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कब तक चलेगी इंडियन एक्सप्रेस

पंकज प्रियदर्शी

बीबीसी संवाददाता, दिल्ली

ऑस्ट्रेलियन ओपन टेनिस के दूसरे दौर के मैच के दौरान लिएंडर पेस के लिए विपक्षी खिलाड़ियों से महेश भूपति का भिड़ जाना- मेरे लिए काफ़ी सुखद था.

लंबे समय बाद भारतीय टेनिस प्रेमी पेस-भूपति को किसी ग्रैंड स्लैम मुक़ाबले में खेलते देख रहे हैं और एक-दूसरे के लिए उनका ये रुख़ और भी सकारात्मक नज़र आता है.

लेकिन वर्षों बाद साथ आई इस जोड़ी ने सवाल भी खड़े किए हैं. क्यों आए हैं ये साथ...कितने दिनों का साथ है. लंबी नाक वाले दोनों खिलाड़ी कितने दिनों तक एक-दूसरे को झेलते हैं.

क़रीब चार साल पहले की बात है. दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित ग्रैंड स्लैम प्रतियोगिता विंबलडन कवर करने का मौक़ा मिला था.

टेनिस की दुनिया कितनी प्रतियोगी हो गई है, इसका अहसास विंबलडन कैम्पस में शीर्ष खिलाड़ियों को अनवरत प्रैक्टिस करते देखकर हुआ था.

क्या रफ़ाएल नडाल, क्या रोजर फ़ेडरर, विलियम्स बहनें या फिर मारिया शरापोवा. सब के सब जी-जान लगाए बैठे थे. शीर्ष खिलाड़ी, ज़बरदस्त मैच और उलटफेर वाले नतीजे.

इन सबके बीच सच पूछिए तो निगाहें भारतीय टेनिस सितारों को ढूँढ़ती रहती थी. वो चाहे लिएंडर पेस हों, महेश भूपति हों या फिर सानिया मिर्ज़ा.

एक-एक करके भारतीय चुनौती टूटती गई और फिर मुँह लटकाए भारतीय समर्थक को देखकर मुझे भी काफ़ी निराशा हुई. उसी दौरान मुझे महेश भूपति और लिएंडर पेस दोनों से अलग-अलग बात करने का मौक़ा मिला था.

उस समय पेस ने स्पष्ट कर दिया था कि उनका महेश भूपति के साथ खेलना संभव नहीं. तो भूपति ने यहाँ तक कह दिया कि पेस के साथ जोड़ी टूटने का ग़म नहीं.

इन सबसे अलग एक टेनिस प्रेमी होने के नाते जो बात पूरी प्रतियोगिता के दौरान खलती रही, वो थी भारतीय टेनिस का दो खेमे में बँटा हुआ दिखना. एक खेमा भूपति, सानिया और बाक़ी खिलाड़ियों का था, तो बिंदास लिएंडर पेस को किसी की फ़िक्र नहीं रहती थी.

पेस के मैच के दौरान कभी भी कोई भारतीय टेनिस खिलाड़ी मैच देखने नहीं आता था, तो भूपति के मैच में लगभग सभी खिलाड़ी मौजूद रहते. शायद इसी कारण लिएंडर पेस की कप्तानी को लेकर हुई बग़ावत पर मुझे कोई ख़ास आश्चर्य नहीं हुआ.

लेकिन अब नई प्रगति हुई है. साल के शुरू में चेन्नई ओपन के बाद भारतीय जोड़ी साल के पहले ग्रैंड स्लैम में भी साथ उतरी है.

नौ साल बाद दोनों किसी ग्रैंड स्लैम में साथ खेले हैं

नौ साल बाद पेस और भूपति किसी ग्रैंड स्लैम में साथ उतरे हैं. बीच-बीच में वे डेविस कप, एशियन गेम्स और ओलंपिक में ज़रूर साथ-साथ खेले हैं, लेकिन देश के नाम पर.

अब वे साथ आए हैं. अच्छा है. वे चेन्नई ओपन जीत भी गए हैं. ऑस्ट्रेलियन ओपन में कहाँ तक जाएँगे, पता नहीं. लेकिन सच ये है कि दोनों खिलाड़ियों के बीच मतभेद पुराने हैं. दोनों खिलाड़ियों की नाक भी बड़ी है.

जानकार बताते हैं कि उम्र के इस दौर में उनका साथ-साथ आना उनकी मजबूरी है. दरअसल दोनों खिलाड़ी अलग तो हो गए और कई ख़िताब भी जीते. लेकिन दोनों खिलाड़ी अपने साथी खिलाड़ियों से लंबे समय तक ताल-मेल नहीं बना पाए.

एक समय एक-दूसरे के बारे में बोलने से इनकार करने वाले पेस और भूपति साथ खेल रहे हैं. दोनों साथ-साथ तीन ग्रैंड स्लैम जीत चुके हैं. लिएंडर पेस ने अपने करियर में कुल 12 ग्रैंड स्लैम खिताब जीते हैं, तो भूपति भी 11 ख़िताब के साथ ज़्यादा पीछे नहीं हैं.

टेनिस कोर्ट पर एक ज़बरदस्त सर्विस करता है तो एक की बॉली बेहतरीन है. लेकिन उम्र के सुनहरे दौर में इन दोनों खिलाड़ियों का पेशेवर टेनिस में लंबे समय तक अलग-अलग खेलना एक अहम सवाल करता है.

क्या ये भारतीय टेनिस के साथ अन्याय था? सवाल ये भी है कि नाक की लड़ाई वाले अलगाव के बाद कितने दिनों तक ये इंडियन एक्सप्रेस पटरी पर दौड़ेगी.

Story first published: Tuesday, November 14, 2017, 12:55 [IST]
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