भारत को भारी पड़ा खेलों का आयोजन

By Staff
डेविड बाँड

बीबीसी खेल संपादक

दुनियाभर में जिस तरह खेलों को टेलिविज़न और मीडिया पर दिखाने का चलन बढ़ रहा है उसने कई देशों को ये मौका दिया है कि वो दुनियाभर में देखे जाने वाले खेलों के ज़रिए अपनी अंतरराष्ट्रीय छवि को बेहतर बनाएं.

ऐसे में ये बात हैरान करने वाली नहीं कि दुनिया के पटल पर तेज़ी से उभर रही अर्थव्यवस्थाएं भारत, ब्राज़ील, रुस और चीन प्रतिष्ठित खेलों के आयोजन के लिए सबसे बड़े दावेदार के रुप में देखे जाते हैं.

अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति ने 2008 में ओलंपिक खेलों का ज़िम्मा चीन को देकर इस दावेदारी को हरी झंडी दिखाई. ब्राज़ील 2014 में विश्व कप आयोजित करेगा और रियो-डी-जनेरो में 2016 के ओलंपिक खेलों का आयोजन होगा.

कॉमनवेल्थ खेलों की मेज़बानी के ज़रिए इसी तर्ज पर भारत ने भी दुनिया के सामने अपनी लचर राजनीतिक व्यवस्था और भ्रष्टाचार की छवि को पीछे छोड़ने की एक कोशिश की.

ये भारत का दुर्भाग्य है कि कॉमनवेल्थ खेलों के आयोजन ने उन्हें दिखा दिया कि मीडिया के इस्तेमाल और विश्व स्तर पर खेलों की मेज़बानी का एक काला पक्ष भी है.

खेलों की शुरुआत से ठीक पहले दुनियाभर की मीडिया में जहां भारत के चमचमाते स्टेडियम और सुविधाओं से संतुष्ट खिलाड़ियों की तस्वीरें होनी चाहिए थीं वहीं भारत ने पिछले 24 घंटों के दौरान टीवी चैनलों पर एक के बाद एक लगातार मीडिया का एक डरावना चेहरा देखा.

भारत सरकार के सभी इंतज़ाम अगर बेहतरीन होते तो दुनिया चुपचाप अपने घरों में बैठकर उनकी सराहना करती, लेकिन सरकार की गलतियों को मीडिया ने दुनियाभर में चौबीसों घंटे लगातार दिखाया.

मुमकिन है कि दिल्ली में होने वाले खेल बिना किसी दिक्कत आसानी से निपट जाएं. हमें भूलना नहीं चाहिए कि इस साल दक्षिण अफ्रीका में हुए विश्वकप से पहले भी इस तरह की दिक्कतें सामने आई थीं, लेकिन ये आयोजन बिना किसी रुकावट निपट गए.

ज़ाहिर है दिल्ली के हालात इससे अलग हैं. इस तरह के आयोजनों में स्टेडियम और निर्माण का काम अमूमन समय से काफी पहले पूरा हो जाता है. भारत सरकार ने कॉमनवेल्थ खेलों के लिए आठ नए खेल परिसर बनाए हैं जिन पर 1.5 अरब पाउंड खर्च किए गए हैं.

स्टेडियम के समय से न पूरा होने से बड़ा सवाल अब इनकी सुरक्षा को लेकर है क्योंकि मंगलवार को एक स्टेडियम के पास बनाया जा रहा पुल अचानक ढह गया. निर्माण का काम इतनी देर से खत्म हुआ है कि आयोजन समिति को सुरक्षा के जो प्रमाण पत्र दिए गए हैं उन्हें लेकर भी आशंकाएं बढ़ गई हैं.

माना जा रहा था कि 2010 कॉमनवेल्थ खेलों के लिए दिल्ली की मेज़बानी 2020 में ओलंपिक के लिए भारत की दावेदारी को मज़बूत बनाएगी. ज़ाहिर है आयोजन समिति अगले 10 दिनों में भारत में कोई करिश्मा दिखा दे तब भी ये दावेदारी खटाई में पड़ती नज़र आती है.

तो क्या कॉमनवेल्थ खेलों का सफल आयोजन हो पाएगा ?

फिलहाल परिस्थितियों को देखकर तो यही लगता है कि खेल आयोजित भी होंगे. भले ही फिलिप इडू जैसे कई नामी खिलाड़ियों ने न सिर्फ भारत की मेज़बानी पर बल्कि कॉमनवेल्थ खेलों के आयोजन पर भी सवाल उठाया है.

आयोजन तभी रुकेगा जब स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर कोई बड़ा संकट खड़ा हो जाए या फिर टीमें बड़ी संख्या में नाम वापस ले लें. कूटनीति और भारत के साथ संबंधों के लिहाज़ से ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड, ब्रिटेन और कनाडा जैसे देशों का इस आयोजन से नाम वापस लेना बेहद खराब होगा.

जो भी हो, भारत के अनुभव ने ये दिखा दिया है कि इस तरह की कोशिशों को लेकर किसी भी देश से हुई गलती कितनी भारी पड़ती है.

Story first published: Friday, September 24, 2010, 15:09 [IST]
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