Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block

'टेस्ट की क़ब्र खोदने की साजिश'

प्रदीप मैगज़ीन

वरिष्ठ खेल पत्रकार

अहमदाबाद की मोटेरा की पिच. भारत-श्रीलंका पहले टेस्ट का पहला घंटा. ज़बर्दस्त नाटकीय उतार-चढ़ाव जो टेस्ट क्रिकेट को इतना सम्मोहक बना देता है.

तेज़ और स्विंग के आगे नतमस्तक हुए शुरुआती बल्लेबाज़. हालांकि इसमें उनका अपना योगदान भी उतना ही कहा जाएगा. इसके बाद बल्लेबाज़ों की ज़बर्दस्त वापसी मानो शुरुआती झटकों को दरकिनार कर संतुलन बल्लेबाज़ों के पक्ष में हो गया हो.

जितनी तेजी से विकटे गिरे, उतनी ही तेजी से बाद के बल्लेबाज़ों ने रन बटोरे और इसने मुक़ाबले को दर्शनीय बना दिया.

लेकिन पाँच दिन बाद क्या? ये टेस्ट मैच रनों के पहाड़, रिकॉर्ड और शतकों के तले दब कर रह गया. निश्चित रूप से इस पिच ने बल्लेबाज़ों को अपना बैटिंग औसत सुधारने में मदद की लेकिन क्रिकेटप्रेमियों के लिए कुछ नहीं बचा और गेंदबाज़ों के तो मानो आँखों में आँसू आ गए.

इसे टेस्ट क्रिकेट का दुखद विज्ञापन कहिए जिसके अंत की कहानियाँ पहले से गढ़ी जा रही है और अहमदाबाद जैसा मुक़ाबला इसकी ताबूत में अंतिम कील साबित हो सकता है.

इसने दर्शकों के धैर्य की परीक्षा ली और गेंदबाज़ों को सोचने पर विवश किया कि उनकी ज़रूरत है भी या नहीं.

एक साजिश

अमूमन यही लग रहा है कि भारत में टेस्ट क्रिकेट को समाप्त करने की साजिश हो रही है. क्रिकेट अधिकारियों के लिए मानों ये बिना मतलब का बोझ साबित हो रहा है जो जितनी जल्दी मर जाए उतना बेहतर ताकि आईपीएल और चैम्पियंस लीग जैसे टूर्नामेंट को फैलाया जा सके.

अगर ये अतिशयोक्ति है तो भारत लगभग एक साल बाद टेस्ट मैच क्यों खेल रहा है? और ये जानते हुए भी कि टेस्ट में दर्शकों का रुझान कम हो रहा है, मैच सोमवार से शुक्रवार तक खेलाने का क्या औचित्य है जब पता है कि सप्ताहांत में ज़्यादा दर्शक जुटेंगे.

लेकिन टेस्ट क्रिकेट की सबसे बड़ी पीड़ा मोटेरा जैसी विकटें हैं जो गेंदबाज़ों की क़ब्र का काम करती हैं और बल्लेबाज़ों के लिए रन मशीन का. कुछ खो जाता है तो वो है रोचक मुक़ाबला.

हमने हाल ही में ऑस्ट्रेलिया-इंग्लैंड के बीच रोमांचकारी टेस्ट सिरीज़ देखा. जहां न सिर्फ़ दर्शक स्टेडियम में आए बल्कि टेलीविज़न से भी चिपके रहे.

ये शर्मनाक है कि दुनिया के धनी क्रिकेट बोर्ड पाँच दिवसीय क्रिकेट को रोमांचक बनाने की बजाए इसे हल्के फुल्के ढंग से ले रहे हैं जो उन लोगों के तर्क को मज़बूती देगा जो टेस्ट क्रिकेट के भविष्य से इत्तेफाक नहीं रखते.

यही कारण है कि बोर्ड खेल के इन अहम पहलुओं को नज़रअंदाज़ कर रहा है. वे अपने को मार्केटिंग उस्ताद कहते हैं लेकिन जब टेस्ट क्रिकेट की बात आती है तो वे इसके साथ अनाथ बच्चे की तरह व्यवहार करते हैं जिसे कोई भी अपनाना नहीं चाहता.

अहमदाबाद टेस्ट के पहले दिन राहुल द्रविड़ ने पिछले दो वर्षों की सबसे बेहतरीन पारी खेली और भारत को मुश्किल स्थिति से निकाल दिया. अंतिम दिन सचिन ने शतक लगाकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में बीस साल पूरे होने का जश्न मनाया.

लेकिन जिस तरह भारतीय बोर्ड टेस्ट की धीमी मौत का इंतज़ार कर रहा है उससे इन खिलाड़ियों को दुख होगा और ठेस भी पहुँचेगी.

(लेखक हिंदुस्तान टाइम्स के खेल सलाहकार हैं)

Story first published: Tuesday, November 14, 2017, 12:27 [IST]
Other articles published on Nov 14, 2017
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+