
रविचंद्रन अश्विन: दिग्गजों से भी आगे
सभी दबाव और अपेक्षाओं को हम एक तरफ रखकर अश्विन की महानता पर बात करते हैं। तब हमको ऐसा स्पिनर नजर आता है जो अनिल कुंबले और हरभजन सिंह की विरासत को बखूबी आगे बढ़ा रहा है। हकीकत तो यह है कि अश्विन अपने 2011 में अपने डेब्यू से भारत में सबसे बड़े मैच विनर हैं।
अपने चमचमाते हुए टेस्ट करियर में अश्विन के पास 74 टेस्ट मैचों में 377 विकेट हैं जो उन्होंने 25.53 के औसत से लिए हैं। उनका स्ट्राइक रेट तो वाकई में किसी तेज गेंदबाज जैसा है जो कि 54 का है। यानी की अश्विन द्वारा विकेट लेने की गति शेन वार्न, मुथैया मुरलीधरन और अनिल कुंबले से भी तेज है।
World Test Championship के फाइनल में खेलने को लेकर उत्साहित हैं केन विलियमसन

2013 के बाद से गजब का रिकॉर्ड-
अश्विन ने भारत में 22.8 के औसत से सिर्फ 43 टेस्ट मैचों में 254 विकेट लिए हैं। लेकिन फिर से जो पैरामीटर सही मायने में खड़ा है, वह स्ट्राइक रेट है- 49.4 पर, यह टेस्ट क्रिकेट इतिहास में घर पर एक स्पिनर (न्यूनतम 100 विकेट) के लिए सबसे अच्छा है। इसका मतलब है कि भारत में अश्विन एक अधिक खतरनाक गेंदबाज है। वे फिर से घर में मुरलीधरन, जिम लेकर, अनिल कुंबले , या शेन वार्न से खतरनाक हैं।
भारत ने फरवरी 2013 के बाद से जो टेस्ट सीरीज खेली हैं वे सब जीती हैं। तब से लेकर भारत ने 34 में से 28 टेस्ट घर पर जीते हैं। पांच मैच ड्रा रहे और केवल एक ही हारा है। अश्विन ने इस दौरान कमाल का योगदान किया है। उन्होंने इन 34 टेस्ट मैचों में 21.57 के औसत और 47.8 के स्ट्राइक रेट से 200 विकेट लिए हैं।

20 से कम औसत, 45 से कम स्ट्राइक रेट!
इन 200 में से भी 180 विकेट उन मैचों में आए हैं जिनमें भारत ने जीत हासिल की है। इन जीत वाले मैचों में अश्विन का औसत 18.99 हो जाता है और स्ट्राइक रेट 43.4 का जबरदस्त। पिछले 8 सालों में ऐसा अश्विन का जलवा रहा है।
अश्विन की निरंतरता के बारे में क्या कहा जाए, इसके इसी से समझा जा सकता है कि 2013 से भारत में खेली गई 115 पारियों में वे केवल 14 ही बार विकेट नहीं ले पाए। जबकि 57 बार उन्होंने तीन या उससे ज्यादा विकेट लिए।

90 के दशक के कुंबले से भी आगे अश्विन-
अनिल कुंबले 1990 के दशक में घर पर भारत के सबसे बड़े मैच विनर रहे हैं और यह दशक ऐसा रहा है जब भारत ने घर पर कोई भी टेस्ट सीरीज नहीं हारी थी। लेग स्पिनर ने तब 29 घरेलू टेस्ट में 21.35 के औसत से 163 विकेट लिए थे और उनका स्ट्राइक रेट 54.6 का था।
जबकि अश्विन यहां बेहतर हैं क्योंकि वे 34 टेस्टों में 200 विकेट 21.57 के औसत और 47.8 के स्ट्राइक रेट से ले चुके हैं।
अपने 400 विकेट के करीब पहुंच चुके रविचंद्रन अश्विन पहले ही भारतीय क्रिकेट में अपनी छाप छोड़ चुके हैं। उन्होंने भारतीय क्रिकेट इतिहास के सर्वाधिक शक्तिशाली युग में सर्वाधिक योगदान में से एक दिया है।


Click it and Unblock the Notifications
