मुरली विश्व कप से पहले ले सकते हैं संन्यास (लीड-1)
श्रीलंकाई टीम के साथ भारत दौरे पर आए मुरलीधरन भारतीय टीम की मजबूत बल्लेबाजी क्रम के आगे संघर्ष करते नजर आ रहे हैं। यह उनका चौथा भारत दौरा है। मुरलीधरन ने अब तक खेले गए दो टेस्ट मैचों में 200 से अधिक रन दिए हैं लेकिन उनके खाते में मात्र पांच विकेट दर्ज हो सके हैं।
मुरलीधरन ने श्रीलंका के समाचार पत्र 'द नेशन' से बातचीत के दौरान कहा, "मेरी उम्र 37 वर्ष की हो चुकी है। अब मैं पहले की तरह लंबे स्पेल नहीं कर सकता। अब तो मैं 15-16 ओवरों के बाद थक जाता हूं। टेस्ट मैचों में मेरा प्रदर्शन इसी कारण गिरा है। मैं एकदिवसीय मैचों में और कुछ समय तक खेलने की कोशिश करूंगा क्योंकि वहां सिर्फ 10 ओवर गेंदबाजी करनी होती है।"
मुरलीधरन ने कहा कि उनके संन्यास लेने का फैसला काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि उनका शरीर कितना साथ देता है। बकौल मुरली, "मेरा शरीर अगर साथ देगा तब तो मैं आगे खेलना जारी रखूंगा। वैसे भी मुझे टेस्ट मैचों में इन दिनों काफी दिक्कत हो रही है क्योंकि दूसरी टीमों के बल्लेबाज अब मुझे काफी अच्छी तरह खेलते हैं।"
मुरली के मुताबिक दो वर्ष पहले तक उनका शरीर बखूबी उनका साथ देता था लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। मुरली ने कहा, "दो से तीन साल पहले यह स्थिति नहीं थी। अब मैं थका हुआ महसूस करता हूं और साथ ही हमेशा चोटिल होने का डर बना रहता है।"
मुरली ने स्वीकार किया कि भारत के साथ खेली जा रही तीन मैचों की टेस्ट श्रृंखला में नाकाम होने का उन पर दबाव है। वह कहते हैं, "इस वर्ष मैंने सिर्फ आठ टेस्ट मैच खेले हैं। न्यूजीलैंड में मैंने जरूरत पड़ने पर टीम के लिए विकेट हासिल किया लेकिन मैं नहीं समझ पा रहा हूं कि भारत में ऐसा क्यों नहीं हो पा रहा है। इसका कारण यह भी हो सकता है कि भारतीय बल्लेबाज स्पिनरों को बेहतर तरीके से खेल रहे हैं। कारण चाहे जो भी हो लेकिन मैं अपनी नाकामी को लेकर दबाव महसूस कर रहा हूं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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