
चोट के बाद पहले जैसे नहीं रह जाते तेज गेंदबाज-
ऐसे में जब सब भारतीय क्रिकेट फैंस बुमराह की शानदार वापसी की दुआ मना रहे हैं तो एक पूर्व भारतीय पेसर ने बुमराह को ऐसी सलाह दे ही जिसको मानकर वे अपने आगे के करियर को चोटों से बचाने की कोशिश कर सकते हैं। बुमराह की पीठ में हल्का स्ट्रैस फ्रैक्चर पाया गया है जो भले ही कुछ दिनों के आराम के बाद ठीक हो जाएगा लेकिन आने भविष्य को देखते हुए यह सवाल उठना लाजिमी है कि बुमराह किस तरह से अपने आपको चोटों से बचाए रख सकते हैं। उनका एक्शन जिस तरह का है उसको देखते हुए उनका चोटिल हो जाना बहुत मुश्किल नहीं हैं। ऐसे में मनोज प्रभाकर ने बताया है बुमराह के एक्शन में ही दिक्कत है क्योंकि यह एक्शन तेज गेंदबाजी करने के लिए नहीं बना है।

'छोटा रन-अप बना मुसीबत'
भारत के पेस ऑलराउंडर रहे प्रभाकर ने बताया है कि मोहम्मद शमी तक चोटिल होने के खतरे पर हैं। मनोज प्रभाकर ने कहा कि 'उनका (बुमराह) रनअप बहुत ही छोटा है, जिससे सारा भार उनकी पीठ के निचले हिस्से पर पड़ता है। एक गेंदबाज के रूप में आपको बैक अप की जरूरत होती है। जब आप एक भाला फेंक रहे हैं तब भी डिलवरी पॉइंट की ओर आपका रन-अप मोमेंटम को बनाता है। बुमराह तो भागते ही नहीं हैं, ऐसे में वे कैसे बच पाएंगे? लिली, कपिल देव और इमरान खान जैसे सभी गेंदबाजों के पास अच्छा बैकअप था। मनोज प्रभाकर ने आगे कहा कि ' आपकी पीठ हमेशा ओपन चेस्ट वाले एक्शन से पीड़ित होती है। उन्हें बहुत सावधानी बरतनी होगी और थोड़ा-थोड़ा रनअप करना होगा। आप इस एक्शन के साथ आराम से नहीं रह सकते हैं क्योंकि ये ना तो राउंड-आर्म है और ना ही साइन-ऑर्म है। ये उन्हें तेजी से गेंदबाजी करने के लिए मजबूर करता है जिससे पीठ पर बहुत ज्यादा दबाव पड़ता है।'
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बुमराह ऐसे कर सकते हैं बचाव-
मनोज प्रभाकर कहना है कि एक गेंदबाज जो बिना किसी खास रन-अप के हाई-आर्म, ओपन-चेस्ट एक्शन रखता है, वह बिना किसी रिस्क के आउटस्विंग गेंदबाजी कर ही नहीं सकता। प्रभाकर ने कहा कि बुमराह और भारतीय टीम प्रबंधन को शेन बॉन्ड और डेनिस लिली जैसे गेंदबाजों की केस स्टडी करनी चाहिए। लिली ने तो बाद में अपने एक्शन में सुधार करके क्रिकेट में जबरदस्त वापसी की थी। प्रभाकर ने कोर्टनी वाल्श का उदाहरण देते हुए कहा कि वे भी ओपन-चेस्ट के साथ गेंदबाजी करते थे लेकिन वे कलाई का इस्तेमाल करते थे और उनके पास अच्छा रन-अप था। बुमराह को ये सब बदलने की जरूरत है। इसके अलावा प्रभाकर का कहना है- 'टी20 क्रिकेट में चोट लगने की संभावना ज्यादा रहती है। उन्होंने कहा ये इसलिए होता है कि आप चार ओवरों को दो-दो ओवर के स्पेल में बांट देते हैं। लंबे फॉर्मेट में, आप एक साथ 6-7 ओवर फेंकते हैं और शरीर गर्म होता है। टी20 में ऐसा नहीं होता है।'


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