
गुरुद्वारे में रुके थे
इंग्लैंड के खिलाफ चौथे मैच में वीवीएस लक्ष्मण के साथ कमेंट्री के दौरान अपने पहले ट्रायल की यादों को साझा करते हुए हरभजन सिंह ने कहा कि मैं अपना पहला ट्रायल बस की छत पर बैठकर देने के लिए गया था। मैं अपने कुछ दोस्तों के साथ ट्रायल देने के लिए गया था। जब हम वहां पहुंचे तो हमसे पूछा गया कि आपके पास किसी असोसिएशन का लेटर वगैरह है, हमने कहा नहीं है, लेकिन फिर भी हमे ट्रायल देने गया। उन लोगों ने कहा कि ये लड़के इतनी दूर से आए हैं, इन्हें ट्रायल देने देते हैं। हम वहां गुरुद्वारे पर रुके थे और फिर हमने ट्रायल दिया।

500 से ज्यादा लोग ट्रायल देने पहुंचे
हरभजन सिंह ने बताया कि उस ट्रायल में 500 से ज्यादा लोग थे, पहले दिन जब हमने ट्रायल दिया तो वह ट्रायल तीन दिन चला, पहले दिन 36 लोगों का चयन हुआ, उसमे मेरा भी नाम था। मेरे दोस्त ने कहा कि तेरा नाम आ चुका है तुझे अगला ट्रायल देना चाहिए। मैंने कहा कि मैं तो घूमने आया था मैं भी वापस चलता हूं तुम लोगों के साथ। लेकिन मेरे दोस्त ने मुझसे कहा कि तुम्हारा नाम लिस्ट में आया है, लिहाजा तुम्हें अगला ट्रायल देना चाहिए।

अखबार में देखकर पहुंचे ट्रायल देने
अपने पहले ट्रायल की यादों को साझा करते हुए हरभजन सिंह ने कहा कि उस वक्त ट्रायल की जानकारी हमे न्यूज पेपर से मिलती थी। हमने न्यूज पेपर में ट्रायल की खबर पढ़ी और बस की छत पर बैठकर ट्रायल देने के लिए पहुंच गए थे। लेकिन आज के समयतो माता-पिता खुद अपने बच्चों को ट्रायल में लेकर आते हैं। उन्हें जानकारी होती है कि कहां पर ट्रायल चल रहे हैं। हमारे समय में ऐसा नहीं होता था। वहीं हरभजन सिंह के सफर की तारीफ करते हुए वीवीएस लक्ष्मण ने कहा कि यह आसान नहीं होता है, आपको मेहनत करना जरूरी होता है। प्रदर्शन खराब और अच्छा होता है, लेकिन आपके अंदर जुनून है तो आपको धैर्य रखना चाहिए और मेहनत करनी चाहिए।


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