आजाद ने कहा कि बैठक में बीते रविवार को भारत-श्रीलंका मैच के रद्द होने के संदर्भ में उन्होंने सवाल पूछना चाहा तो उन्हें रोका गया। उल्लेखनीय है कि फिरोजशाह कोटला मैदान की पिच की दयनीय हालत की वजह से यह मैच रद्द करना पड़ा था।
बैठक से बाहर निकलने के बाद आजाद ने पहले कहा था कि उनके साथ दुर्व्यहार हुआ लेकिन इसके तत्काल बाद ही उन्होंने कहा कि उन्हें केवल अपनी बात रखने से रोका गया और जिन लोगों ने उनका साथ दिया उनके साथ हाथापाई की गई।
डीडीसीए के खेल सचिव सुनील देव ने आजाद के आरोप को खारिज कर दिया और चुनौती दी कि वह साबित करें कि उनके साथ हाथापाई की गई।
देव ने कहा, "अगर यह साबित हो जाता है कि कीर्ति के साथ हाथापाई की गई तो मैं डीडीसीए छोड़ दूंगा। सच यह है कि बैठक से बाहर आने से पहले वह एक बार नहीं बल्कि चार बार बोले।"
उधर, बैठक से बाहर निकलने वाले आजाद ने कहा, "मेरे साथ हाथापाई नहीं हुई परंतु मुझे रोका गया जबकि मैं रविवार की घटना के बारे में जानना चाहता था। परंतु कुछ लोगों के साथ वहां हाथापाई की गई। डीडीसीए में सत्तासीन समूह के समर्थकों ने मीडिया के सामने रविवार की घटना के लिए संघ की आलोचना करने का विरोध किया। मैं खड़ा हुआ और कहा कि मुझे अपनी बात कहने का पूरा अधिकार है।"
आजाद ने कहा कि उनके लिए डीडीसीए एक मंदिर की तरह है और वह 1970 से कोटला के मैदान पर खेलते आ रहे हैं। उन्होंने कहा, "डीडीसीए का कामकाज बहुत चिंताजनक और विक्षुब्ध करने वाला है। मेरा मानना है कि हमें इस तंत्र को स्वच्छ करने का काम आरंभ करना चाहिए।"
उन्होंने कहा, "डीडीसीए के प्रमुख अरुण जेटली के प्रति मेरा पूरा सम्मान है। वह एक ईमानदार व्यक्ति हैं लेकिन डीडीसीए अधिकारियों पर वह नियंत्रण नहीं कर पा रहे हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।