हॉकी खिलाड़ी अपनी मांग पर अड़े, एचआई ने दी नई टीम बनाने की धमकी (लीड-3)

एचआई के अध्यक्ष अशोक कुमार मट्टू ने आईएएनएस को बताया कि पुणे में मौजूद सभी संभावित खिलाड़ियों से उनके कोच और अंतर्राष्ट्रीय हॉकी महासंघ के उपाध्यक्ष एंटोनियो वान ओंदारजा की मौजूदगी में बातचीत की गई। इस बातचीत के लिए मट्टू की अध्यक्षता में एचआई का पांच सदस्यीय दल पुणे पहुंचा था।

मट्टू ने कहा, "खिलाड़ियों ने अपनी मांगे हमारे सामने रखी हैं। हमारे पास उन्हें देने के लिए पैसा नहीं है। हमारे पास इसके अलावा और कोई रास्ता भी नहीं है। अगर खिलाड़ी बुधवार को भी अभ्यास के लिए नहीं लौटेंगे तब हम विश्व कप के लिए नई टीम बनाने को मजबूर होंगे। मेरी समझ से हालात इतने खराब नहीं होंगे और खिलाड़ी अभ्यास के लिए लौट आएंगे।"

उधर, एचआई के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाले खिलाड़ियों ने वेतन और भत्ते के भुगतान के बिना राष्ट्रीय शिविर में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया। बैठक के बाद पत्रकारों को संबोधित करते हुए खिलाड़ियों ने कहा कि उन्हें एचआई की धमकी का कोई डर नहीं। अगर एचआई एक भी खिलाड़ी को निलंबित करेगा, तो सभी खिलाड़ी टीम से खुद ही हट जाएंगे।

खिलाड़ियों ने यह भी कहा कि वे अपने खर्चे पर विश्व कप खेलने के लिए तैयार हैं लेकिन सबसे पहले एचआई को अपने अड़ियल रवैये से बाज आना होगा और उनके हितों की रक्षा का वचन देना होगा।

पत्रकार सम्मेलन में टीम के सभी सदस्य मौजूद थे। इस सम्मेलन की अगुआई वरिष्ठ खिलाड़ी प्रभजोत सिंह कर रहे थे। साथ ही अर्जुन हलप्पा, कप्तान राजपाल सिंह, गोलकीपर एड्रियन डीसूजा और वरिष्ठ खिलाड़ी दीपक ठाकुर मौजूद थे।

खिलाड़ियों ने कहा कि उन्होंने देश को यह बताने की कोशिश की है कि उनके साथ क्या होता रहा है और आगे क्या होगा। देश के लिए खेलना उनके लिए भी सर्वोपरि है लेकिन देश के लिए सोचना एचआई के अधिकारियों का काम है। अगर खिलाड़ी अपने वेतन के बारे में ही सोचता रहेगा तो फिर वह खेलेगा कैसे।

खिलाड़ियों ने कहा कि उन्होंने एचआई के सामने जो प्रस्ताव रखा है, उसके मुताबिक एक वर्ष के भीतर विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में खेलने के बदले उन्हें जायज भुगतान मिलना चाहिए। इसमें अगर प्रायोजक सहारा इंडिया से मिलने वाली राशि का हिस्सा जोड़ दिया जाए तो यह रकम प्रति खिलाड़ी 4.5 लाख रुपये तक पहुंच जाती है।

एचआई ने कहा कि उसकी प्राथमिकता फिलहाल चुनाव है, जो सात फरवरी को होना है। खिलाड़ियों को अभ्यास के लिए लौट जाना चाहिए क्योंकि चुनाव के बाद उनके बारे में खुले दिमाग से बात की जाएगी। एचआई ने साथ ही यह भी कहा कि अगर खिलाड़ी अभ्यास के लिए नहीं लौटे तो उन्हें निलंबित कर दिया जाएगा और एक नई टीम का गठन किया जाएगा।

तमाम मुश्किलों के बीच हॉकी खिलाड़ियों के लिए अच्छी खबर यह है कि मध्य प्रदेश सरकार ने इन खिलाड़ियों के वेतन, भत्ते और प्रशिक्षण का खर्च उठाने की पेशकश की है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इसके लिए जल्द ही सरकार की ओर से आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। राज्य के खेल विभाग की समीक्षा के लिए सोमवार को हुई बैठक में चौहान ने कहा कि हॉकी और खिलाड़ियों की दशा सुधारने के लिए प्रदेश सरकार हरसंभव उपाय करेगी।

चौहान ने कहा कि प्रदेश सरकार देश के शीर्ष खिलाड़ियों को वेतन,भत्तेऔर प्रशिक्षण पर आने वाला खर्च देने को तैयार है। इसके लिए चौहान ने एचआई के अधिकारियों के साथ बैठक करने की बात कही। चौहान ने कहा, "राज्य सरकार हॉकी की बेहतरी के लिए आवश्यक कदम उठाएगी। हम वेतन तथा अन्य मदों से जुड़े भुगतान की मांग कर रहे खिलाड़ियों के खर्च वहन करने के लिए तैयार हैं। इस प्रस्ताव को मूर्त रूप देने के लिए हम एचआई से बात करेंगे।"

समीक्षा बैठक में चौहान ने खेल विभाग को भोपाल में ओबेदुल्ला स्वर्ण कप हाकी टूर्नामेंट आयोजित करने के निर्देश देते हुए कहा कि भोपाल के साथ देश में हॉकी और इसके खिलाड़ियों की सम्मानजनक स्थिति रही है।

यह स्थिति बनी रहे इसके लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने ओबेदुल्ला स्वर्ण कप हाकी टूर्नामेंट के लिए आवश्यक धनराशि प्रदान करने की घोषणा की।

चौहान के राजनीतिक विरोधी और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भी खिलाड़ियों की मांगों का समर्थन किया है। कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने कहा, "खिलाड़ियों की मांग पूरी तरह न्यायोचित है। भारतीय हॉकी की खराब होती स्थिति को बेहतर करने के लिए कदम उठाना जरूरी हो गया है।"

दिग्विजय के अलावा कई पूर्व ओलंपिक खिलाड़ियों और हॉकी अंपायरों ने एचआई द्वारा खिलाड़ियों को भुगतान नहीं करने की आलोचना की है। ओलंपिक खिलाड़ी असलम शेर खान और जलालुद्दीन रिजवी ने कहा कि जब कोई खेल संघ अपने खिलाड़ियों के हितों की रक्षा नहीं कर सकता तब उसके अस्तिस्व में बने रहने का कोई अधिकार नहीं।

अंतर्राष्ट्रीय स्तर के अंपायर और एचआई की अंपायर समिति के सदस्य शकील कुरैशी ने कहा कि खिलाड़ियों को अपनी मांगों को उठाने के लिए सही समय का इंतजार करना चाहिए था।

उन्होंने कहा, "खिलाड़ियों की मांग जायज है लेकिन उन्होंने यह मुद्दा गलत समय पर उठाया है। खिलाड़ियों को पहले मैदान में अपना प्रदर्शन सुधारना चाहिए था और फिर इसकी मांग करनी चाहिए थी। यह नहीं भूलना चाहिए कि यही टीम बीजिंग ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने में नाकाम रही थी।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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Story first published: Tuesday, January 12, 2010, 6:45 [IST]
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