टोगो को अगले दो साल तक के लिए फ़ुटबॉल के टूर्नामेंट अफ़्रीका कप ऑफ़ नेशंस में भाग लेने से रोक दिया गया है.
इस साल के टूर्नामेंट में टोगो के नहीं शामिल होने के कारण अफ़्रीकी फ़ुटबॉल संघ ने ये फ़ैसला लिया है.
संघ ने टोगो पर 50 हज़ार डॉलर जुर्माना भी लगाया है. अफ़्रीकी फ़ुटबॉल संघ के इस फ़ैसले पर फ़िलहाल विश्व फ़ुटबॉल को नियंत्रण करने वाली संस्था फ़ीफ़ा ने कोई भी आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है.
घटना
इस साल टूर्नामेंट शुरू होने के कुछ ही दिन पहले टोगो फ़ुटबॉल टीम को ले जा रही बस पर अंगोला में बंदूकधारियों ने हमला किया था जिसके कारण टीम के दो सदस्यों और बस ड्राइवर की मौत हो गई थी.
इसके बाद टोगो की टीम टूर्नामेंट में हिस्सा लिए बगैर वापस चली गई थी.
शुरू में टोगो की टीम मैच खेलना चाहती थी, लेकिन टूर्नामेंट के शुरू होने के दिन 10 जनवरी को अपनी सरकार के आदेश पर टीम अपने देश वापस लौट गई थी.
अफ़्रीकी फ़ुटबॉल संघ का कहना है कि टोगो टीम को वापस बुलाने का फ़ैसला खेल के मामले में सरकारी दखलंदाज़ी है.
संघ के अनुसार टोगो की सरकार का ये राजनीतिक फ़ैसला अफ़्रीकी फ़ुटबॉल संघ और अफ़्रीका कप ऑफ़ नेशंस के नियमों के खिलाफ़ है.
अपील
टोगो के खिलाड़ी थॉमस दोसेवी जो हमले के समय बस में मौजूद थे, उनका कहना है कि टोगो को अपने ऊपर लगे प्रतिबंध के खिलाफ़ अपील करनी चाहिए.
दोसेवी का कहना है कि जब टोगो की टीम अपने देश वापस जा रही थी तो सभी लोगों ने उसके साथ सहानुभूति जताते हुए उसको हरसंभव मदद देने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब यही लोग टोगो की फ़ुटबॉल टीम को सज़ा दे रहे हैं.
इस बीच इस हमले में मारे गए टोगो फ़ुटबॉल टीम के प्रेस अधिकारी और सहायक कोच के परिजनों ने अफ़्रीकी फ़ुटबॉल संघ और अंगोला राज्य के खिलाफ़ कानूनी कार्रवाई करने का फ़ैसला किया है.
उनके वकील अलेक्सिस अक्वेरेबुरू ने कहा कि उनके मुवक्किल इसलिए क़ानूनी कदम उठा रहे हैं क्योंकि उनके देशवासियों की मौत अफ़्रीकी फ़ुटबॉल संघ और उसके अध्यक्ष इसा हयातो की गलतियों के कारण हुई थी.
अक्वेरेबुरू के मुताबिक ये कानूनी कदम अंगोला सरकार के ख़िलाफ़ भी है क्योंकि उन्होंने युद्द क्षेत्र में इस टूर्नामेंट का आयोजन कर हमारे देशवासियों की जान को ख़तरे में डाल दिया था.