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एशेज देखने के लिए 12 साल के लड़के ने 4 साल तक उठाया कूड़ा, जानिए संघर्ष की कहानी

नई दिल्ली। भूख, प्यास और नींद उड़ाकर रख देता है जब किसी क्रिकेट फैन का खिलाड़ी मैदान पर रनों की बाैछार कर रहा हो। दुनिया में यूं तो कई ऐसे फैंस हैं जो क्रिकेट के प्रति बेहद प्यार दिखाते हैं। बच्चों से लेकर बूढ़ों तक के लोगों में इसका जुनून सिर चढ़कर बोलता है। इन सब के बीच क्रिकेट का एक दीवाना ऐसा भी है जिसकी कहानी सुनने के बाद आप भी सोचते रह जाएंगे कि आखिर कैसे कोई एक मैच देखने के लिए इतना संघर्ष कर सकता है। बड़ी बात यह है कि यह कहानी किसी युवा या बूढ़े फैन की नहीं बल्कि 12 साल के लड़के की है जो एक मैच देखने के लिए 4 साल तक लोगों के घर का कूड़ा उठाता रहा।

8 साल की उम्र में किया था एशेज देखने का फैसला

8 साल की उम्र में किया था एशेज देखने का फैसला

यह कहानी है मैक्स वैट नाम के लड़के की जिसने चार साल तक पैसे जमा किए और आज वह मैनचेस्टर में इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच मैनचेस्टर में चौथा टेस्ट मैच देखने पहुंच गया। मैक्स 8 साल के थे जब ऑस्ट्रेलिया ने घरेलू धरती पर 2015 में विश्व कप जीता था। और तभी उन्होंने यूके जाकर अपनी टीम को हाई-वोल्टेज एशेज सीरीज में देखने का फैसला किया था। लेकिन एशेज देखने के सपने को पूरा करने के लिए उनका संघर्ष बड़ों के लिए भी प्रेरणा है कि मेहनत के बिना कुछ भी हासिल करना मुश्किल है।

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स्मिथ हैं फेवरेट

मैक्स ने बताया कि जब ऑस्ट्रेलिया के क्रिकेटरों को उसके बारे में पता चला तो सबने उसे खूब प्यार दिया. कोच जस्टिन लेंगर, स्टीव वॉ और नाथन लॉयन ने उसे अपने बगल में बिठाया। मैक्स ने कहा, 'मैं स्टीव वॉ, जस्टिन लैंगर और नाथन लायन के साथ बैठा। लैंगर ने मुझे प्लान बुक दिखाई उनके नोट्स देखना शानदार था। स्टीव वॉ के साथ बातें करना भी बहुत अच्छा अनुभव था।' उन्होंने आगे कहा, 'स्टीव स्मिथ और पैट कमिंस मेरे फेवरेट हैं। मैंने उनसे उनकी तैयारियों और खेल के बारे में बात की। इन सबमें मुझे बहुत मजा आया।'

पैसे जुटाने का यूं बनाया प्लान

पैसे जुटाने का यूं बनाया प्लान

क्रिकेट का ये दीवाना एशेज देखने तो पहुंच गया लेकिन यहां आने के लिए जिस तरह से उसने पैसे जोड़ने का प्लान बनाया वो दिलचस्प है। मैक्स के लिए इंग्लैंड आसाना नहीं था। उनका पिता डेमियन भी मैक्स की बात से सहमत नहीं था, लिहाजा उन्होंने बेटे को कहा कि अगर वो 1500 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (मौजूदा कीमत के हिसाब से करीब 73000 भारतीय रुपये) जमा कर लेता है तो फिर यूके जा सकते हैं। बच्चे के लिए इतनी रकम जुटाना आसान नहीं था। ऐसे में उन्होंने और उनकी मां ने एक प्लान बनाया। उन्होंने सप्ताहंत पर पड़ोसियों का डस्टबिन ले जाने का प्लान बनाया। इसके लिए उन्होंने सिर्फ एक ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की रकम लेने का फैसला किया।

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 पड़ोसियों को लिखा पत्र

पड़ोसियों को लिखा पत्र

मैक्स ने अपने सभी पड़ोसियों को पत्र लिखा और वेस्ट मैनेजमेंट सर्विस देने का फैसला किया। जल्द ही उनके पास कई ग्राहक हो गए। यह पूरी प्रक्रिया चार साल तक चली और मैक्स ने हर सप्ताह अपना काम जारी रखा। उन्होंने सिर्फ बीमारी या किसी मजबूरी में ही ब्रेक लिया। उनकी 'छुट्टी' के दौरान उनके माता-पिता और छोटे भाई ने उनका यह काम जारी रखा। और आखिर में जब मैक्स ने वह रकम जुटा ली उनके पिता ने भी अपना वादा पूरा किया और पूरे परिवार के लिए इंग्लैंड के खिलाफ जारी एशेज सीरीज के चौथे टेस्ट मैच के लिए टिकट बुक करा दिए। यह मैच मैनचेस्टर में खेला जा रहा है। मैक्स और उसके भाई ने टीम बस के साथ ओल्ड टैफर्ड का सफर तय किया और मैक्स ऑस्ट्रेलियाई टीम के कोच जस्टिन लैंगर के साथ बैठे थे।

Story first published: Friday, September 6, 2019, 17:13 [IST]
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