
टैक्स छूट को लेकर लगातार चल रही थी तकरार
बीसीसीआई और आईसीसी के बीच टी20 विश्व कप के आयोजन को लेकर जो सबसे बड़ा मुद्दा था वो है भारत सरकार की ओर से टैक्स में छूट दिये जाने का, इसके अनुसार आईसीसी ने मेजबानी के साथ ही बीसीसीआई से कर में छूट की मांग की थी जो अगर बोर्ड सरकार से दिला पाने में नाकाम रहती तो उसे अपनी जेब से लगभग 220 करोड़ रुपये आईसीसी को देने पड़ते। बीसीसीआई की ओर से इस मुद्दे पर आईसीसी को आखिरी जवाब में फरवरी 2021 में देना था हालांकि भारत सरकार की ओर से लगातार जवाब न मिल पाने के चलते बीसीसीआई लगातार समय मांगती रही। हाल ही में बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली और सचिव जय शाह इस मुद्दे को लेकर सरकार से मिले, जहां पर उन्हें टैक्स में छूट देने से इंकार कर दिया गया। ऐसे में बीसीसीआई के पास 2 ही रास्ते थे या तो वो 220 करोड़ रुपये अपनी जेब से आईसीसी को भरे या फिर आयोजन स्थल में बदलाव करे।

स्टेट एसोसिएशन की खुश करने की झंझट
टी20 विश्व कप को यूएई में शिफ्ट करने का दूसरा बड़ा कारण है स्टेट एसोसिएशन की राजनीति से बचना। बीसीसीआई ने हाल ही में आईपीएल 2021 को भारत में आयोजित कराने की कोशिश की थी। पहले इसका आयोजन सिर्फ 3 शहरों में होना था लेकिन हर क्रिकेट राज्य संघ की ओर से मेजबानी हासिल करने की दावेदारी के दबाव के चलते इसे बढ़ाकर 6 शहरों में कर दिया गया। नतीजा पहले लेग के बाद कोरोना वायरस का प्रकोप बायोबबल के अंदर भी देखने को मिला। ऐसे में बीसीसीआई ने टी20 विश्व कप को 9 शहरों में आयोजित करने का प्लान था जिसे बदलना उसके लिये मजबूरी बन चुका था। अगर बीसीसीआई को विश्व कप का आयोजन कराना था तो उसे दो से 3 शहरों में सीमित करना जरूरी था, हालांकि बीसीसीआई अगर किसी एक स्टेट एसोसिएशन को जिम्मेदारी देती तो बाकी के नाराज हो जाते। ऐसे में बीसीसीआई के लिये कोरोना वायरस के प्रकोप से बचने और स्टेट एसोसिएशन की खुशामद न करने के लिये आयोजन स्थल में बदलाव करना ही सही विकल्प था।

आईपीएल में विदेशी खिलाड़ियों को शामिल करने का दबाव
गौरतलब है कि बीसीसीआई के लिये आईपीएल के बचे हुए मैचों का आयोजन करना बेहद जरूरी हो गया था क्योंकि अगर वो ऐसा करने में नाकाम रहती है तो उसे लगभग 2 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो जायेगा। इसी को देखते हुए बीसीसीआई ने इंग्लैंड दौरे के बाद और टी20 विश्व कप से पहले के विंडो में बचे हुए मैचों का आयोजन कराने का फैसला किया। बीसीसीआई ने विंडो और जगह का चयन तो कर लिया लेकिन विदेशी खिलाड़ियों का इस टूर्नामेंट में खेलना थोड़ा मुश्किल नजर आ रहा था। आईपीएल में भाग लेने के तुरंत बाद विदेशी खिलाड़ियों का टी20 विश्व कप के लिये अपनी टीमों से जुड़ना और मौजूदा क्वारंटीन नियमों को देखते हुए ट्रैवल करना एक टेढ़ी खीर बनता जा रहा था।
ईसीबी और बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड की ओर से अपने खिलाड़ियों को आईपीएल में न भेजने के फैसले के बाद बीसीसीआई के लिये बाकी खिलाड़ियों को आईपीएल में शामिल करना जरूरी हो गया। ऐसे में बीसीसीआई के लिये सबसे आसान था कि आईपीएल और टी20 विश्वकप का आयोजन एक ही जगह पर किया जाये, ताकि आईपीएल में शामिल होने वाले खिलाड़ी ज्यादा यात्रा करने से बच सकें और एक बायोबबल से दूसरे बायोबबल में आसानी से प्रवेश कर सकें।


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