नई दिल्ली। आईसीसी के सीईओ मनु साहनी को उनका कार्यकाल खत्म होने से पहले ही छुट्टी पर भेज दिया गया है। आंतरिक जाच में मनु साहनी पर संगीन आरोप लगे हैं, जिसके बाद उन्हें छुट्टी पर भेजा गया है। ऑडिट फर्म प्राइस वाटर हाउस कूपर्स की आंतरिक जाच में साहनी का आचरण संदेह के घेरे में आया है, जिसके बाद उन्हें छुट्टी पर भेज दिया गया, माना जा रहा है कि अपना कार्यकाल पूरा होने से पहले ही मनु साहनी अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं। बता दें कि मनु साहनी को 2019 में डेव रिचर्ड्सन की जगह आईसीसी का मुख्य कार्यकारी अधिकारी बनाया गया था, उनका कार्यकाल 2022 तक का था। लेकिन उनपर लगे आरोपों के बाद साहनी को छुट्टी पर भेज दिया गया है।
आरोप है कि मनु साहनी ने साथी कर्मचारियों के साथ कठोर बर्ताव किया, जिसके बाद साहनी समीक्षा के दायरे में आए। पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार आईसीसी के कई कर्मचारियों ने प्रमाण दिए हैं कि मनु साहनी का बर्ताव बहुत ही कठोर है, ऐसे में उनके इस बर्ताव से कर्मचारियों का मनोबल नीचे गिरता है। जिसकी वजह से मनु साहनी को सीईओ के पद से हटा दिया गया है। पिछले कुछ समय से मनु साहनी कार्यालय भी नहीं आ रहे थे। सूत्रों की मानें तो निदेशक मंडल इस मामले में समझौते का रास्ता ढूंढ़ रहा है ताकि साहनी पद से इस्तीफा देकर गरिमा के साथ विदा हो सके।
आईसीसी के अधिकारी ने कहा कि हां, उन्हें छुट्टी पर भेज दिया गया है क्योंकि पिछले 12 महीनों से उनका बर्ताव ठीक नहीं रहा है, वो आईसीसी के काम करने के तरीके से संतुष्ट नहीं हैं। आईसीसी स्टाफ ने भी इस बात की पुष्टि की है कि उनका बर्ताव ठीक नहीं है। बता दें कि साहनी को हटाने के लिए 17 में से 12 वोट की जरूरत है। रिपोर्ट के अनुसार साहनी को बोर्डके अंदर 9 लोगों का समर्थन हासिल है।