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युवराज के संन्यास पर वायरल हो रहा है हार्दिक पांड्या का यह ट्वीट

नई दिल्ली। युवराज सिंह को संन्यास के बाद उनके खेलने के जुनूनी अंदाज और बेमिशाल प्रतिभा के अलावा मस्तमौला स्वभाव के लिए भी याद किया जाएगा। युवराज एक हंसमुख किस्म के बहुत ही जिंदादिल क्रिकेटर रहे हैं। उन्होंने मैदान पर तनाव के क्षणों में भी कई मौकों पर अपनी चिर-परिचित मुस्कान गायब नहीं होने दी। आज टीम इंडिया में युवराज के जैसे ही हंसी-मजाक वाले स्वभाव के क्रिकेटर हैं हार्दिक पांड्या।

मस्तमौला हार्दिक के मस्त युवी 'पा'

पांड्या ने युवराज को उनके संन्यास पर संदेश भी अलग अंदाज में किया है। एक तरफ जहां सभी बाकि क्रिकेटर युवी को उनको यशसवी करियर और आगे के जीवन के लिए बधाईयां दे रहे थे तो वहीं हार्दिक ने युवराज को हंसकर विदाई दी है। उन्होंने हंसकर आंखों में पानी निकलने वाली इमोजी के साथ अपने 'पाजी' को विदा किया और कहा कि वे मैदान में युवराज की मजाकिया भाव-भंगिमाए हमेशा याद करेंगे। इस दौरान पांड्या ने युवराज के साथ अपनी एक फोटो भी शेयर की है जिसमे दोनों खिलाड़ी मस्तमौला अंदाज में क्रिकेट के किसी मौके पर प्रतिक्रिया दे रहे थे।

कोहली-युवराज का जुनूनी कनेक्शन-

कोहली-युवराज का जुनूनी कनेक्शन-

युवराज ने अपने जिस अंदाज से भारत में क्रिकेट खेलने का अंदाज बदला था उसके विस्तृत स्वरूप की अभिव्यक्ति आज भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली के रूप में हो रही है। आपको बता दें कि भारतीय क्रिकेट के स्टार बल्लेबाज रह चुके युवराज ने सोमवार को बड़ा धमाका करते हुए औचक संन्यास की घोषणा कर दी। हालांकि यह घोषणा अप्रत्याशित नहीं थी लेकिन भारतीय क्रिकेट के एक अध्याय को हमेशा के लिए समाप्त कर दिया है। जी हां, यह सच है कि टीम इंडिया में अब 12 नंबर की जर्सी में युवराज सिंह खेलते हुए नहीं दिखाई देंगे। गौरतलब है कि युवराज की जर्सी का नंबर भी 12 था।

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बतौर अंतराष्ट्रीय क्रिकेटर युवराज के अंतिम शब्द-

बतौर अंतराष्ट्रीय क्रिकेटर युवराज के अंतिम शब्द-

इसी बीच जब युवराज ने संन्यास लिया तो उनके शब्द कुछ इस तरह से थे- "इस खेल के प्रति मेरी भावना को शायद मैं शब्दों में नहीं बता सकता लेकिन इस खेल ने मुझे लड़ना सिखाया, मुझे जीना सिखाया, गिरकर उठना सिखाया और कैसे कठिन परस्थितियों से लड़ना सिखाया। मैं जीवन में सफल होने से अधिक असफल हुआ लेकिन मैं ने कभी जीवन में हार नहीं मानी और जब तक सांस है तब तक न कभी हार मानूंगा। क्रिकेट ने मुझे सबसे अधिक यही सिखाया है। मैं ने अपने जीवन में क्रिकेट को अपना दिल और अपनी जान सब कुछ दिया जब से मैं ने इसे चुना और खासकर तब जब मैं ने अपने देश का नेतृत्व किया। मैं ने बचपन से अपने पिता के लिए एक सपना देखा कि मैं वर्ल्ड कप खेल सकूं और जीत पाऊं, मुझे इस बात की खुशी है कि मैं उनका यह सपना पूरा कर सका।"

Story first published: Monday, June 10, 2019, 22:34 [IST]
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