क्रिकेट इतिहास के वो 5 नियम जिनसे खिलाड़ी हुए परेशान, ICC हुआ बदलने को मजबूर

नई दिल्ली। क्रिकेट इतिहास के 143 सालों पर अगर नजर डालें तो पता लगेगा कि शुरुआत में हम जिस तरह के क्रिकेट को खेलते या जानते थे उसकी तुलना में मौजूदा समय का क्रिकेट काफी बदल चुका है। इस दौरान कई नियम जो पहले थे वो या तो बदल दिये गये हैं या फिर हटा दिये गये हैं। क्रिकेट के नियमों को बनाने और उनकी देखभाल करने वाली अंतर्राष्ट्रीय संस्था आये दिन क्रिकेट में बल्लेबाजी और गेंदबाजी में बैलेंस बनाये रखने के लिये नियमों में बदलाव करती नजर आती है।

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हालांकि आज हम क्रिकेट इतिहास के उन 5 नियमों के बारे में बात करने वाले हैं जिन्हें आईसीसी बदलना तो नहीं चाहती थी लेकिन इन नियमों के चलते खिलाड़ियों को इस कदर परेशानी का सामना करना पड़ा कि आईसीसी को मजबूरी में इन नियमों को हटाना पड़ा।

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द सॉगा ऑफ पावरप्ले

द सॉगा ऑफ पावरप्ले

इस फेहरिस्त में हम जिस नियम की बात करने वाले हैं उसका नियम है द सॉगा ऑफ पावरप्ले, यह क्रिकेट के सबसे पुराने नियमों में से एक है तो हो सकता है कि आप इस नियम से परिचित न हों। आईसीसी ने साल 1980 में पॉवर प्ले सागा नियम को लागू किया था जिसके अनुसार बल्लेबाजों और गेंदबाजों को 10-10 ओवर मिलते थे।

इसके तहत पहले 15 ओवर्स में केवल 2 फील्डर्स को इनर सर्किल के बाहर अनुमति दी गई थी जिसके बाद यह जल्द ही पावरप्ले ओवर्स और नियमों में लोकप्रिय हो गये।

साल 2005 में इस नियम ने उस वक्त रोमांचक मोड़ लिया जब पावरप्ले को 3 स्लॉट में बांट दिया जिसमें से पहले 10 ओवर अनिवार्य थे और बाकी के दो पावरप्ले 5-5 ओवर के रूप में बल्लेबाजी और गेंदबाजी टीम के द्वारा चुने जाते थे।

इसके बाद पावरप्ले बल्लेबाजी करने और नॉन-पावरप्ले ओवरों के स्लॉट तय करने के नियम आए लेकिन वे सभी असफल रहे। कुछ उतार-चढ़ाव और बल्लेबाजी और गेंदबाजी पावरप्ले के बीच घमासान के बाद आईसीसी आखिरकार 2015 में 3 निश्चित पावरप्ले नियम लेकर आई, जो आज भी क्रिकेट में लागू होता है।

मैदान पर सुपर सब का नियम

मैदान पर सुपर सब का नियम

इस फेहरिस्त में दूसरा नियम है ‘सुपर सब' जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। साल 2005 में ICC ने एक नियम की पेशकश की थी जिसके अनुसार आईसीसी चाहती थी की हर टीम के पास मैदान पर एक 12वां खिलाड़ी रखने की इजाजत हो, जो कि मैदान पर किसी भी खिलाड़ी की जगह ले सके और खेल सके।

उदाहरण के लिए वह 12वां खिलाड़ी जिसे सुपर सब कहा जाता उसे मैदान पर गेंदबाजी, बल्लेबाजी और फील्डिंग करने की इजाजत मिल जाती। आईसीसी ने यह नियम ऑलराउंडर खिलाड़ियों के महत्व को बढ़ाने के लिए पेश किया था।

हालांकि इस नियम के आने के बात से क्रिकेट जगत में तहलका मच गया था क्योंकि टीमों ने दूसरी पारी में स्पेसलिस्ट खिलाड़ियों को चुनना शुरू कर दिया था। इसके चलते क्रिकेट में टॉस भाग्य भरोसे होने लगा और रणनीतियों खत्म हो गई।

इस नियम की भारी आलोचना हुई और आईसीसी ने 9 महीने बाद इस नियम को हटा दिया।

बॉल आउट नियम

बॉल आउट नियम

इस फेहरिस्त में तीसरा नियम बॉल आउट का है जिसकी जगह पर मौजूदा समय में सुपर ओवर कराया जाता है। इस नियम का नाम सुनते ही फैन्स को भारत-पाकिस्तान के बीच हुये 2007 टी20 विश्व कप का लीग मैच याद आ जाता है जिसे टीम इंडिया ने इसी नियम के तहत जीता था।

इस नियम के अनुसार, दोनों ही टीमों को 6-6 गेंदें दी जाती थी और जो टीम सबसे अधिक बार स्टंप को हिट करती है, उसे विजेता घोषित किया जाता था। लेकिन इस नियम को बाद में आईसीसी ने हटा दिया और अब स्कोर के समान होने पर सुपर ओवर खेला जाता है।

बाउंड्री काउंट नियम

बाउंड्री काउंट नियम

आईसीसी विश्व कप 2019 में इंग्लैंड और न्यूजीलैंड के बीच खेले गए बेहद रोमांचक मुकाबले में पहली बार ऐसी परिस्थिति सामने आई जब सुपर ओवर तक पहुंचा मैच भी टाई हो गया। तब आईसीसी के नियम अनुसार, इंग्लैंड को अधिक बाउंड्रीज लगाने के लिए विजयी घोषित कर दिया गया। मगर इस तरह इंग्लैंड को बाउंड्री नियम से विजेता घोषित करने के लिए आईसीसी को काफी ट्रोल होना पड़ा। इसके बाद आईसीसी ने बाउंड्री नियम को हटा दिया।

अब किसी भी मैच में यदि टीम के स्कोर के बाद खेले गए सुपर ओवर का स्कोर भी बराबर होता है तो दोनों टीमों को अगला यानि दूसरा सुपर ओवर खेलना होगा। टीम तब तक सुपर ओवर खेलेंगी जब तक टीम में से एक विजेता टीम सामने नहीं आती।

कनक्शन का नियम

कनक्शन का नियम

क्रिकेट में कनकशन नियम क्रिकेट की बेहतरी के लिए आया। 2019 एशेज सीरीज में स्टीव स्मिथ के इंजर्ड हो जाने के बाद मार्नस लाबुशेन को कनकशन विकल्प के रूप में ऑस्ट्रेलिय क्रिकेट टीम ने मैदान पर उतारा था।

असल में पहले क्रिकेट में ऐसा कोई नियम नहीं था। असल में सिर की चोटें गंभीर हैं और यदि आप थोड़े साल पीछे जाएं, तो इसने खिलाड़ियों को काफी नुकसान पहुंचाया है। इसलिए इस नियम का खुले हाथों से स्वागत किया गया था। लेकिन, अगर किसी खिलाड़ी का टेस्ट मैच की पहली पारी में हाथ टूटता है, तो एक टीम क्या कर सकती है? यह मैच को 11 पर 10 बना देता है जो बिना किसी संदेह के अनुचित है।

ICC को किसी भी चोट के मामले में समान विकल्प के लिए अनुमति देनी चाहिए जो एक खिलाड़ी को शेष मैच खेलने में असमर्थ बनाता है और इस नियम को केवल चोट के विकल्प का नाम दिया जा सकता है।

Story first published: Thursday, July 16, 2020, 20:56 [IST]
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