बैन के बाद तूफानी अंदाज में लौटे पृथ्वी शॉ, बताया कैसे राहुल द्रविड़ ने वापसी करने में की मदद
नई दिल्ली। अंडर 19 विश्व कप में जीत के हीरो रहे और भारतीय क्रिकेट के उभरते हुए युवा बल्लेबाज पृथ्वी शॉ आखिरकार मैदान पर लौट आये हैं। बैन पदार्थों का सेवन करने के अपराध में 8 महीने का बैन झेल रहे पृथ्वी शॉ ने रविवार को सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में मुंबई की ओर से मैदान पर वापसी की। मैदान पर उतरते ही पृथ्वी शॉ ने यह बता दिया कि वह पिछले कुछ महीनों से रन बनाने के लिये कितने भूखे बैठे थे। मुंबई की ओर से मैदान पर वापसी करते हुए पृथ्वी शॉ ने पहले विकेट के लिये न सिर्फ 138 रनों की साझेदारी की बल्कि महज 32 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया। पृथ्वी शॉ ने 39 गेंदों में 63 रनों की पारी खेली और टीम को जीत दिलाई।
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गौरतलब है कि ड्रग्स का सेवन करने के मामले में पृथ्वी शॉ पर 8 महीने का बैन लगा था। वह पिछले साल सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के दौरान हुए परीक्षण में पॉजिटिव पाये गये थे, जिसका रिजल्ट जुलाई जिसके बाद उन पर 8 महीने का प्रतिबंध लागू हो गया।

राहुल द्रविड़ के चलते कर पाया वापसी
पृथ्वी शॉ ने अपनी जबरदस्त वापसी के पीछे पूर्व भारतीय कप्तान और वर्तमान में नेशनल क्रिकेट अकादमी के मुखिया राहुल द्रविड़ को दिया। मैच के बाद अपनी वापसी को लेकर पृथ्वी शॉ ने कहा कि पिछला कुछ समय में मेरे लिये काफी कठिन था। मैनें कभी नही सोचा था कि मेरे साथ कुछ ऐसा होगा। मैं इससे बेहद निराश था। अगर इस दौरान राहुल द्रविड़ का साथ न होता तो मैं शायद वापसी नहीं कर पाता।
मैच के बाद पृथ्वी ने वापसी पर कहा,' बैन लगने के बाद पहले 20-25 दिन मुझे यह ही नहीं समझ आया कि आखिर यह सब हुआ कैसे। कुछ वक्त के बाद मैं शांति की तलाश में लंदन चला गया क्योंकि 15 सितंबर तक मुझे अभ्यास की अनुमति दी गई थी। मैं बैन को लेकर कुछ नहीं कर सकता था, इसलिये मेरे दिमाग में कुछ भी नहीं आ रहा था।'
उन्होंने कहा,'लंदन से लौटने के बाद मेरे पास राहुल सर (राहुल द्रविड़) का फोन आया। उन्होंने मुझे अपने दिमाग को शांत रहने का तरीका बताया और मेरी ऊर्जा को सही दिशा में लगाने का तरीका भी। मुझे नेशनल क्रिकेट अकादमी से ट्रेनिंग के लिये बुलाया गया जहां पर मैने यो-यो टेस्ट समेत अपने फिटनेस टेस्ट दिये।'

राहुल द्रविड़ के नेतृत्व में जीता था अंडर 19 विश्व कप
भले ही पूर्व कप्तान अपने करियर के दौरान देश के लिये विश्व कप जीत पाने में नाकाम रहे हों लेकिन बतौर कोच राहुल द्रविड़ ने पृथ्वी शॉ की अगुवाई वाली अंडर-19 टीम को विश्व चैम्पियन बनाया। 2018 में हुए इस विश्व कप के फाइनल में भारत ने ऑस्ट्रेलिया को 8 विकेट से हराकर मैच में जीत हासिल की थी।

पिता का भी रहा योगदान
अपनी शानदार वापसी का श्रेय पिता को देते हुए पृथ्वी ने कहा कि पिछले तीन महीने मेरे लिये काफी कठिन थे। इस दौरान मेरे पिता चट्टान की तरह मेरे साथ खड़े थे। इस मुश्किल वक्त में जब मेरे साथ कोई नहीं था तब भी मेरे पिता वैसे खड़े रहे जैसे कि अंडर-14 और अंडर-16 क्रिकेट के दिनों में खड़े होते थे। वह इस बात से वाकिफ थे कि यह वो वक्त जब मुझे उनके साथ की सबसे ज्यादा जरूरत है।
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