1997 में, चीन के गुइझोउ के एक एथलीट ने मुक्केबाजी की दुनिया में कदम रखा। शुरू में वो वुशु सीखने के लिए एक निजी स्कूल में दाखिला लिया था, लेकिन मुक्केबाजी की तेज़ और विस्फोटक प्रकृति उसे ज़्यादा पसंद आई। उसके माता-पिता इस बदलाव के ख़िलाफ़ थे, लेकिन उसने ज़िद नहीं छोड़ी और आख़िरकार उन्हें मना भी लिया।

| Season | Event | Rank |
|---|---|---|
| 2012 | Men Light Flyweight | G स्वर्ण |
| 2008 | Men Light Flyweight | G स्वर्ण |
| 2004 | Men Light Flyweight | B कांस्य |
1997 से ही, वो शंघाई के शेनक्वियन क्लब में कोच च्युआन लियांग झांग के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण ले रहा है। उसके प्रशिक्षण में उसके नियमित वज़न और लड़ाई के वज़न के बीच बदलाव शामिल है। प्रतियोगिताओं से पहले, वो सख़्त आहार का पालन करता है, जिससे वो अक्सर भूखा और चिड़चिड़ा महसूस करता है। खुद को विचलित करने के लिए, वो तरबूज के टुकड़े खाता है और गूदे को थूक देता है।
उसने 2003 में बैंकॉक में विश्व चैंपियनशिप में चीन के लिए प्रतिस्पर्धा करते हुए अपना अंतर्राष्ट्रीय पदार्पण किया। 2004 के एथेंस ओलंपिक में लाइट फ़्लाइवेट वर्ग में कांस्य पद जीतकर, उसने चीन को ओलंपिक मुक्केबाजी में पहला पदक दिलाया। 2005 में, मियांग्यांग में विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर, वह चीन का पहला शौकिया विश्व मुक्केबाजी चैंपियन बना।
2007 में, शिकागो में विश्व चैंपियनशिप में, उसे चीन का सबसे मूल्यवान मुक्केबाज नामित किया गया। उसकी सफलता ने दिखाया कि मार्शल आर्ट्स की लचीलापन और मुक्केबाजी की सीधी ताकत को मिलाकर चीन मुक्केबाजी में एक विश्व शक्ति बन सकता है। उसके कोच झांग, जो मूल रूप से एक मार्शल आर्ट्स प्रशिक्षक थे, ने इस नए तरह की लड़ाई की शैली में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
वो चीन में अपनी पत्नी, यिंगयिंग रेन के साथ रहता है। उसने शंघाई विश्वविद्यालय से स्नातक किया है और चीनी बोलता है। मुक्केबाजी के अलावा, उसे यात्रा करना, गाना गाना और इंटरनेट पर सर्फिंग करना पसंद है। उसके आदर्शों में मुहम्मद अली, जैकी चैन और डेंग यापिंग शामिल हैं।
2008 की शुरुआत में, उसे पीठ और पैर में चोटों का सामना करना पड़ा। लड़ाई से पहले खुद को शांत करने के लिए, वो कोच झांग च्युआन लियांग से गले मिलता है। इन चुनौतियों के बावजूद, मुक्केबाजी के प्रति उसका समर्पण अटूट है।
भविष्य में, वो अंतरराष्ट्रीय मंच पर चीन का प्रतिनिधित्व करना जारी रखना चाहता है। मार्शल आर्ट्स और मुक्केबाजी कौशल के अपने अनोखे मिश्रण के साथ, वो भावी पीढ़ी के चीनी मुक्केबाजों को प्रेरित करने की उम्मीद करता है।
इस एथलीट की वुशु के एक छात्र से एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त मुक्केबाज बनने की यात्रा उसके लचीलेपन और खेल के प्रति समर्पण को उजागर करती है। उसकी उपलब्धियों ने भविष्य के चीनी मुक्केबाजों को विश्व मंच पर अपनी पहचान बनाने का मार्ग प्रशस्त किया है।