धौनी व द्रविड़ का शतक, भारत ने बनाए 385 रन (लीड-5)
पहले दिन का खेल खत्म होने तक द्रविड़ 177 रन बनाकर मैदान पर डटे हुए थे जबकि हरभजन सिंह उनका साथ दे रहे थे। वह दो रन बनाकर नाबाद थे। द्रविड़ ने 177 रनों की अपनी इस पारी के दौरान 251 गेंदों का सामना किया और 26 चौके तथा एक छक्का लगाया। उन्होंने पांचवें विकेट के लिए युवराज सिंह के साथ 125 रनों की और छठे विकेट के लिए धौनी के साथ 224 रनों महत्वपूर्ण साझेदारियां की।
द्रविड़ ने आज अपने टेस्ट करियर के 11,000 रन भी पूरे किए। इसके साथ ही पूर्व आस्ट्रेलियाई कप्तान स्टीव वॉ को पीछे छोड़ते हुए वह टेस्ट करियर में सर्वाधिक रन बनाने वाले खिलाड़ियों की सूची में पांचवें स्थान पर पहुंच गए। द्रविड़ से पहले 11,000 रनों का आंकड़ा पार करने बल्लेबाजों की सूची में सबसे ऊपर मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर (12,777) हैं। उनके बाद क्रमश: वेस्टइंडीज के पूर्व कप्तान ब्रायन लारा (11,953), आस्ट्रेलियाई कप्तान रिकी पोटिंग (11,345) और पूर्व आस्ट्रेलियाई कप्तान एलन बार्डर (11,174) हैं।
टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम ने खेल के पहले सत्र में ही महज 32 रनों पर अपने चार अहम बल्लेबाजों के विकेट गंवा दिए थे। इसके बाद युवराज सिंह ने द्रविड़ के साथ मिलकर पारी को संभाला। उनके और द्रविड़ के बीच 125 रनों की साझेदारी हुई। युवराज 68 रनों के निजी स्कोर पर पेवेलियन लौटे। उनका विकेट मुथैया मुरलीधरन के खाते में गया।
युवराज के आउट होने के बाद धौनी ने द्रविड़ के साथ संभलकर खेलते हुए भारतीय पारी को संवारा। पहले द्रविड़ ने शतक लगाया और उसके बाद धौनी ने भी शतक जड़ा। छठे विकेट के लिए दोनों के बीच 224 रनों की महत्वूपर्ण साझेदारी हुई।
द्रविड़ ने 158 गेंदों पर अपने टेस्ट करियर का 27वां टेस्ट शतक पूरा किया। इस दौरान उन्होंने 14 चौके और एक छक्का लगाया। धौनी ने अपनी शतकीय पारी के दौरान 159 गेंदों का सामना किया तथा आठ चौके व एक छक्का लगाया। शतक लगाने के बाद अगली ही गेंद पर वह आउट हो गए। उन्हें धम्मिका प्रसाद ने अपना शिकार बनाया।
टीम के खाते में अभी 14 रन ही जुड़े थे कि उसे सलामी बल्लेबाज गौतम गंभीर के रूप में पहला झटका लगा। वह महज एक रन बनाकर चनाका वेलेगेदारा की गेंद पर बोल्ड हो गए।
गंभीर के पेवेलियन लौटने के बाद वीरेंद्र सहवाग भी ज्यादा देर तक मैदान पर नहीं टिक सके। वह भी 11 रन बनाकर वेलेगेदारा की गेंद पर आउट हो गए। उनके बाद अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में 20 वर्ष पूरा करने वाले सचिन तेंदुलकर भी चार रनों के व्यक्तिगत स्कोर पर वेलेगेदारा का शिकार बन गए।
सचिन के बाद वी.वी.एस. लक्ष्मण ने भी पेवेलियन की राह पकड़ी। वह धम्मिका प्रसाद की गेंद पर बिना खाता खोले ही बोल्ड हो गए।
श्रीलंका की ओर से वेलेगेदारा सबसे सफल गेंदबाज रहे। उन्होंने भारत के तीन बल्लेबाजों को पेवेलियन की राह दिखाई। प्रसाद ने दो और मुरलीधरन ने एक विकेट हासिल किए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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