IPL के 3 अनसुने हीरो जो टीम की जीत में अहम रोल निभाने के बाद गुमनाम हो गए

नई दिल्ली: क्रिकेट में चैंपियनशिप जीतना आसान नहीं है, विशेषकर आईपीएल जो टीमों के बीच गला काट प्रतियोगिता का आयोजन करता है। हालांकि व्यक्तिगत प्रतिभा टीम को कई मैच जीतने में मदद कर सकती है, फिर भी प्रत्येक खिलाड़ी के योगदान के बिना, यह संभावना नहीं है कि एक टीम टूर्नामेंट जीत सकती है।

आमतौर पर, जब कोई टीम जीतती है, तो श्रेय सबसे अधिक रन बनाने वाले, या विकेट लेने वाले या किसी ऐसे व्यक्ति को जाता है, जो अकेले दम पर मैच जीतता है।

लेकिन ऐसे कई खिलाड़ी हैं, जिनको वे सम्मान नहीं मिले, जिनके वे हकदार थे। ऐसे खिलाड़ी आईपीएल में भी हैं जिन्होंने टीम की जीत में अहम योगदान दिया लेकिन उनको याद नहीं रखा गया। यहां हम ऐसे ही तीन खिलाड़ियों पर नजर डालने जा रहे हैं-

1. स्वप्निल असनोडकर ( राजस्थान रॉयल्स, 2008)

1. स्वप्निल असनोडकर ( राजस्थान रॉयल्स, 2008)

आईपीएल में अब तक की सबसे बड़ी अंडरडॉग कहानी राजस्थान रॉयल्स के उद्घाटन सत्र में ट्रॉफी उठाने की है। कोई बड़ा स्टार ना होने के बावजूद यह टीम के एकजुटता भरे प्रदर्शन की कहानी थी।

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उस समय के भारतीय सितारे नहीं होने के बावजूद, महान शेन वार्न की आश्चर्यजनक कप्तानी में, राजस्थान विजयी बना। जबकि उस सीजन को एक कप्तान के रूप में वार्न की प्रतिभा के लिए याद किया जाता है लेकिन तब एक बल्लेबाज भी थे जिनका नाम था- स्वप्निल असनोदकर।

शीर्ष पर ग्रीम स्मिथ और असनोदकर की साझेदारी राजस्थान लाइन अप की एक स्थायी विशेषता बन गई। दोनों ने टूर्नामेंट में सबसे अधिक 59.7 की औसत से 418 रन बनाए। असनोदर, जो तब तक अपेक्षाकृत अनजान थे, ने फ्री फ्लोइंग क्रिकेट खेला, और 9 मैचों में 133.47 के स्ट्राइक रेट से 311 रन बनाए, जिसमें कोलकाता नाइट राइडर्स के खिलाफ डेब्यू पर 34 गेंदों में 60 रन शामिल थे।

हालांकि, जैसा की कई खिलाड़ियों के साथ होता है, स्वप्निल ने हार मान ली और आईपीएल या घरेलू क्रिकेट में अपने प्रदर्शन को दोहरा नहीं सके और धीरे-धीरे दूर हो गए।

2. रजत भाटिया (कोलकाता नाइटराइडर्स, 2012 और 2014)

2. रजत भाटिया (कोलकाता नाइटराइडर्स, 2012 और 2014)

कोलकाता नाइट राइडर्स संभवत: 2008 में सबसे अधिक सम्मोहित करने वाली टीम थी, जिसकी टीम बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान के पास थी, और बंगाल के राजकुमार, सौरव गांगुली कप्तान थे। दुर्भाग्य से, केकेआर हाइप पर खरी नहीं उतरी। उनकी किस्मत बदल गई जब 2011 में, गौतम गंभीर ने पदभार संभाला और केकेआर ने 2012 में अपना पहला खिताब जीता। लेकिन वे वहां नहीं रुके। 2014 में उनका एक और शानदार सीजन था, और अपने पहले 7 मैचों में से सिर्फ 2 में जीत के बावजूद, उन्होंने 9-मैच जीतने का सिलसिला बनाया।

जबकि केकेआर की सफलता का श्रेय सुनील नरेन, उनके कप्तान गंभीर और कई अन्य लोगों को दिया जा सकता है, एक खिलाड़ी जो दोनों सत्रों में पर्याप्त श्रेय नहीं ले सका है वह है रजत भाटिया। 2012 में 17 मैचों में उनके 13 विकेट और 2014 में 12 मैचों में 12 विकेट असाधारण नहीं लग सकते हैं, उन्होंने उन्हें क्रमशः 7.31 और 7.44 की इकॉनमी से किया।

अपने आईपीएल करियर में भाटिया के लिए सबसे निर्णायक स्थिति यह है कि उन्होंने खेल के 6-15 ओवरों के 250 ओवरों की गेंदबाजी की और उनका इकॉनमी केवल 7 की रही। गंभीर ने कोलकाता के ईडन गार्डन्स की धीमी पिचों पर उनका पूरा इस्तेमाल किया। भाटिया कब चुपचाप आकर अपने 4 ओवर के कोटे को पूरा कर जाते थे, पता नहीं लगता था।

3. एस बद्रीनाथ (चेन्नई सुपर किंग्स, 2010 और 2011)

3. एस बद्रीनाथ (चेन्नई सुपर किंग्स, 2010 और 2011)

चेन्नई सुपर किंग्स, एक टीम जो हर सीजन में प्लेऑफ के लिए क्वालीफाई कर चुकी है, उन्होंने अपनी टीमों में कई सुपरस्टार्स लिए हैं। भारतीय सितारों और एल्बी मोर्कल जैसे बड़े हिटिंग खिलाड़ियों के बीच, एक व्यक्ति था जिसने साल-दर-साल एक प्रभाव छोड़ा, 2010-2011 में लगातार जीते दो सत्रों में और कोई नहीं वह आदमी सुब्रमण्यम बद्रीनाथ थे। उन्हें CSK के 'संकटमोचक' के रूप में जाना जाने लगा।

उन्होंने धीमी गति से सीएसके के लिए मध्य ओवरों को नियंत्रित किया। जबकि 2010 के सीजन में, उन्होंने 16 खेलों में 32.36 के औसत से 356 रन बनाए, उन्होंने अगले सत्र में अपने प्रदर्शन को 16 मैचों में 56.57 की औसत से 396 रन बनाकर बेहतर प्रदर्शन किया और 6 बार नाबाद रहे।

बद्रीनाथ वह व्यक्ति थे, जिन्होंने कभी आकर्षक स्ट्रोक नहीं खेला और कभी लाइमलाइट नहीं बटोरी। वह धोनी और रैना जैसे खिलाड़ियों के अनुकूल थे, और यह निश्चित है कि बद्रीनाथ के योगदान के बिना, सीएसके उतने सफल नहीं हो सकते थे, जितने आज हैं।

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Story first published: Wednesday, September 9, 2020, 12:01 [IST]
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