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मैडम तुसाद संग्रहालय में अपना स्टेच्यू देखकर इमोशनल हुए मिल्खा सिंह को याद आई जवानी...

नई दिल्ली। भारत की शान एथलीट मिल्खा सिंह देश के पहले मैडम तुसाद संग्रहालय में नजर आएंगे। मिल्खा सिंह के पुतले को एक दिसंबर से दिल्ली में खुल रहे मैडम तुसाद मोम संग्रहालय में लगाया जाएगा। अपने पुतले देखकर मिल्खा सिंह काफी भावुक हो गए और उन्हें अपना गुजरा जमाना याद आ गया। फ्लाइंग सिख के नाम से मशहूर 85 वर्ष के मिल्खा सिंह ने कहा, 'यह बड़ी बात हैं। शायद मैं 2 साल और जिंदा रहूं, लेकिन मेरे निधन के बाद भी यह पुतला लोगों को प्रेरित करेगा।

1958 के राष्ट्रीयमंडल खेल

1958 के राष्ट्रीयमंडल खेल

आपको बता दें कि संग्रहालय के खेल क्षेत्र में लगने वाले पुतले में मिल्खा सिंह दौड़ते हुए दिखेंगे। इस मुद्रा (पोज) को 1958 के राष्ट्रीयमंडल खेलों से लिया गया है जिसमें वह विजेता रहे थे।

मेहनत की जरूरत

मेहनत की जरूरत

मिल्खा ने कहा हर कोई मिल्खा बन सकता हैं, बस लक्ष्य पर फोकस और मेहनत की जरूरत है। मैं इस प्रतिमा के सामने यही कहना चाहता हूं कि मेहनत ही सब कुछ है।

हाथ की लकीरों से जिंदगी नहीं बनती...

हाथ की लकीरों से जिंदगी नहीं बनती...

एक शेर है कि हाथ की लकीरों से जिंदगी नहीं बनती, अज़म हमारा भी कुछ हिस्सा है जिंदगी बनाने में। मैंने कभी हाथ की लकीरें नहीं देखी। रोम ओलंपिक (1960) में मेडल से चूकना मुझे आज भी खलता है।

बस गोल्ड ले आए...बस

बस गोल्ड ले आए...बस

मुझे जिंदगी ने सब कुछ मिला, अब बस एक खिलाड़ी चाहिए जो देश के लिए गोल्ड ले आए। एक मेडल मेरे हाथों से ओलंपिक में छूट गया था, वह दर्द आज तक मुझे है। अगर ये ख्वाब पूरा हो जाता हैं तो कोई इच्छा बाकी नहीं रहेगी।

Story first published: Tuesday, November 14, 2017, 13:02 [IST]
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