Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block

सम्मिलित प्रयासों से मिली कानपुर टेस्ट में विजय

नई दिल्ली, 27 नवंबर (आईएएनएस)। ऐतिहासिक ग्रीन पार्क स्टेडियम शुक्रवार को भारतीय क्रिकेट टीम के लिए टेस्ट मैचों में पारी के लिहाज से तीसरी सबसे बड़ी जीत का गवाह बना। मैच के चौथे दिन श्रीलंकाई टीम को एक पारी और 144 रनों से पराजित करने के साथ भारतीय टीम ने टेस्ट मैचों में अपनी 100वीं जीत हासिल की। भारतीय टीम ने 1952 विजय हजारे की कप्तानी में इंग्लैंड के खिलाफ पहली जीत हासिल की थी।

ग्रीन पार्क की घासयुक्त विकेट पर टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम ने सलामी बल्लेबाज गौतम गंभीर (167), विस्फोटक वीरेंद्र सहवाग (131), मिस्टर भरोसेमंद राहुल द्रविड़ (144) के शानदार शतकों की मदद से अपनी पहली पारी में 642 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया था। भारत की ओर से कलात्मक बल्लेबाज वी.वी.एस. लक्ष्मण ने 63 और युवराज सिंह ने 67 रनों का योगदान दिया था। सचिन तेंदुलकर ने भी 40 रन बनाए।

गंभीर ने पिछले नौ मैचों में सातवां शतक जड़ा। उन्होंने अहमदाबाद में भी शतक लगाया था। यही नहीं, गंभीर के बल्ले से लगातार चौथा शतक निकला। इससे पहले भारत के लिए द्रविड़ और सुनील गावस्कर ही यह कारनामा कर चुके थे। दूसरी ओर, द्रविड़ ने अपनी शतकीय पारी के दौरान टेस्ट रनों की दौड़ में आस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान एलन बॉर्डर को पीछे छोड़ा। इसके साथ द्रविड़ सर्वाधिक टेस्ट रन बनाने वालों की सूची में चौथे क्रम पर पहुंच गए।

बीते बुधवार को अपने करियर का 28वां शतक लगाने के साथ ही द्रविड़ ने 136वें टेस्ट मैच में 11182 रन पूरे कर लिए। वह बॉर्डर 11174 से आठ रन अधिक अपने खाते में जुटा चुके हैं। बॉर्डर ने 156 टेस्ट मैच खेले हैं। टेस्ट मैचों में सर्वाधिक रन बनाने का रिकार्ड भारत के सचिन तेंदुलकर के नाम है। तेंदुलकर ने 161 मैचों में 12917 रन बनाए हैं। इस फेहरिस्त में वेस्टइंडीज के ब्रायन लारा (131 टेस्ट, 11953 रन) दूसरे और आस्ट्रेलियाई कप्तान रिकी पोंटिंग (136 टेस्ट, 11345 रन) तीसरे क्रम पर हैं।

टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में अब तक 8 बल्लेबाजों ने 10 हजार या उससे अधिक रन बटोरे हैं। इस मुकाम पर सबसे पहले पहुंचने का श्रेय भारत के महान सलामी बल्लेबाज सुनील गावस्कर को जाता है, जिन्होंने 1987 में ही 10 हजार रन पूरे कर लिए थे। तेंदुलकर, लारा, पोंटिंग, द्रविड़ और बॉर्डर के अलावा 10 हजार का आंकड़ा पार करने वालों में आस्ट्रेलिया के स्टीव वॉ (168 टेस्ट, 10929 रन), दक्षिण अफ्रीका के जैक्स कैलिस (131 टेस्ट, 10277 रन) और गावस्कर (125 टेस्ट, 10122 रन) शामिल हैं।

बहरहाल, जवाब में खेलने उतरी श्रीलंकाई टीम भारत के बड़े योग के दबाव में अपनी पहली पारी में सिर्फ 229 रन बना सकी। इसका कारण यह था कि लगभग 18 महीने बाद अपना पहला टेस्ट मैच खेल रहे तेज गेंदबाज शांताकुमारन श्रीसंत ने पांच विकेट झटकर मेहमान टीम की कमर तोड़ दी। अनुशासनहीनता के मामलों के कारण चर्चा में रहने वाले श्रीसंत ने एक बार फिर साबित किया कि वह टेस्ट मैचो में हमेशा से भारत के लिए उपयोगी गेंदबाज रहे हैं।

पहली पारी में सस्ते में सिमटने के कारण श्रीलंकाई टीम को फॉलोऑन खेलना पड़ा था। उसके सामने पारी की हार बचाने के लिए 413 रनों के विशाल योग को लांघने की चुनौती थी लेकिन भारतीय गेंदबाजों ने एक बार फिर अनुशासित और नियंत्रित गेंदबाजी करते हुए मैच के चौथे दिन मेहमान टीम को 269 रनों के कुल योग पर ढेर कर दिया।

श्रीलंकाई टीम ने मैच के तीसरे दिन का खेल खत्म होने तक चार विकेट गंवाकर 57 रन बनाए थे। तीसरे दिन ही भारतीय टीम की पारी की जीत पक्की हो चुकी थी लेकिन इस सत्र में सबसे अधिक रन बनाने वाले बल्लेबाजों में एक थिलन समरवीरा (नाबाद 78) के नेतृत्व में विकेटकीपर बल्लेबाज प्रसन्ना जयवर्धने (29), मुथैया मुरलीधरन (29) और असंथा मेंडिस (27) ने उपयोगी साझेदारियां निभाकर भारत को दूसरे सत्र के अंत तक इंतजार कराया।

अपना पहला टेस्ट मैच खेल रहे लेग स्पिनर प्रज्ञान ओझा की गेंद पर चनाका वेलेगेदारा (4) का विकेट गिरते ही भारत ने शानदार जीत हासिल की। इस तरह भारतीय टीम ने यह मैच एक पारी और 144 रन के अंतर से अपने नाम कर तीसरी बड़ी जीत हासिल की। भारतीय टीम की ओर से दूसरी पारी में हरभजन सिंह ने तीन, ओझा ने दो तथा जहीर खान, श्रीसंत, सहवाग और युवराज ने एक-एक सफलता हासिल की। हरभजन ने मैच में पांच विकेट झटके जबकि श्रीसंत के खाते में छह और ओझा के खाते में चार विकेट आए। श्रीसंत को 'मैन ऑफ द मैच' चुना गया।

भारतीय टीम ने 25 मई, 2007 को ढाका में बांग्लादेश को पारी और 239 रनों से पराजित किया था। टेस्ट मैचों में पारी के अंतर से यह उसकी अब तक की सबसे बड़ी जीत है। इससे पहले 1998 में भारतीय टीम ने कोलकाता में खेले गए ऐतिहासिक टेस्ट मैच में स्टीव वॉ की कप्तानी में खेलने आई आस्ट्रेलियाई टीम को पारी और 219 रनों से पराजित किया था।

1952 में इंग्लैंड के खिलाफ अपनी पहली टेस्ट जीत हासिल करने वाली भारतीय टीम ने अब तक कुल 26 मौकों पर पारी के अंतर से जीत हासिल की है। इसमें से सात मौकों पर उसने श्रीलंका को धूल चटाई है। श्रीलंका के खिलाफ 31 मैचों में भारत की यह 12वीं जीत है। पांच मौकों पर श्रीलंका ने जीत हासिल की है जबकि 14 मुकाबले बराबरी पर छूटे हैं। दोनों टीमों के बीच पहला टेस्ट मैच 1982 में खेला गया था।

वर्ष 2008 में कानपुर से ही कप्तानी की पारी शुरू करने वाले महेंद्र सिंह धौनी ने अपने नेतृत्व में भारतीय टीम को नौवें मैच में छठी जीत दिलाई। खास बात यह है कि धौनी की कप्तानी में भारतीय टीम ने एक भी मैच नहीं गंवाया है। तीन मैच बराबरी पर छूटे हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

**

Story first published: Tuesday, November 14, 2017, 12:27 [IST]
Other articles published on Nov 14, 2017
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+