IND vs SA: कौन हैं शाहबाज नदीम, जिन्हें तीसरे टेस्ट में मिला कुलदीप की जगह मौका
नई दिल्ली: भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच सीरीज तीसरे और अंतिम टेस्ट से पहले शाहबाज नदीम सुर्खियां बटोर रहे हैं। टीम इंडिया के स्पिनर कुलदीप यादव शुक्रवार को कंधे की चोट के चलते टीम से बाहर हो गये जिसके चलते भारतीय चयनकर्ताओं ने लेफ्ट आर्म स्पिनर शाहबाज नदीम को भारतीय टीम में शामिल किया है। 30 साल के नदीम किसी भी प्रारूप में अनकैप्ड खिलाड़ी हैं लेकिन अब उनका चयन सीधा तीसरे टेस्ट की प्लेयिंग इलेवन में हो गया है। यह ड्रीम डेब्यू नदीम के अंतरराष्ट्रीय करियर को नई उम्मीद देगा।

कौन हैं शाहबाज नदीम?
नदीम मुख्य रूप से एक बाएं हाथ के स्पिनर हैं, लेकिन निचले क्रम में उपयोगी बल्लेबाजी करने में भी सक्षम हैं। नदीम को यह लगातार मजबूत घरेलू प्रदर्शन का इनाम मिला है। 2012/13 सीजन की शुरुआत के बाद से उन्होंने 235 रणजी ट्रॉफी विकेट लिए हैं जो प्रतियोगिता में किसी और से अधिक हैं और इस दौरान उनका गेंदबाजी औसत 25.17 का रहा है। हाल ही में भारत दौरे पर आई दक्षिण अफ्रीका ए टीम और वेस्टइंडीज दौरे पर गई भारतीय ए टीम के लिए नदीम ने शानदार गेंदबाजी करते हुए कई मैचों में जीत दिलाई थी।

कैसे हुई शुरुआत?
शाहबाज शुरू से ही एक होनहार नौजवान रहे हैं, जिन्होंने सिर्फ 15 साल और 114 दिन की उम्र में प्रथम श्रेणी में प्रवेश किया। उस खेल में, रणजी ट्रॉफी में केरल के खिलाफ, उन्होंने 52 ओवरों में सिर्फ 96 रन दिए थे। उन्होंने बल्ले के साथ भी खेल दिखाया, 99 गेंदों में 25 रन बनाकर वे उस मैच में शामिल उन चार खिलाड़ियों में से एक थे जिन्होंने झारखंड के लिए 10 से ज्यादा का स्कोर किया। दो महीने बाद उन्होंने भारत के लिए अंडर -19 में पदार्पण किया। इसके दो साल पहले ही अंडर -15 का प्रतिनिधित्व किया था। उन्होंने टेस्ट और एकदिवसीय मैचों में U19 की ओर से 50 विकेट लिए। इन 50 विकेटों में से 31 विकेट उनके U19 टेस्ट मैचों में आए। उस बीच में भी उन्होंने इंडिया बी के खिलाफ लिस्ट ए गेम में भारत ए के लिए उपस्थिति दर्ज कराई।

करियर को कैसे मिली रफ्तार-
यह 2011/12 का समय था जब उन्होंने तेजी से अपने करियर में तरक्की की। उनको 2011 में दिल्ली डेयरडेविल्स के साथ एक आईपीएल अनुबंध मिल गया, लेकिन उनके लिए उस सीजन में करने के लिए कुछ खास नहीं रहा क्योंकि डेयरडेविल्स ने तेज गेंदबाजों पर आधारित रणनीति का विकल्प चुना था। सीजन 2012 में वह अधिक नियमित रूप से दिखाई देने लगे, और दिल्ली के लिए गेंदबाजी करने वाले खिलाड़ियों में उनका इकोनॉमी तीसरा बेस्ट साबित हुआ। 2013 में उन्होंने और भी बेहतर किया - पूरे टूर्नामेंट में केवल दो गेंदबाजों ने नदीम के 5.88 के इकोनॉमी रेट से बेहतर गेंदबाजी की थी। उनका प्रथम श्रेणी प्रदर्शन भी साल-दर-साल सुधारता गया। उन्होंने लगातार सीजनों में 50 या उससे ज्यादा विकेट लिए। 51 विकेट जहां 2015/16 में आए तो 56 विकेट 2016/17 में आए। वह 2017 में भारत ए के लिए एक नियमित खिलाड़ी बन गए, और उस वर्ष 25 मैचों में 87 विकेट लिए। 2018 में शाहबाज़ ने 8-10 के शानदार स्पेल के साथ सबसे बेहतरीन लिस्ट ए गेंदबाजी की।

सामने क्या हैं चुनौतियां-
अब तीस की उम्र को ध्यान में रखते हुए शाहबाज को उस छोटे से अवसर को भी भुनाना होगा जो उनको मिल रहा है। टीम इंडिया में इस समय जबरदस्त बेंच स्ट्रेंथ मौजूद हैं और जब इतने सारे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की मौजूदगी होती है तो चयनकर्ताओं के लिए सबको मौका देने की चुनौती होती है। "मैं अक्सर अकेला अपने कमरे में इस बात से जूझता हूं कि भारत के लिए खेलने के लिए मुझे और क्या करने की आवश्यकता है? लेकिन फिर, जब मेरे पिता के शब्दों का ख्याल आता है - 'अगर यह आपके भाग्य में लिखा है, तो आप भारत के लिए खेलेंगे।' नदीम ने यह बात तब कही थी जब उन्होंने लिस्ट ए में रिकॉर्ड तोड़ गेंदबाजी की थी।
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