क्रिकेट विश्व कप : श्रीलंका में है फाइनल में पहुंचने का दम
सबसे पहले बात हालात की। श्रीलंका भी आगामी विश्व कप का मेजबान है और इस कारण उसके पास अपने घर में खेलते हुए परिस्थितियों का भरपूर फायदा उठाने का शानदार मौका है। श्रीलंका के कई खिलाड़ी ऐसे हैं, जिन्होंने घरेलू हालात में विश्वस्तरीय प्रदर्शन किया है। मुथैया मुरलीधरन और माहेला जयवर्धने इनमें प्रमुख हैं।
श्रीलंकाई गेंदबाजी का दारोमदार काफी हद तक मुरलीधरन और लसिथ मलिंगा पर रहेगा, जिन्हें आज की तारीख में सबसे खतरनाक यार्कर गेंदों का मालिक कहा जाता है। शुरुआती और अंतिम ओवरों में मलिंगा की विकेट चटकाने की कला श्रीलंकाई टीम के लिए वरदान साबित होगी।
मुरलीधरन अपना आखिरी विश्व कप खेल रहे हैं। इससे उत्साहित श्रीलंकाई टीम उन्हें जीत का तोहफा देना चाहेगी। ठीक उसी तरह जैसे भारतीय टीम सचिन तेंदुलकर को जीत का तोहफा देने को आतुर है। मुरलीधरन और तेंदुलकर में हालांकि एक अंतर है। मुरली 1996 में विश्व कप जीतने वाली टीम का हिस्सा रहे हैं लेकिन तेंदुलकर को अभी तक इसके लिए इंतजार करना पड़ रहा है।
बल्लेबाजी में श्रीलंकाई टीम का दारोमदार मुख्य रूप से उपुल थरंगा, कप्तान कुमार संगकारा, जयवर्धने, थिलन समरवीरा और तिलकरत्ने दिलशान पर होगा। सनत जयसूर्या की शैली में खेलने वाले दिलशान हालात अनुकूल होने के बाद उनसे कहीं अधिक खतरनाक साबित हो सकते हैं क्योंकि उनके स्ट्रोक में विविधता है।
संगकारा और जयवर्धने विश्वस्तरीय खिलाड़ी हैं। दोनों ने एक नहीं बल्कि अनेक मौकों पर साबित किया है कि वे अपने बूते टीम को मैच जिता सकते हैं। संगकारा जहां एक शानदार विकेटकीपर हैं वहीं बल्लेबाजी में वह अपने साथियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहे हैं। जयवर्धने की तरह उनके पास भी एक दशक का अनुभव है और यह अनुभव टीम के काफी काम आएगा।
सबसे अहम बात यह है कि श्रीलंका के पास विश्व क्रिकेट का सबसे प्रतिभाशाली हरफनमौला खिलाड़ी है। एंजेलो मैथ्यूज के रूप में श्रीलंका के पास एक ऐसा खिलाड़ी है जो 100 फीसदी समर्पण के साथ अपनी टीम की जीत की नैया पार कराने में लगा रहता है।
कप्तान संगकारा कई मौकों पर मैथ्यूज की जाबांजी की तारीफ कर चुके हैं और साथ ही यह भी कह चुके हैं कि मैथ्यूज के रूप में उनके पास एक ऐसा खिलाड़ी है जो बल्लेबाजी के वक्त किसी भी टीम की गेंदबाजी आक्रमण की बखिया उधेड़ सकता है और गेंदबाजी के दौरान किसी भी टीम को सस्ते में निपटा सकता है।
एक बात श्रीलंकाई टीम को उपमहाद्वीप की दूसरी टीमों से अलग करती है और वह है क्षेत्ररक्षण। श्रीलंकाई 'चीते' क्षेत्ररक्षण की कला में माहिर हैं और इस विभाग में उसे भारत की तुलना में बीस आंका जा सकता है। श्रीलंकाई टीम का क्षेत्ररक्षण दक्षिण अफ्रीका के समतुल्य है, जिसे आज की तारीख में खिताब का प्रबल दावेदार माना जा रहा है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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