'मुक्केबाजी मुकाबले' जैसी होगी पूनिया और डानी की भिड़ंत
डानी ने पूनिया को खुले तौर पर चुनौती दी है। डानी ने हालांकि पूनिया के उस बयान के बाद यह चुनौती दी है, जिसमें पूनिया ने कहा था कि डानी ने खराब फार्म से बचने के लिए नई दिल्ली नहीं जाने का फैसला किया।
डानी ने कहा था कि वह व्यक्तिगत स्वास्थ्य और सुरक्षा कारणों से भारत नहीं जा रही हैं लेकिन पूनिया ने मीडिया से कहा कि डानी ने यूरोपीयन प्रतियोगिताओं में अच्छा प्रदर्शन नहीं किया था और यही कारण है कि उन्होंने अपनी प्रतिष्ठा बचाने के लिए नई दिल्ली नहीं जाने का फैसला किया।
पूनिया ने 61.51 मीटर के साथ स्वर्ण पदक जीता था। भारत के लिहाज से किसी महिला ने पहली बार ट्रैक एवं फील्ड स्पर्धा में स्वर्ण जीता।
डानी के प्रबंधक हेडन नोल्स ने इस प्रतिस्पर्धा को लेकर समाचार पत्र 'सिडनी मार्निग हेराल्ड' से कहा, "यह किसी मुक्केबाजी मुकाबले जैसी भिड़ंत होगी। पूनिया ने मीडिया के माध्यम से यह प्रतिस्पर्धा शुरू की है। इसे इतना बढ़ाने-चढ़ाने की जरूरत नहीं थी।"
एक प्रायोजक ने इस मुकाबले के लिए 20,000 डॉलर का पुरस्कार रखा है। यह डिस्क्स थ्रो स्पर्धा में रखा गया अब तक का सबसे बड़ा पुरस्कार है। प्रतिष्ठित डायमंड लीग में इस स्पर्धा के लिए 10 हजार डॉलर का पुरस्कार है।
नोल्स ने कहा कि डानी को राष्ट्रमंडल खेलों में हिस्सा नहीं लेने का अफसोस नहीं है। बकौल हेडन, "डानी पूनिया का सम्मान करती हैं लेकिन पूनिया ने डानी के भारत न जाने के फैसले को गलत तरीके से लिया। अब यह बहस प्रतिस्पर्धा बन चुकी है। वैसे डानी को भारत नहीं जाने का कोई अफसोस नहीं है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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