पिछले 7 सालों से क्यों भारतीय टीम से जुड़े हुए हैं रवि शास्त्री, पूर्व सीएसी सदस्य का खुलासा
नई दिल्ली। भारत और इंग्लैंड के बीच जारी 5 मैचों की टेस्ट सीरीज का पहला मैच नॉटिंघम के मैदान पर खेला जा रहा है, जहां पर कोच रवि शास्त्री के नेतृत्व में भारतीय टीम जीत की ओर बढ़ रही है। रवि शास्त्री भारतीय टीम के साथ 2014 के बाद से लगातार टीम के साथ किसी न किसी रूप में जुड़े हुए हैं लेकिन बतौर कोच उन्होंने साल 2017 में टीम की कमान संभाली। हालांकि जब 2019 में उनका करार खत्म होने को आया तो क्रिकेट एडवाइजरी समिति को नये कोच को ढूंढने की जिम्मेदारी दी गई।
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2019 विश्वकप के सेमीफाइनल मैच से बाहर होने के बाद भारतीय हेड कोच के कई दावेदारों ने एप्लाई भी किया था। इस दौरान माइक हेसन और टॉम मूडी भारतीय टीम के कोच बनने के सबसे प्रबल दावेदार थे, जबकि सीएसी ने रॉबिन सिंह और लालचंद राजपूत का भी इंटरव्यू भी लिया। फिल सिमन्स ने कोचिंग रेस से अपना नाम वापस ले लिया था लेकिन उसके बावजूद कड़ी स्पर्धा नजर आ रही थी।
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सीएसी ने रवि शास्त्री को दोबारा कोच बनाकर किया हैरान
हालांकि जब सीएसी के चेयरमैन कपिल देव ने अंशुमन गायकवाड़ और शांता रंगास्वामी के साथ शास्त्री को विजेता घोषित किया तो बहुत सारे लोग हैरान रह गये। लेकिन रवि शास्त्री ने बतौर क्रिकेटर, कॉमेंटेटर, आईसीसी क्रिकेट समिति के सदस्य, टीम डायरेक्टर के अनुभव के साथ बाकी दावेदारों को पीछे धकेल दिया। ऐसे में लोगों की हैरानी का जवाब सीएसी के सदस्य रह चुके अंशुमन गायकवाड़ ने 2 साल बाद दिया है।
अंशुमन गायकवाड़ ने 2019 में रवि शास्त्री को फिर से कोच बनाने को लेकर खुलासा करते हुए बताया कि क्यों इतने बड़े नाम होने के बावजूद रवि शास्त्री को दूसरा टर्म दिया गया। गायकवाड़ ने बताया कि रवि शास्त्री के पहले टर्म की सफलताओं में चैम्पियन्स ट्रॉफी के फाइनल और विश्व कप के सेमीफाइनलिस्ट टीम बबनाने के अलावा भी कुछ कारक रहे जिसने शास्त्री के फेवर में काम किया।

गायकवाड़ ने बताया क्यों चुने गये रवि शास्त्री
उन्होंने कहा,' देखिये रवि के पास कोचिंग जॉब में बाकी सभी खिलाड़ियों के मुकाबले बढ़त थी। मैंने, कपिल देव और शांता ने मिलकर चयन किया था। वह लंबे समय से क्रिकेट में बतौर कॉमेंटेटर जुड़े हुए थे। उन्होंने दुनिया भर में क्रिकेट को करीब से देखा है। वह अच्छे से जानते थे कि चीजें कैसी होने वाली हैं, जीत रहे हो या फिर हार रहे हों, उन्हें पता होता था कि परिस्थितियां कैसे बदली जा सकती हैं और उसके लिये क्या करना चाहिये। वह खिलाड़ियों के साथ लंबे समय से थे और वो खिलाड़ियों को अच्छे से जानते थे और खिलाड़ी उन्हें, आप इससे ज्यादा क्या चाहते हैं।'
गौरतलब है कि यूएई में खेले जाने वाले टी20 विश्वकप के बाद रवि शास्त्री का कार्यकाल खत्म होने वाला है, ऐसे में नये कोच को लेकर बीसीसीआई के दिमाग में क्या चल रहा है, किसी को नहीं पता है। क्या राहुल द्रविड़ को नये कोच के रूप में चुना जायेगा या फिर कोहली-शास्त्री की जोड़ी को फिर से मौका मिलेगा जिसने पिछले कुछ सालों में काफी शानदार प्रदर्शन किया है।

कोहली-शास्त्री की जोड़ी से भारत को हुआ है फायदा
गायकवाड़ ने इसको लेकर बात करते हुए कहा,'लोगों को एक गलतफहमी है कि सिर्फ कोच और कप्तान की जोड़ी काम करती है जबकि यह कोच और पूरी टीम का काम होता है। एक कप्तान अकेले सबकुछ नहीं कर सकता है। यह मेरा अनुभव कहता है। जब मैं भारतीय टीम का कोच था तो मेरे पास टीम के सबसे बेहतरीन खिलाड़ी थे तेंदुलकर, अजहरुद्दीन, लक्ष्मण, सौरव, राहुल, वहीं पर गेंदबाजी में अनिल, श्रीनाथ, वेंकटेश प्रसाद और इसने काम किया।'
गायकवाड़ ने कहा कि कोच के लिये इतने बड़े खिलाड़ियों को एक साथ रखना जरूरी था और फोकस रखना जरूरी थी, हालांकि इस समय की सबसे खास बात यह थी कि विराट ने अपने प्रदर्शन और फिटनेस के साथ सभी की फिटनेस को इंप्रूव करने पर काम किया है। अगर वो ऐसा रखने में नाकाम रहते हैं तो दूसरे खिलाड़ी अपनी बारी का इंतजार कर रहे होते हैं।
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