नागपुर की नाकामी भुलाकर रंग में लौटी टीम इंडिया (विश्लेषण)
नई दिल्ली, 16 फरवरी (आईएएनएस)। नागपुर टेस्ट में मिली शर्मनाक हार की वजह से सर्वोच्च वरीय टेस्ट टीम का ताज दांव पर लगने के बाद भारतीय क्रिकेट टीम ने शानदार वापसी करते हुए दूसरे टेस्ट मैच में दक्षिण अफ्रीकी टीम पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली है।
पहले टेस्ट मैच में भारतीय टीम को एक पारी और छह रनों से शिकस्त मिली थी। उस हार ने इस सत्र की समाप्ति तक सर्वोच्च वरीय टेस्ट टीम का ताज अपने पास बनाए रखने के भारत के मंसूबे को हिलाकर रख दिया है। इस ताज को बचाने के लिए भारत को हर हाल में इडेन गार्डन्स में जीत हासिल करनी है और बल्लेबाजों के दम पर भारतीय टीम ने काफी हद तक उसके लिए जमीन तैयार भी कर ली है।
इडेन गार्डन्स में दक्षिण अफ्रीका की पहली पारी 296 रनों के योग पर समेटने के बाद भारतीय टीम ने तीसरे दिन का खेल खत्म होने तक मेहमान टीम पर 341 रनों की बढ़त बना ली है। लगातार टूटती पिच पर दक्षिण अफ्रीकी बल्लेबाजों को इस योग को पार करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाना होगा। गेंदबाजों ने अपनी क्षमता के साथ न्याय किया तो शायद भारतीय टीम को दोबारा बल्लेबाजी करने की नौबत आए ही नहीं।
अपने चार बल्लेबाजों के शतक की बदौलत भारतीय टीम ने दक्षिण अफ्रीकी टीम की मजबूत आक्रमण पंक्ति के सामने पहली पारी में छह विकेट खोकर 643 रन (घोषित) बनाए। नागपुर में कुल 10 विकेट लेकर भारतीय बल्लेबाजी क्रम को तहस-नहस करने वाले डेल स्टेन और मोर्न मोर्कल की गेंदों की जबरदस्त धुनाई करते हुए वीरेंद्र सहवाग (165), सचिन तेंदुलकर (106), कप्तान महेंद्र सिंह धौनी (नाबाद 132) और वी.वी.एस. लक्ष्मण (नाबाद 143) शतक लगाने में सफल रहे।
यह वही टीम है, जो नागपुर में अपनी पहली पारी में 233 और दूसरी पारी में महज 319 रन बना सकी थी। भारतीय गेंदबाजों ने नागपुर में 558 रन लुटा दिए थे और बल्लेबाजों की नाकामी के कारण टीम को फॉलोआन खेलना पड़ा था। कोलकाता में हालांकि भारतीय गेंदबाजों की गेंदों की भी चमक लौट आई। इसी का नतीजा है कि मेहमान टीम अपनी पहली पारी में 300 रनों का आंकड़ा भी पार नहीं कर सकी।
दूसरे टेस्ट मैच के दूसरे दिन के खेल का जिक्र खासतौर पर करना बेहद जरूरी है। एक तरफ दक्षिण अफ्रीकी गेंदबाज पॉल हैरिस लगातार 'निगेटिव गेंदबाजी' कर रहे थे वहीं दूसरी ओर तेंदुलकर और सहवाग बड़े संयम के साथ उनकी गेंदों को खेल रहे थे। लेग स्टंप के बाहर टप्पा खाने के बाद बाहर जाती गेंदों को खेलने में तेंदुलकर को काफी दिक्कत हो रही थी लेकिन उन्होंने कभी अपना आपा नहीं खोया।
एक दो मौकों पर सहवाग ने आपा खोते हुए रिवर्स स्विप शॉट खेले लेकिन ज्यादातर मौकों पर वह भी अपनी टीम की बेहतरी के लिए संयम में दिखे। तीसरे दिन कमोवेश हैरिस ने इसी तरह की परीक्षा धौनी और लक्ष्मण की भी ली। दोनों बल्लेबाजों ने अपनी अटूट साझेदारी के दौरान एक बार भी स्टेन, मोर्कल या फिर हैरिस को खुद पर हावी नहीं होने दिया।
मनोवैज्ञानिक रूप से भारतीय टीम दूसरे टेस्ट मैच में जीत के करीब पहुंच चुकी है लेकिन इसे हकीकत में बदलने के लिए गेंदबाजों को चौथे दिन के पहले सत्र में अपना श्रेष्ठ प्रदर्शन करना होगा। इसी प्रदर्शन पर उनके पूरे साल की मेहनत का पुरस्कार टिका होगा। खासतौर पर जहीर खान को अपने अनुभव के बूते टीम को शुरुआती सफलता दिलानी होगी और हरभजन सिंह को 2001 का इतिहास दोहराते हुए बढ़त के अंदर ही मेहमान बल्लेबाजों को पेवेलियन लौटने का प्रयास करना होगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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