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बड़ी मुश्किल से बची टीम इंडिया की 'बादशाहत'(विश्लेषण)

नई दिल्ली, 18 फरवरी (आईएएनएस)। ईडन गार्डन्स में दक्षिण अफ्रीका पर एक पारी और 58 रनों के भारी अंतर से जीत हासिल करके टीम इंडिया बेशक सर्वोच्च वरीयता प्राप्त टेस्ट टीम का ताज अपने पास रखने में सफल रही लेकिन इस ताज को 2009-10 सत्र के अंत तक अपने सिर पर सजाए रखने के लिए उसे एड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ा।

नागपुर के विदर्भ क्रिकेट संघ मैदान पर खेले गए पहले टेस्ट मैच में मिली एक पारी और छह रनों की हार के बाद उसका यह ताज खतरे में दिखाई दे रहा था। भारत से यह ताज हासिल करने के लिए दक्षिण अफ्रीका को कोलकाता टेस्ट ड्रॉ कराना था लेकिन बल्लेबाजों के अथक प्रयास के बावजूद मेहमान टीम अंतिम दिन का खेल खत्म होने से पांच मिनट पहले पेवेलियन लौट गई।

इस तरह भारतीय टीम दो मैचों की यह श्रृंखला 1-1 से बराबर करने में सफल रही। इस जीत के बाद उसे अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद द्वारा दिया जाने वाला 175,000 डॉलर का वार्षिक पुरस्कार और स्वर्ण गदा मिल जाएगा लेकिन एक महीने पहले यह मुकाम हासिल करने वाले महेंद्र सिंह धौनी को बखूबी अहसास हो गया कि चोटी पर पहुंचना फिर भी आसान है लेकिन वहां बने रहना वाकई बहुत मुश्किल है।

भारतीय टीम ने 6 दिसंबर, 2009 को मुंबई में खेले गए दूसरे टेस्ट मैच में श्रीलंका को एक पारी और 24 रनों से हराकर शीर्ष वरीयता हासिल की थी। दो मैचों की टेस्ट श्रृंखला में भारतीय टीम ने श्रीलंका को 2-0 से पराजित किया था। कानपुर में खेले गए पहले टेस्ट मैच में भी उसे एक पारी और 144 रन के अंतर से जीत मिली थी।

श्रीलंको अपने घर में हराने के बाद भारतीय टीम ने बांग्लादेश को उसके घर में 2-0 से हराया था लेकिन चूंकि बांग्लादेश की टीम टेस्ट रैंकिंग में फिसड्डी है, लिहाजा रेटिंग अंकों के लिहाज से भारतीय टीम को इस श्रृंखला के नतीजे से कुछ विशेष फायदा नहीं हुआ। उसके बाद भारत का सामना दक्षिण अफ्रीका से हुआ, जिसका नतीजा हमारे सामने है।

आईसीसी के फ्यूचर टूर प्रोग्राम (एफटीपी) में भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच खेली गई टेस्ट श्रृंखला का कोई जिक्र नहीं था। श्रीलंका के खिलाफ खेलने के बाद भारतीय टीम को सीधे इस वर्ष नवंबर में न्यूजीलैंड के साथ खेलना था। टेस्ट रैंकिंग में शीर्ष वरीयता हासिल करने के बाद भारत के खाते में 2010-11 सत्र मे सिर्फ दो टेस्ट आ रहे थे, जिसे लेकर अंतर्राष्ट्रीय बिरादरी ने उस पर धीरे-धीरे अपनी लोकप्रियता खो रहे टेस्ट क्रिकेट के प्रति उदासीन रुख दिखाने का आरोप लगाया।

भारत पर आरोप लगा कि वह इंडियन प्रीमियर लीग जैसी मोटी कमाई करने वाली ट्वेंटी-20 प्रतियोगिता के जरिए जमकर अपना बैंक खाता भर रहा है, लिहाजा वह टेस्ट मैचों को नहीं बल्कि ट्वेंटी-20 मैचों को प्रोत्साहित करने में जुटा है। बीसीसीआई के लिए यह आरोप गंभीर थे, लिहाजा उसने क्रिकेट साउथ अफ्रीका से निवेदन किया कि फरवरी-मार्च में दोनों टीमों के बीच खेली जाने वाले एकदिवसीय श्रृंखला को संक्षिप्त करके उसमें दो टेस्ट मैचों को भी शामिल किया जाए।

बीसीसीआई के साथ अच्छे संबंधों को देखते हुए क्रिकेट साउथ अफ्रीका ने उसका यह निवेदन स्वीकार कर ली। श्रृंखला का कार्यक्रम फिर से निर्धारित किया गया और पांच की जगह तीन एकदिवसीय मैचों की श्रृंखला को हरी झंडी मिली। इसमें दो टेस्ट मैचों को शामिल किया गया।

दक्षिण अफ्रीका जैसी सशक्त टीम के साथ भिड़ना भारत के लिए कभी भी आसान नहीं रहा है। इससे पहले मार्च-अप्रैल 2008 में खेली गई तीन मैचों की श्रृंखला में भारतीय टीम काफी मशक्कत के बाद दक्षिण अफ्रीका को 1-1 की बराबरी पर रोकने में सफल रही थी। इस लिहाज से भारत के लिए यह श्रृंखला के एक चुनौती की तरह थी।

चुनौती टेस्ट ताज बचाने के साथ-साथ धौनी की कप्तानी में लगातार जीत का सिलसिला जारी रखने की थी। नागपुर में दक्षिण अफ्रीका ने एक पारी और छह रनों से जीत हासिल करके भारत के दोनों प्रयासों को गहरा झटका दिया। धौनी की कप्तानी में लगातार आठ जीत हासिल करने का सिलसिला थम गया और साथ ही भारत का टेस्ट ताज भी खतरे में दिखने लगा।

दक्षिण अफ्रीकी टीम इससे पहले भी कई मौकों पर टेस्ट ताज के करीब पहुंची है लेकिन भारतीय टीम पहली बार इस मुकाम पर पहुंची थी, लिहाजा उसके लिए उस मुकाम पर बने रहना बहुत महत्वपूर्ण था। कोलकाता टेस्ट के पहले चार दिनों तक भारतीय टीम मेहमान टीम पर हावी रही लेकिन अंतिम दिन चायकाल के बाद हाशिम अमला और पुछल्ले बल्लेबाजों की जिद के आगे भारत की बादशाहत खतरे में दिखने लगी थी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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Story first published: Tuesday, November 14, 2017, 12:31 [IST]
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