अपने मतलब के लिए हॉकी इंडिया के चुनाव टाल रहे हैं कलमाडी : परगट
अध्यक्ष पद के लिए नामांकन कर चुके परगट ने कहा कि कलमाडी जैसे लोग देश में 'खेल माफिया' के तौर पर काम कर रहे हैं। उन्हीं के इशारे पर हॉकी इंडिया का चुनाव नहीं हो पा रहा है क्योंकि वह महाराष्ट्र से इसके अध्यक्ष पद के लिए नामांकन नहीं कर पाए हैं।
परगट ने कहा, "वह (कलमाडी) हॉकी का मजाक बना रहे हैं। मैं यह सब नहीं कहना चाहता था लेकिन चूंकि विश्व कप करीब है और फिर भी चुनाव टाल दिए गए, यह देखकर मेरा मन व्यथित हो गया। हॉकी इंडिया राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा चुनाव पर रोक लगाने संबंधी आदेश पर प्रतिक्रिया कर सकता था लेकिन ऐसा नहीं हुआ। भारत में विश्व कप नहीं हुआ तो इसके लिए कलमाडी जिम्मेदार होंगे।"
परगट के मुताबिक कलमाडी ने समझौते के लिए उनके पास अपने लोगों को भेजा था। बकौल परगट, "कलमाडी चाहते थे कि मैं उन्हें हॉकी इंडिया के अध्यक्ष के तौर पर स्वीकार कर लूं। इस एवज में पंजाब को संबंद्धता देने की शर्त रखी गई थी। मैंने उन्हें साफ-साफ कह दिया कि मैं इस तरह के समझौते का हिस्सा नहीं बन सकता।"
परगट के मुताबिक कलमाडी देश के 'खेल माफिया' हैं। उन्होंने कहा, "हम इन माफियाओं के खिलाफ लड़ेंगे। खिलाड़ी संघ के साथ परिवार जैसा संबंध रखना चाहते हैं। कोई विद्रोह नहीं चाहता। कलमाडी खिलाड़ियों को अपने हाथ का मोहरा बनाकर 'खेल' कर रहे हैं।"
परगट के मुताबिक कलमाडी चुनाव को लेकर डरे हुए हैं और यही कारण है कि चुनाव को बार-बार टाला जा रहा है। परगट ने कहा, "मेरी नजर में केपीएस गिल का वक्त इससे बेहतर था। कम से कम इस तरह की गंदी राजनीति नहीं थी। एथलेटिक्स महासंघ का अध्यक्ष रहते कलमाडी ने एथलेटिक्स का कितना भला किया, हम यह भी अच्छी तरह जानते हैं कि वह हॉकी के लिए कुछ नहीं कर पाएंगे।"
परगट ने कहा कि खेल मंत्रालय इस मामले को लेकर काफी सजग है क्योंकि वह लगातार इस मामले पर अपनी नजर रखे हुए है। बकौल परगट, "खेल मंत्रालय ने हॉकी इंडिया को न जाने कितनी बार पत्र लिखकर चुनाव और अपने दैनिक कार्यकलाप में पारदर्शिता बरतने को कहा है लेकिन हॉकी इंडिया की आंखे बंद हैं। चुनाव नहीं कराकर आखिर हॉकी इंडिया दुनिया को क्या संदेश देना चाहता है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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