खेल सामग्री बनाएंगे मेरठ जिला जेल के कैदी
मेरठ, 9 फरवरी (आईएएनएस)। मेरठ जिला कारागार के कैदी खेलों से जुड़ी सामग्रियों का निर्माण करेंगे। ये कैदी क्रिकेट पैड, फुटबाल और बैडमिंटन रैकेड बनाएंगे, जिन्हें बाजार में बेचा जाएगा।
इस काम के जरिए जिला कारागार के तमाम कैदी जेल में अच्छा समय व्यतीत करने के साथ-साथ अपने परिजनों को वित्तीय सहायता भी मुहैया करा पाएंगे।
जेल प्रशासन ने इसके लिए जो पहल की थी, वह रंग लाने लगी है। खेल सामग्री बनाने वाली तीन से चार कम्पनियां इसके लिए आगे आई हैं। ये कम्पनियां खेल सामग्री बनाने के लिए इन कैदियों को प्रशिक्षित करेंगी।
जेल अधीक्षक आर.के. केसरवानी ने आईएएनएस से फोन पर बातचीत के दौरान कहा, "हमारे कैदी जेल के अंदर क्रिकेट ग्ल्वस सिलने, क्रिकेट पैड बनाने, फुटबाल और बैडमिंटन रैकेट बुनने का काम करेंगे। इसके लिए जरूरी सामान खेल सामग्री बनाने वाली कम्पनियां उपलब्ध कराएंगी।"
"इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि इससे कैदी अपने परिजनों को वित्तीय मदद मुहैया करा सकेंगे। कई कैदियों के परिजन विषम परिस्थितियों में जी रहे होते हैं क्योंकि उनके परिवार का एकमात्र कमाऊ सदस्य जेल में होता है।"
अधिकारियों का कहना है कि इस समय उत्तर प्रदेश की जेलों में बंद कैदियों की प्रतिदिन की कुल आय 10 से 18 करोड़ रुपये है। नए काम की संभावना के कारण प्रत्येक कैदी महीने में 3000 से 4000 रुपये कमा सकेगा।
एक अन्य जेल अधिकारी ने कहा, "कैदियों के जेल में काम करने से उनके परिजनों को पैसा मिल जाता है। इसके अलावा वे इन पैसों से अपने लिए वकील की सेवाएं लेते हैं।"
मेरठ जिला जेल प्रशासन ने अपने कैदियों को खेल सामग्री के निर्माण के लिए जरूरी प्रशिक्षण की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
केसरवानी ने कहा, "प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत 27 जनवरी को हो चुकी है। हमारा लक्ष्य इस जेल में बंद अधिक से अधिक कैदियों को फायदा पहुंचाना है।"
"इसके लिए हमें कैदियों और खेल कम्पनियों से उत्साहजनक समर्थन मिला है। कैदी जहां प्रशिक्षण सत्र में हिस्सा लेने को आतुर दिख रहे हैं वहीं खेल सामग्री बनाने वाली कम्पनियां कामगारों की तलाश में हमारे यहां आ रही हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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