सोच-समझकर लेना होगा ओलंपिक मेजबानी का फैसला : गिल
राष्ट्रीय राजधानी अगले वर्ष तीन से 14 अक्टूबर तक होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों के आयोजन की तैयारियों के मद्देनजर राज्यसभा में लाए गए एक ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जवाब में गिल ने कहा, "मैं नहीं समझता कि भारत को ओलंपिक की मेजबानी के बारे में सोचना चाहिए। इस मुद्दे को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।"
ओलंपिक की मेजबानी की दावेदारी को लेकर ओलंपिक संघ और खेल मंत्रालय के बीच विवाद की आशंका जताते हुए गिल ने कहा, "कुछ लोग मनोरंजन चाहते हैं। ये ऐसे लोग हैं, जिन्हें खेल और मनोरंजन पसंद हैं। मनोरंजन की बात भूलकर हमें गंभीरतापूर्वक यह सोचना होगा कि क्या हम ओलंपिक की मेजबानी की कुव्वत रखते हैं।"
ओलंपिक जैसे बड़े खेल आयोजन के लिए सरकार का सहयोग और समर्थन अनिवार्य है। भारतीय ओलंपिक संघ किसी खेल आयोजन के लिए आयोजन समिति का गठन करता है लेकिन मूलभूत सुविधाएं तैयार करने की जिम्मेदारी सरकार की होती है। 1982 में आयोजित एशियाई खेलों के दौरान भी यही हुआ था और अगले वर्ष होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों के मद्देनजर भी यही हालात हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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