
नहीं रहा उनका योगदान
बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने आईएएनएस से बात करते हुए पुष्टि की है कि करीम की स्थिति संदेह के घेरे में है क्योंकि कई ऐसे मुद्दे भी सामने आ चुके हैं जो अधूरे रह गए हैं जो जीएम क्रिकेट संचालन के दायरे में आते हैं और आर्थिक स्थिति को देखते हुए जल्द ही इस पर सख्त कदम उठाए जाने की संभावना है। अधिकारी ने कहा, "ये अभूतपूर्व समय हैं और हम सभी जानते हैं कि आपको वास्तव में बॉक्स से बाहर सोचना होगा और आपको इसके बारे में नैदानिक होना होगा। हमें यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि हम इस महामारी से खेल को कम से कम नुकसान पहुंचाएं। हम अधिकारियों और पदाधिकारियों के बीच बहुत विचार-विमर्श करते रहे हैं और अपने स्वयं के विचार भी साझा कर रहे हैं। जिन क्षेत्रों पर ध्यान देने की आवश्यकता है, उन क्षेत्रों में हमारी चर्चाओं में दुख की बात यह है कि उनका योगदान टारगेट तक नहीं रहा है।''

अब बोझ नहीं ढोना चाहते
अधिकारी ने आगे कहा, "यह एकमात्र मुद्दा नहीं है। जहां तक राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी की बात है तो अब यह राहुल द्रविड़ और केवीपी पर है, इन लोगों को वो जिम्मेदारियां दी गई हैं जो पहले सबा करीम के पास थीं। अंपायर अकादमी, जिसकी जिम्मेदारी सबा पर थी, वो खत्म हुए बराबर है। ऐसे में जब लोग दोगुना काम कर रहे हैं और ज्यादा से ज्यादा जिम्मेदारियां ले रहे हैं, जो ऐसा नहीं कर रहे हैं उन्हें कुछ तो झेलना होगा क्योंकि बोझ कोई ढोना नहीं चाहता।

महिला टीम ने भी रखे थे मुद्दे
इसके अलावा अधिकारी ने यह भी खुलासा किया कि करीम के अंडर में आने वाली महिला टीम ने कई बार बोर्ड के सामने अपने मुद्दे रखे हैं। अधिकारी ने कहा, ''महिला टीम, सपोर्ट स्टाफ और महिला चयन समिति के निवर्तमान सदस्य ने कई बार उनके बुरे व्यवहार और दखल की शिकायत कई बार की है। हम ये अच्छी तरह से समझते हैं कि सबा करीम पूर्व चयनकर्ता रह चुके हैं लेकिन उन्हें समझना होगा कि वह इस समय चयनकर्ता नहीं है और चयन संबंधी मुद्दों में दखलअंदाजी करना उनका अधिकार नहीं है।


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