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अपनी तैयारी से संतुष्ट मोनिका

अनुभा रोहतगी

बीबीसी संवाददाता, दिल्ली

नई दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों में भारोत्तोलन में जिन खिलाड़ियों से पदक की उम्मीद है उनमें एल मोनिका देवी शामिल हैं.

अब जबकि खेलों में केवल कुछ दिन ही बाकी हैं, मोनिका देवी की तैयारियाँ भी अपने चरम पर पहुंच गई हैं.

मोनिका कहती हैं, "मेरी अच्छी तैयारी चल रही है. मेरी तकनीक पहले से बेहतर हो गई है. मैं चाहती हूं कि मेरा स्वर्ण पदक पाने का सपना पूरा हो जाए."

2006 मेलबर्न खेलों में मोनिका देवी ने 69 किलो वर्ग में रजत पदक जीता था. कोच हरनाम सिंह का कहना है कि इस बार भी उन्हें उसी वर्ग में उतारे जाने की योजना है.

हरनाम सिंह कहते हैं, "शारीरिक तौर पर तो मोनिका शुरू से ही फ़िट थीं लेकिन मानसिक रूप से हताश थी क्योंकि 2008 में बीजिंग ओलंपिक्स से पहले उन्हें डोपिंग का दोषी पाया गया था और उन पर प्रतिबंध लग गया था. उसके बाद से ये उसकी पहली प्रतियोगिता है. लेकिन अब हम देख रहे हैं कि वो मानसिक रुप से भी तैयार है."

लेकिन कोच को इस बात से शिकायत है कि मोनिका और बाकी भारोत्तोलकों को अब तक दिल्ली के जवाहरलाल नेहरु स्टेडियम में प्रैक्टिस करने का मौक़ा नहीं मिला है.

इसी स्टेडियम में भारोत्तोलन प्रतियोगिता होनी है. हरनाम सिंह कहते हैं, "हमें अपने ही देश में खेल होने का फ़ायदा नहीं मिल पा रहा है कि हम उस स्टेडियम में कुछ दिन तो प्रैक्टिस कर पाएँ."

लेकिन मोनिका देवी कहती हैं कि पटियाला के साई सेंटर, जहाँ वो तैयारी में जुटी हैं, वहाँ भी सभी सुविधाएँ हैं और उन्हें अपनी क़ाबिलियत पर पूरा भरोसा है.

2006 मेलबर्न राष्ट्रमंडल खेलों में 69 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीतने वाली भारतीय महिला भारोत्तोलक एल मोनिका देवी ने 1997 में इस खेल में क़दम रखा.

मणिपुर के विष्णुपुर ज़िले में रहने वाली मोनिका कहती हैं कि उन्हें शुरू से भारोत्तलन पसंद था और उनके घरवालों ने, ख़ासकर पिता ने भी उन्हें इसके लिए प्रोत्साहित किया.

राष्ट्रमंडल खेल भारत में हो रहे हैं और इसलिए मोनिका का सपना है कि वो अच्छा प्रदर्शन करके देश के लिए पदक जीतें.

एन कुंजारानी देवी और ओलंपिक पदक विजेता कर्णम मल्लेश्वरी जैसी महिला खिलाड़ियों का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतरीन प्रर्दशन के बावजूद अब भी भारोत्तोलन को लड़कों का खेल ही माना जाता है. लेकिन मोनिका मानती हैं कि भारतीय लड़कियों में लड़कों से ज़्यादा हिम्मत होती है.

Story first published: Tuesday, November 14, 2017, 12:44 [IST]
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