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जीत के इरादे से उतरेंगी दोनों टीमें

भारत ने इस मैदान पर अब तक छह एकदिवसीय मुकाबले खेले हैं जिसमें दो में उसे जीत मिली है जबकि चार मैचों में उसे हार का सामना करना पड़ा है। इस लिहाज से देखा जाए तो इस मैदान पर दक्षिण अफ्रीका का पलड़ा भारी है।

दक्षिण अफ्रीका ने 1992 में खेले गए एकदिवसीय मुकाबले में भारत को इस मैदान पर 39 रनों से हराया था जबकि 1997 में खेले गए मुकाबले में भारत को मेजबान टीम के हाथों 17 रनों से शिकस्त खानी पड़ी थी।

भारत को 2001 में खेले गए मुकाबले में दक्षिण अफ्रीका के हाथों छह विकेट से शिकस्त झेलनी पड़ी थी जबकि 2006 में भारत को 157 रनों से करारी हार का सामना करना पड़ा था।

भारतीय टीम ने 2003 में खेले गए विश्व कप में इंग्लैंड को 82 रनों से जबकि केन्या को 91 रनों से पराजित किया था।

भारत ने हाल में संपन्न तीन टेस्ट मैचों की श्रृंखला के दूसरे टेस्ट मैच में दक्षिण अफ्रीका को किंग्समीड मैदान पर 87 रनों से हराया था और इसके बाद खेले गए अंतिम और निर्णायक टेस्ट मैच को वह ड्रा कराने में सफल रहा था। इस प्रकार दक्षिण अफ्रीका में भारत ने पहली बार टेस्ट श्रृंखला ड्रा कराने में सफलता हासिल की। जबकि डरबन के मोसेस माहिदा स्टेडियम में खेले गए एकमात्र ट्वेंटी-20 मैच में मेहमान टीम ने मेजबानों को 21 रनों से शिकस्त दी थी। लिहाजा, भारतीय टीम के हौंसले बुलंद है और उम्मीद की जा रही है कि वह अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन् जारी रखेगी।

भारतीय टीम की उम्मीदें एक बार फिर सचिन तेंदुलकर से होगी जिन्होंने हाल ही में अपने टेस्ट करियर का 51वां शतक लगाया था। तेंदुलकर इस समय शानदार फॉर्म में हैं।

तेंदुलकर ने अपना अंतिम एकदिवसीय मैच पिछले वर्ष फरवरी में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेला था। इस मैदान पर तेंदुलकर ने अब तक सात मैच खेले हैं जिसमें उन्होंने 40.71 की औसत से 285 रन बनाए हैं। तेंदुलकर का सर्वश्रेष्ठ व्यक्तिगत स्कोर 83 रन रहा है।

भारत की ओर से तेज गेंदबाज जहीर खान ने यहां पांच मैच खेले हैं जिसमें उन्होंने 12.30 की औसत से 13 विकेट झटके हैं। जहीर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 14 रन खर्च कर तीन विकेट का रहा है।

आशीष नेहरा ने चार मैचों में 10.77 की औसत से नौ विकेट चटकाए हैं। नेहरा का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 23 रन खर्च कर छह विकेट का रहा है जो उन्होंने 2003 में विश्व कप में इंग्लैंड के खिलाफ हासिल किए थे।

भारतीय टीम के लिए विश्व कप की तैयारियों के लिए यह अंतिम मौका है। गौतम गम्भीर और वीरेंद्र सहवाग के चोटिल होने के कारण सलामी जोड़ी की जिम्मेदारी तेंदुलकर और मुरली विजय के कंधों पर होगी।

मध्यक्रम की जिम्मेदारी सुरेश रैना, विराट कोहली और युवराज सिंह के कंधों पर होगी वहीं कप्तान महेंद्र सिंह धौनी भी एक बड़ी पारी खेलना चाहेंगे। खराब फॉर्म में चल रहे युवराज सिंह पर सबकी निगाहें होंगी।

तेज गेंदबाजी का दारोमदार जहीर खान, आशीष नेहरा और शांताकुमारन श्रीसंत के कंधों पर होगी वहीं स्पिन की जिम्मेदार हरभजन सिंह सम्भालेंगे।

दूसरी ओर, शानदार फॉर्म में चल रहे हरफनमौला जैक्स कैलिस के चोटिल होने के कारण दक्षिण अफ्रीकी टीम को गहरा झटका लगा है।

दक्षिण अफ्रीका की ओर से कप्तान ग्रीम स्मिथ, अब्राहम डिविलियर्स और जेपी ड्यूमिनी के कंधों पर बल्लेबाजी का दारोमदार रहेगा वहीं मध्यक्रम में जबरदस्त फॉर्म में चल रहे हाशिम अमला टीम को मजबूती प्रदान करेंगे।

तेज गेंदबाजी आक्रमण में डेल स्टेन और मोर्न मोर्कल की जोड़ी से स्मिथ को काफी उम्मीदें होंगी। इसके अलावा वायने पार्नेल भी शानदार प्रदर्शन कर विश्व कप टीम में जगह पाने की अपनी दावेदारी पेश करने की कोशिश करेंगे वहीं स्पिन की जिम्मेदारी पाकिस्तान मूल के गेंदबाज इमरान ताहिर के कंधों पर होगी जो इस मैच के द्वारा अंतर्राष्ट्रीय एकदिवसीय क्रिकेट में पर्दापण करेंगे।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

Story first published: Tuesday, January 11, 2011, 16:25 [IST]
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