जय भगवान ने कहा बॉक्सिंग में हो रहा भेदभाव
इसकी तैयारी के लिए वे अगले हफ्ते ही करनाल स्थित मधुबन में वेट गेन के साथ प्रैक्टिस करने जाएंगे। जय भगवान पिछले दस सालों से 60 किलो भार वर्ग में ही खेलते थे। भारतीय बॉक्सरों में वह टॉप पर है तो वल्र्ड रैंकिंग में वह उनका 12वां स्थान है। आज सुबह घर लौटने के बाद उन्होंने लंदन ओलम्पिक की बातों और मुकाबले को साझा किया।
उन्होंने बताया कि इस ओलम्पिक में विश्व के सभी बॉक्सरों में भारतीय मुक्केबाजों का सबसे ज्यादा डर था। विश्व चैंपियन रह चुके क्यूबा देश से भी केवल 5 बॉक्सर आए थे और भारत से 7 बॉक्सरों का प्रतिनिधित्व महत्वपूर्ण माना जा रहा था। जब पहली गेम में ही हमारे साथी सांगवान के साथ भेदभाव होने की बात सामने आई तो उसके बाद से ही सभी बॉक्सरों का मनोबल कम होता जा रहा था।
हर कोई अपनी गेम को बहुत ही ध्यान से खेलने लगा। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसा नहीं था कि वहां भारतीय खिलाडिय़ों का मनोबल बढ़ाने के लिए वहां दर्शकों की कमी थी। एक मौका तो यह भी आया था कि अमेरिका के दर्शक भी इंडिया प्लेयर्स की जीत की हूटिंग करने लगे थे।
जय भगवान ने इस दौरान अपनी हार के दुखों और कारणों को भी बताया। वह कहते हैं कि बॉक्सिंग गेम भले ही बायचांस गेम न हो, मगर इस गेम में रिंग में खिलाड़ी का उस विशेष वक्त में क्या रणनीति है, उसका फैसला उसी वक्त करना होता है। पहले राउंड में उन्होंने अपने प्रतिद्वंदी को शिकस्त दे दी थी। दूसरे राउंड में जब वे अटैक करने लगे तो मुकाबले में प्रतिद्वंदी ने अपने लेफ्ट पंच के सहारे नीचे करने की कोशिश की। तभी उनको रेफ्री ने वार्निंग दी और उनके दो नंबर कट गए। इन्हीं नंबरों को कवर करने में ही वे रह गए। जय भगवान ने अपनी हार का दूसरा कारण 60 किलो भार वर्ग में मुकाबले का बताया।
उन्होंने कहा कि उनका इस वक्त वजन 60 से अधिक है, मगर खेल में 60 किलो भार वर्ग में खेलने के लिए उनको इस भार को कम भी करना था और खेल को बेहतर तरीके से खेलना था। अपना भार 60 से अधिक होते ही वे गेम से बाहर हो जाते। ऐसे में उन्होंने अपनी डाइट भी अपेक्षाकृत कम कर दी थी। सुबह भार अधिक न हो, इसके लिए वह रात को कुछ भी नहीं खाते थे।
एक बार तो उन्होंने पूरा दिन केवल एक बार ही डाइट ली। वह बताते हैं कि डाइटिशियन ने भी डाइट सुनकर हैरानी व्यक्त की थी। उन्होंने यह भी बताया कि एक साथ सात दिन से भी अधिक समय तक 60 किलो भार को कायम रखना भी उनके लिए एक मुख्य परीक्षा थी। ऐसे में उनके शरीर में भी ताकत अपेक्षाकृत कम हो गई थी। उन्होंने बताया कि वे शुक्रवार दोपहर को लंदन से दिल्ली लौटे। यहां से वे अपनी मंगेतर के पास गए और उससे मुलाकात की। निराशा थी, मगर मंगेतर ने हिम्मत देते हुए यही कहा कि तो क्या हुआ, मैं एक ओलम्पियन की वाइफ तो हूं। मेडल तो अबकी बार जा जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि वे इस साल की दीवाली के आस-पास ही शादी कर लेंगे।
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