नई दिल्ली। विश्वकप 2015 को शुरू होने में चंद दिन ही बचे हैं, जहां एक बार फिर से पूरा भारत चाहता है कि टीम इंडिया वापस खिताब पर कब्जा करे वहीं दूसरी ओर विश्वकप 2015 के ठीक पहले कप्तान धोनी का वो राज खुला है जो कि उन्होंने चार साल से अपने दिल में कैद कर रखा था।
The Cricket Fanatic's Essential Guide किताब में खुलासा हुआ है कि धोनी साल 2011 का विश्वकप जीतने के बाद फूट-फूट कर रोये थे। यह किताब विमल कुमार ने लिखी है जो कि विश्वकप 2015 के ठीक पहले रिलीज हुई है।
किताब के अनुसार धोनी ने विमल से कहा था कि जब हम साल 2011 का फाइनल जीत गये तो सचिन और युवराज दोनों ने मुझे गले लगा लिया था। युवी और सचिन के तो आंसू थम ही नहीं रहे थे लेकिन मुझे तो समझ में ही नहीं आ रहा था कि मैं कैसे रियेक्ट करूं। मैं तुरंत ड्रेसिंग रूम की ओर भागा और अपने आप को कमरे में बंद कर लिया ताकि कोई मुझे रोते हुए देखे नहीं। मैं इससे पहले किसी भी मैच में, चाहे वो जीत कर आया हूं या फिर हार कर आया हूं, कभी रोया नहीं था।
लेकिन शायद यह विश्वकप था जो हमारे लिए प्रतिष्ठा की बात थी क्योंकि पूरा देश हमसे यह अपेक्षा कर रहा था कि हम जीतेंगे और हम जीत चुके थे। यह केवल देशवासियों के लिए था। धोनी ने कहा कि हमारी पूरी टीम के लिए जीत का लम्हा बेहद भावुक था। खिलाड़ी, मेंटर और टीम इंडिया से जुड़े हर सदस्य की आंखे मारे खुशी से छलछला रही थी।
विश्वकप से प्रतिष्ठा जुड़ी थी
सबको लगता है कि खिलाड़ी पैसे वाले होते हैं और उनके लिए जीत-हार का मतलब केवल एक मैच होता है लेकिन टीम इंडिया के लिए हर चीज दिल से जुड़ी होती है और जिसका नतीजा था कि हम सभी जीत के बाद रो पड़े।