इथियोपिया की एथलीट तिरुनेश डिबाबा ने खेल जगत में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। "बेबी-फेस्ड डिस्ट्रॉयर" के रूप में जानी जाने वाली डिबाबा ने 14 साल की उम्र में दौड़ना शुरू किया था, जिसके लिए उनकी प्रेरणा उनकी चचेरी बहन डेराटू तुलू थीं। तुलू ने कई ओलंपिक खेलों में भाग लिया था, जिससे डिबाबा और उनकी बहनें अदीस अबाबा में प्रशिक्षण लेने के लिए प्रेरित हुईं।

| Season | Event | Rank |
|---|---|---|
| 2016 | Women's 10000m | B कांस्य |
| 2012 | Women's 10000m | G स्वर्ण |
| 2012 | Women's 5000m | B कांस्य |
| 2008 | Women's 10000m | G स्वर्ण |
| 2008 | Women's 5000m | G स्वर्ण |
| 2004 | Women's 5000m | B कांस्य |
अपने पूरे करियर में, डिबाबा को कई चोटों का सामना करना पड़ा। 2013 में उन्हें शिन में चोट लगी, जिसके कारण उन्हें लंदन मैराथन से हटना पड़ा। वह 2011 में शिन स्प्लिंट्स के कारण पूरे साल से बाहर रहीं और 2009 में उन्हें पैर की उंगली में चोट लगने के कारण बर्लिन में विश्व चैंपियनशिप में खेलने से वंचित रहना पड़ा। 2004 के एथेंस ओलंपिक खेलों में घुटने की चोट के कारण उनके प्रदर्शन पर असर पड़ा।
डिबाबा अपने पति सिलेशी सिनहे और उनके दो बेटों, नाथन और एलोन के साथ अदीस अबाबा में रहती हैं। सिनहे भी एक सफल एथलीट हैं, जिन्होंने 2004 और 2008 के ओलंपिक खेलों में 10,000 मीटर में रजत पदक जीते हैं। 2008 में इस जोड़े की शादी इथियोपिया में एक महत्वपूर्ण घटना थी, जिसका प्रसारण टेलीविजन पर किया गया था और सड़कों पर हजारों लोग इकट्ठे हुए थे।
डिबाबा एथलीटों के परिवार से आती हैं। उनकी बड़ी बहन एजेगेयेहू ने 2004 के ओलंपिक खेलों में 10,000 मीटर में रजत पदक जीता था और 2008 में फिर से प्रतिस्पर्धा की थी। उनकी छोटी बहन गेंजेबे ने 2012 के ओलंपिक खेलों में भाग लिया था और 2016 के रियो डी जनेरियो ओलंपिक में 1500 मीटर में रजत पदक जीता था। उनकी चचेरी बहन डेराटू तुलू ने 1992 से 2004 तक चार लगातार ओलंपिक खेलों में भाग लिया था।
डिबाबा कोच हाजी आदिलो के अधीन प्रशिक्षण लेती हैं। उनके प्रशिक्षण कार्यक्रम ने उन्हें कई पुरस्कार प्राप्त करने में मदद की है, जिसमें ट्रैक एंड फील्ड न्यूज़ द्वारा 2008 की एथलीट ऑफ द ईयर का नाम दिया जाना भी शामिल है।
डिबाबा सामुदायिक कार्य में सक्रिय रूप से शामिल हैं। वह इथियोपिया में एचआईवी/एड्स रोकथाम कार्यक्रमों का समर्थन करती हैं। अदीस अबाबा में एक अस्पताल उनका नाम पर है, साथ ही 2016 में स्थापित असला में एक खेल प्रशिक्षण केंद्र भी है।
आगे देखते हुए, डिबाबा का लक्ष्य भविष्य के विश्व चैंपियनशिप और ओलंपिक में मैराथन में प्रतिस्पर्धा करना है। उन्होंने आगामी आयोजनों में मैराथन में स्वर्ण जीतने की इच्छा व्यक्त की है, जो उनके ओलंपिक स्वर्ण पदकों के प्रभावशाली रिकॉर्ड में जोड़ा जाएगा।
डिबाबा की कहानी दृढ़ता और समर्पण की कहानी है। उनकी उपलब्धियों ने न केवल उन्हें व्यक्तिगत सफलता दिलाई है बल्कि दुनिया भर के कई युवा एथलीटों को प्रेरित भी किया है।