आईपीएल के तीन संस्करण बीतने के बाद लगभग एक दर्जन बेहद प्रतिभाशाली खिलाड़ी राष्ट्रीय टीम में जगह पाने के लिए कतार में हैं।
भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान धनराज पिल्ले ने कुछ दिन पहले आईएएनएस से बातचीत के दौरान कहा था कि देश में हॉकी का स्तर सुधारने के लिए गांव-खेड़ों में जाकर प्रतिभा की तलाश करनी होगी। यह काम अब पूरा होता दिख रहा है क्योंकि फ्रेंचाइजी टीमें अपने लिए कम 'कीमत' वाले अच्छे खिलाड़ियों की तलाश में गांव-खेड़ों तक स्वत: ही पहुंच जाएंगी। यह काम वैसे तो एचआई या आईएचएफ को करना चाहिए लेकिन निम्बस की इस पहल से संकेत मिलता है कि अब कारपोरेट कम्पनियां इस काम को अंजाम देंगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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